खुल गए केदारनाथ धाम के कपाट, मानवता के साथ-साथ सभी धर्मों के लिए बड़ा संदेश

खुल गए केदारनाथ धाम के कपाट, मानवता के साथ-साथ सभी धर्मों के लिए बड़ा संदेश

चार धामों में से एक, 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल केदारनाथ धाम को लेकर बड़ी खबर आई है। कोरोना संक्रमण की वैश्विक महामारी और देश में लागू लॉकडाउन के बीच बाबा केदारनाथ धाम के कपाट बुधवार सुबह से खुल गए।

कोरोना की वैश्विक महामारी की वजह से देश में लॉकडाउन लागू है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार से लेकर सभी राज्यों के मुख्यमंत्री लगातार बैठकें कर रहे हैं ताकि कोरोना नाम की इस वैश्विक महामारी को हराया जा सके। वैसे तो भारत सरकार के निर्देश पर देश भर में 3 मई तक लॉकडाउन लागू है। लेकिन इसके बावजूद राज्य सरकारें अपने-अपने स्तर पर भी कोरोना के खतरे को देखते हुए प्रभावित जिलों में सख्ती कर रही है।

शुरुआती दौर में ऐसा लग रहा था कि भारत कोरोना के खिलाफ लड़ाई बस जीतने ही वाला है लेकिन इसी बीच तब्लीगी जमात वाली घटना की वजह से देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ गई। इस जमात से निकले लोगों ने जाने-अनजाने देश के ज्यादातर राज्यों में कोरोना के कहर को बेकाबू कर दिया। इस बीच कभी कोई नेता अपने पोते की धूमधाम से शादी करता नजर आया तो कोई अपना जन्मदिन मनाता नजर आया। समाज का एक तबका धर्म के नाम पर तो कभी वीवीआईपी होने के नाम पर कोरोना के नियमों को धत्ता बताता नजर आया, ठेंगा दिखाता नजर आया। धर्म के नाम पर मनमानी तो तमाम हदों को पार करती नजर आ रही है। सभी मुस्लिम धर्मगुरुओं, इमामों, मुस्लिम धर्म से जुड़े धार्मिक-सामाजिक संगठनों के साथ-साथ भारतीय मुस्लिम समाज ने मिलकर संयुक्त रूप से यह तय किया था कि 24 अप्रैल से शुरू हुए रमजान के पवित्र महीने में घरों पर रहकर ही इबादत, इफ्तार और अन्य धार्मिक रीति-रिवाजों को पूरा किया जाएगा। इसे लेकर लगातार जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है और लोगों से अपील भी की जा रही है लेकिन इसके बावजूद देश मे कई राज्यों से जो तस्वीरें आ रही हैं वो काफी चौंकाने वाली है।

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इस बीच चार धामों में से एक, 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल केदारनाथ धाम को लेकर बड़ी खबर आई है। कोरोना संक्रमण की वैश्विक महामारी और देश में लागू लॉकडाउन के बीच बाबा केदारनाथ धाम के कपाट बुधवार सुबह से खुल गए। बाबा केदारनाथ संपूर्ण विश्व का कल्याण करें और कोरोना महामारी संकट से सबकी रक्षा करें, इसी कामना से उनकी पहली पूजा की गई। केदारनाथ धाम के कपाट मेष लग्न में बुधवार को सुबह 6:10 बजे ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिए गए। इसके लिए तड़के 3 बजे से ही मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई। इसके लिए संगम से लेकर बाबा के मंदिर परिसर तक बर्फ को काटकर 4 फीट से अधिक चौड़ा रास्ता बनाया गया।

बाबा केदारनाथ के कपाट खुलने से भी बड़ी खबर तो ये है

केदारनाथ मंदिर के कपाट खुल गए हैं, निश्चित तौर पर यह बड़ी खबर है। बाबा के कपाट खुलने का इंतजार लाखों श्रद्धालु करते हैं लेकिन इस बार केदारनाथ धाम के कपाट खुलने से भी एक बड़ी ख़बर है। जी हां, सही मायनों में बड़ी ख़बर है। बाबा के कपाट खुलने से पहले और खुलने के दौरान जो कुछ भी हुआ, वो अपने आप में बड़ी ख़बर है। बाबा सबके हैं और सब बाबा के हैं। बाबा ने समूचे विश्व को एक बार फिर से शांति और मानवता का संदेश देते हुए यह बता दिया कि मानवता सभी धर्मों से ऊंचा है। मानव धर्म सभी धर्मों से सर्वोपरि है। सवाल जब मनुष्य की सुरक्षा और कल्याण का हो तो धार्मिक रीति-रिवाज के नाम पर इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। 

कोरोना महामारी, लॉकडाउन, सोशल डिस्टेंसिंग और बाबा केदारनाथ

केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के समय पूजा-अर्चना तो बड़े ही विधि-विधान के साथ की गई। मंत्रोच्चार के साथ मंदिर के दरवाजे खोले गए लेकिन तमाम धार्मिक औपचारिकताओं को पूरा करते समय भी लॉकडाउन के नियमों का पूरी तरह से पालन किया गया। भक्तों की भीड़ नहीं लगने दी गई। पूजा-अर्चना के दौरान मौजूद 15-16 लोगों ने भी सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पूरी तरह से पालन करके एक मिसाल पेश करने का काम किया।

कोरोना महामारी के कारण पहली बार मंदिर में कई परंपराओं को बदल दिया गया। ऐसा पहली बार हुआ जब मंदिर के कपाट खुलते समय यहां भक्तों की लाइन नहीं लगी थी। मंदिर में भीड़ न हो इसके लिए प्रशासन ने श्रद्धालुओं को मंदिर में जाने की अनुमति नहीं दी है। कोरोना महामारी की वजह से जारी लॉकडाउन को देखते हुए भी मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं को धाम में आने की अनुमति नहीं देने का निर्णय किया है।

केदारनाथ धाम के रावल भी पूजा-अर्चना में शामिल नहीं हुए

बाबा केदारनाथ धाम के कपाट खुलते समय बाबा के रावल ही पूजा-अर्चना करते हैं। लेकिन केदारनाथ धाम के रावल भीमाशंकर लिंग क्वारंटीन में होने के कारण पूजा में मौजूद नहीं रहें। दरअसल, रावल 19 अप्रैल को महाराष्ट्र से उत्तराखंड लौटे थे इसलिए नियमों का पालन करते हुए हुए वो 14 दिनों के लिए उखीमठ में ही क्वारंटीन में हैं। वो 3 मई को केदारनाथ धाम पहुंचेंगे इसलिए उनके प्रतिनिधि के तौर पर पुजारी शिवशंकर लिंग ने कपाट खुलने की परंपरा का निर्वहन किया।

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पुजारी के साथ देवस्थानम बोर्ड के 16 लोगों को ही केदारनाथ जाने की अनुमति मिली है। कुछ मजदूरों के अलावा धाम में सुरक्षा और अन्य जरूरी प्रशासनिक इंतजाम करने के लिए पुलिस और प्रशासन के लगभग 15 लोग भी वहां पहुंचे। लेकिन इसके बावजूद भी पूजा-अर्चना के दौरान केवल 15-16 लोग ही मौजूद रहें और सबने सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पूरी तरह से पालन किया। कपाट खुलने के बाद मंदिर में पहली पूजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से हुई। प्रधानमंत्री मोदी के नाम से कोरोना मुक्ति और विश्व कल्याण की मनोकामना के साथ बाबा की रुद्राभिषेक पूजा की गई।

केदारनाथ धाम के उदाहरण का सबको करना चाहिए अनुसरण

कोरोना महामारी के वैश्विक संकट के इस दौर में केदारनाथ धाम ने जो उदाहरण प्रस्तुत किया है, उसके लिए प्रशासन निश्चित तौर पर बधाई का पात्र है। केदारनाथ धाम के देवस्थानम बोर्ड के सभी सदस्य यह फैसला करने के लिए बधाई और धन्यवाद के पात्र हैं। महाराष्ट्र की यात्रा से आने की वजह से नियमों का पालन करते हुए खुद को 14 दिनों के लिए उखीमठ में ही क्वारंटीन में रखने के फैसले के लिए मंदिर के रावल भी धन्यवाद के पात्र हैं क्योंकि खुद को कपाट खुलने के समय होने वाली महत्वपूर्ण पूजा-अर्चना से दूर रखने का फैसला लेना इतना आसान भी नहीं होता है। मानव कल्याण का दर्जा हमेशा सभी धर्मों से ऊपर होता है इसलिए हम सबको यह अपील तो करनी ही चाहिए कि सभी धर्मों के लोग बाबा केदारनाथ धाम के फैसलों का अनुसरण करें क्योंकि यह लड़ाई बहुत लंबी है। मनुष्य के कल्याण और जीवन की रक्षा के लिए यह लड़ाई हमें जीतनी है, हर हाल में जीतनी है और यह बात भटके हुए लोग जितनी जल्दी समझ लेंगे, सबके लिए अच्छा होगा।

-संतोष पाठक

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)