T20 World Cup से पहले बीसीसीआई पर सवाल, नजम सेठी ने खोली क्रिकेट राजनीति की परतें

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Ankit Jaiswal । Feb 5 2026 5:28PM

पाकिस्तान और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के विरोध के बाद आईसीसी में क्रिकेट की राजनीति गरमा गई है, जिसके केंद्र में बीसीसीआई का दबदबा है। पूर्व पीसीबी अध्यक्ष नजम सेठी के अनुसार, राजस्व बंटवारे में असमानता और वादों से पीछे हटने की वजह से बोर्ड एकजुट हो रहे हैं, जो टी20 वर्ल्ड कप से पहले एक बड़े टकराव का संकेत है।

टी20 वर्ल्ड कप से पहले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की राजनीति एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार चर्चा के केंद्र में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई और बाकी क्रिकेट बोर्डों के साथ उसके रिश्ते हैं। बांग्लादेश और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की ओर से अलग-अलग तरीके से विरोध के संकेत मिलने के बाद आईसीसी में शक्ति संतुलन को लेकर बहस तेज हो गई है।

बता दें कि पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ अपने मुकाबले के बहिष्कार का संकेत दिया है, जबकि बांग्लादेश बोर्ड ने टूर्नामेंट से हटने जैसे कड़े कदम पर विचार किया हैं। इसी बीच पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष नजम सेठी ने बीसीसीआई की भूमिका और उसके प्रभाव को लेकर खुलकर अपनी बात रखी है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, नजम सेठी का मानना है कि बीसीसीआई लंबे समय से अपने आर्थिक दबदबे का इस्तेमाल कर आईसीसी और अन्य बोर्डों पर असर डालता रहा हैं। इंडिया टुडे से बातचीत में सेठी ने कहा कि पाकिस्तान बोर्ड के फैसले सरकार से सलाह के बाद लिए गए हैं और अभी भी बातचीत की गुंजाइश बनी हुई है।

गौरतलब है कि सेठी ने ‘बिग थ्री’ मॉडल का जिक्र करते हुए कहा कि भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड को आईसीसी राजस्व का बड़ा हिस्सा मिलना शुरू हुआ, जिसका पाकिस्तान ने शुरू से विरोध किया था। उन्होंने बताया कि उस समय पीसीबी ने इस असमान व्यवस्था को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था और इसी मुद्दे पर बीसीसीआई से मतभेद और गहरे हो गए थे।

सेठी ने उस दौर का भी जिक्र किया जब भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय सीरीज पर सहमति बनी थी, लेकिन ऐन वक्त पर बीसीसीआई के पीछे हट जाने को उन्होंने सबसे बड़ा अपमान बताया हैं। उनके अनुसार, मुंबई जाकर भी बीसीसीआई नेतृत्व से मुलाकात न हो पाना रिश्तों में आई दरार का बड़ा उदाहरण रहा है।

वर्तमान हालात पर बात करते हुए सेठी ने कहा कि पाकिस्तान और बांग्लादेश अगर साथ आते हैं तो वे आईसीसी के भीतर एक मजबूत संदेश दे सकते हैं। उन्होंने माना कि इस विरोध से तात्कालिक नुकसान हो सकता है, लेकिन लंबे समय में इससे ज्यादा संतुलित और निष्पक्ष आईसीसी की राह बन सकती है।

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