Lalit Modi का सनसनीखेज खुलासा: Sharad Pawar अध्यक्ष न बनते तो कभी नहीं शुरू हो पाता IPL

इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के जनक ललित मोदी के अनुसार, लीग का जन्म 2005 के उस ऐतिहासिक बीसीसीआई चुनाव के बाद हुआ, जिसमें शरद पवार ने जीत हासिल की थी। मोदी का दावा है कि यह चुनाव भारतीय क्रिकेट का सबसे बड़ा मोड़ था, जिसने क्रिकेट को एक नए कारोबारी स्तर पर पहुंचाकर आईपीएल जैसी क्रांति को जन्म दिया।
भारतीय क्रिकेट की सबसे बड़ी और सबसे कमाई करने वाली प्रतियोगिता मानी जाने वाली इंडियन प्रीमियर लीग की शुरुआत के पीछे किस तरह की राजनीतिक और प्रशासनिक लड़ाई चली थी, इसको लेकर अब ललित मोदी ने कई बड़े दावे किए हैं।
इंडियन प्रीमियर लीग के संस्थापक माने जाने वाले ललित मोदी ने हाल ही में एक बातचीत में बताया कि वर्ष 2005 में भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड के चुनावों में शरद पवार को अध्यक्ष बनवाने के लिए उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई थी। उनका कहना है कि अगर उस समय शरद पवार बोर्ड के अध्यक्ष नहीं बनते, तो इंडियन प्रीमियर लीग की शुरुआत संभव नहीं हो पाती।
गौरतलब है कि इंडियन प्रीमियर लीग ने भारतीय क्रिकेट की तस्वीर पूरी तरह बदल दी थी। इस प्रतियोगिता ने क्रिकेट को नए कारोबारी स्तर पर पहुंचाया और भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड को दुनिया का सबसे ताकतवर क्रिकेट संगठन बना दिया। हालांकि ललित मोदी खुद लंबे समय से विवादों में रहे हैं, लेकिन इस प्रतियोगिता की नींव रखने में उनकी भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
मौजूद जानकारी के अनुसार ललित मोदी ने बताया कि उस दौर में भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड के भीतर दो बड़े गुटों के बीच जबरदस्त संघर्ष चल रहा था। एक तरफ शरद पवार का समूह था, जबकि दूसरी तरफ जगमोहन डालमिया का प्रभाव बना हुआ था। उन्होंने दावा किया कि चुनाव जीतने के लिए दोनों पक्षों के बीच लगातार रणनीति, दबाव और समर्थन जुटाने की कोशिशें चल रही थीं।
ललित मोदी के मुताबिक शुरुआती चुनाव में उनका पक्ष केवल एक वोट से हार गया था। उन्होंने दावा किया कि पुणे क्रिकेट संघ के भीतर मतभेद और आखिरी समय में बदले समर्थन के कारण यह हार हुई थी। इसके बाद अगले साल संघर्ष और भी ज्यादा बढ़ गया था।
बता दें कि ललित मोदी ने उस समय के कई बड़े क्रिकेट प्रशासकों के नाम भी लिए। उन्होंने दावा किया कि अनुराग ठाकुर, अरुण जेटली, एन श्रीनिवासन और राजीव शुक्ला जैसे कई प्रभावशाली लोग जगमोहन डालमिया के पक्ष में थे। हालांकि उन्होंने कहा कि लगातार संपर्क और रणनीति के जरिए उनके समूह ने आखिरकार बोर्ड के सदस्यों का भरोसा जीत लिया था।
गौरतलब है कि ललित मोदी ने वर्ष 2005 के चुनावों को भारतीय क्रिकेट प्रशासन का सबसे नाटकीय दौर बताया है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव के दौरान अदालत तक मामला पहुंच गया था और सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की निगरानी में चुनाव कराने का आदेश लिया गया था। उनके अनुसार कोलकाता में हुई उस बैठक के दौरान भारी हंगामा हुआ था और पुलिस व्यवस्था तक करनी पड़ी थी।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान कई सदस्यों को होटल के कमरों में रोका गया और कुछ लोगों की उड़ानों तक का रास्ता बदल दिया गया था ताकि मतदान प्रभावित किया जा सके। ललित मोदी ने स्वीकार किया कि उनके समूह ने भी कुछ सदस्यों की उड़ानों को दूसरी जगह मोड़ने की रणनीति अपनाई थी। उनका कहना था कि उस समय यह चुनाव किसी बड़े राजनीतिक मुकाबले जैसा बन चुका था।
मौजूद जानकारी के अनुसार अंत में शरद पवार का समूह चुनाव जीतने में सफल रहा और उसी के बाद भारतीय क्रिकेट में बड़े बदलाव की शुरुआत हुई। ललित मोदी का दावा है कि यही वह मोड़ था, जहां से आधुनिक क्रिकेट की नई क्रांति शुरू हुई और बाद में इंडियन प्रीमियर लीग अस्तित्व में आई।
जानकारों का मानना है कि इंडियन प्रीमियर लीग ने सिर्फ क्रिकेट ही नहीं बल्कि खेल कारोबार, प्रसारण और खिलाड़ियों की कमाई के तरीके को भी पूरी तरह बदल दिया।
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