आखिर एआई, जियो पॉलिटिक्स को कैसे बदल रहा है?

Artificial Intelligence
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कमलेश पांडे । Feb 17 2026 7:30PM

जहां तक एआई की होड़ में भारत का स्थान की बात है तो भारत AI को सामाजिक भलाई के लिए उपयोग कर जियोपॉलिटिक्स में मजबूत हो रहा है, जैसा कि इंडिया AI समिट में PM मोदी के जियो पवेलियन दौरे से पता चला है। यह वैश्विक सप्लाई चेन में नया अवसर देगा, लेकिन चिप्स और डेटा संप्रभुता पर निर्भरता बनी रहेगी।

समकालीन दुनिया इंटरनेट और सोशल मीडिया आदि के माध्यम से परस्पर जुड़ी हुई है, लिहाजा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जियोपॉलिटिक्स को तेजी से बदल रहा है। इस लिहाज से सैन्य शक्ति, आर्थिक प्रतिस्पर्धा और तकनीकी संप्रभुता प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। वर्तमान में देखा जाए तो यह चिप्स, डेटा और कंप्यूटिंग पावर पर वैश्विक दौड़ को तेज कर रहा है, जबकि भविष्य में यह नई गठबंधन और संघर्षों को भी जन्म दे सकता है।

जहां तक एआई के वर्तमान प्रभाव की बात है तो एआई ने जियोपॉलिटिक्स में नई शक्ति संतुलन पैदा किया है, जहां अमेरिका और चीन जैसे देश चिप निर्माण और डेटा नियंत्रण के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। सप्लाई चेन का विखंडन हो रहा है, जिससे देश अपनी AI संप्रभुता पर जोर दे रहे हैं, जैसे भारत डोमेस्टिक मॉडल्स विकसित कर रहा है। भारत AI Impact Summit 2026 में जियो के AI मॉडल्स ने स्वास्थ्य, शिक्षा और संस्कृति में समावेशी उपयोग दिखाया, जो वैश्विक दक्षिण के लिए मॉडल बन सकता है।

इसी प्रकार से सैन्य और सुरक्षा आयाम भी तेजी से बदल रहे हैं, खासकर एआई सैन्य रणनीतियों को बदल रहा है, जैसे स्वायत्त हथियार और साइबर युद्ध में इसका उपयोग, जो पारंपरिक शक्ति संतुलन को चुनौती देता है। इसप्रकार देखा जाए तो जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ाने में AI की भूमिका स्पष्ट है, जहां ट्रंप 2.0 जैसे कारक वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर रहे हैं। वहीं भारत जैसी अर्थव्यवस्थाएं AI को लॉजिस्टिक्स और आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत बनाने के लिए निवेश कर रही हैं।

इसलिए भविष्य के प्रभाव भी स्पष्ट हैं। निकट भविष्य में AI राष्ट्रों की ताकत का निर्धारक बनेगा, जिसमें राष्ट्रीय AI द्वीप (national islands) बनेंगे और वैश्विक सहयोग कम हो सकता है। यही वजह है कि भारत 'AI for All' विजन से गरीब-अमीर देशों तक पहुंच बढ़ा रहा है, जो जियोपॉलिटिकल स्थिरता ला सकता है। हालांकि, असमानता और नियमन की चुनौतियां बढ़ेंगी, जैसे सामाजिक-राजनीतिक प्रभावों पर विनियमन आदि।

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जहां तक एआई की होड़ में भारत का स्थान की बात है तो भारत AI को सामाजिक भलाई के लिए उपयोग कर जियोपॉलिटिक्स में मजबूत हो रहा है, जैसा कि इंडिया AI समिट में PM मोदी के जियो पवेलियन दौरे से पता चला है। यह वैश्विक सप्लाई चेन में नया अवसर देगा, लेकिन चिप्स और डेटा संप्रभुता पर निर्भरता बनी रहेगी। साक्ष्य-आधारित AI से अनपेक्षित जोखिम कम होंगे।

# भारत की AI भू-राजनीतिक रणनीति तकनीकी संप्रभुता, समावेशी विकास और वैश्विक नेतृत्व पर केंद्रित 

भारत की AI भू-राजनीतिक रणनीति तकनीकी संप्रभुता, समावेशी विकास और वैश्विक नेतृत्व पर केंद्रित है। यह #AIforAll विजन के तहत AI को लोकतांत्रिक बनाने पर जोर देती है, जिसमें आर्थिक निर्भरता कम करना और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना मजबूत करना शामिल है।इसके प्रमुख स्तंभ इस प्रकार हैं:- भारत AI मिशन (मार्च 2024 से) सात स्तंभों—इंफ्रास्ट्रक्चर, कंप्यूटिंग पावर, डेटा प्लेटफॉर्म, स्टार्टअप फंडिंग, अनुसंधान, स्किलिंग और विश्वास-आधारित AI—पर आधारित है, जो वैश्विक AI दौड़ में भारत को मजबूत बनाता है। नीति आयोग की राष्ट्रीय AI रणनीति #AIforAll के माध्यम से कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और स्मार्ट सिटीज जैसे क्षेत्रों में AI को प्राथमिकता देती है। यह अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा में संतुलन बनाते हुए, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) से AI परिनियोजन में उत्कृष्टता हासिल करने का लक्ष्य रखती है। 

जहां तक भू-राजनीतिक फोकस की बात है तो भारत की रणनीति AI संप्रभुता पर जोर देती है, जैसे IndiaAI मिशन और राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन से स्वदेशी अनुसंधान को बढ़ावा, ताकि विदेशी फर्मों पर निर्भरता कम हो और राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत हो। वहीं वैश्विक मंचों जैसे पेरिस AI एक्शन समिट 2025 में भारत फ्रांस के साथ सह-अध्यक्षता कर AI डिवाइड कम करने और जिम्मेदार AI शासन को बढ़ावा दे रहा है। जबकि उच्च-जोखिम AI के लिए गवर्नेंस दिशानिर्देश जारी कर जोखिमों जैसे डीपफेक और गलत सूचना पर नियंत्रण सुनिश्चित किया जा रहा है। 

इस राह में भारत की चुनौतियां और भविष्य स्पष्ट है। डेटा उपयोग स्पष्टता की कमी, अविकसित अनुसंधान इंफ्रास्ट्रक्चर और दायित्व मुद्दे वैश्विक AI क्षमता को सीमित कर सकते हैं, इसलिए नीतिगत हस्तक्षेप जैसे सैंडबॉक्स और कंप्यूट एक्सेस सुधार जरूरी हैं। भू-राजनीतिक दौड़ में भारत AI उपयोग से निर्माण की ओर बढ़ रहा है, जो इंडो-पैसिफिक शक्ति संतुलन को प्रभावित करेगा। AI Impact Summit 2026 जैसे आयोजनों से वैश्विक दक्षिण के लिए मॉडल स्थापित हो रहा है।

# समझिए एआई से जियो पॉलिटिक्स कैसे बदल रही है?

एआई जियोपॉलिटिक्स को तेजी से बदल रही है, खासकर सैन्य क्षमताओं, आर्थिक प्रतिस्पर्धा और डेटा संप्रभुता के क्षेत्र में। यह देशों के बीच नई शक्ति प्रतिस्पर्धा को जन्म दे रही है, जहां तकनीकी वर्चस्व राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार बन गया है। जहां तक सैन्य और सुरक्षा प्रभाव की बात है तो एआई हथियार प्रणालियों, निगरानी और साइबर युद्ध में क्रांति ला रही है। उदाहरणस्वरूप, स्वायत्त ड्रोन और भविष्यवाणी विश्लेषण से युद्ध रणनीतियां अधिक सटीक हो गई हैं, जिससे पारंपरिक सैन्य शक्ति का महत्व घट रहा है। इससे जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़े हैं, जैसे यूएस-चीन के बीच चिप युद्ध।

जहां तक आर्थिक वर्चस्व की होड़ की बात है तो एआई सप्लाई चेन को खंडित कर रही है, जहां देश चिप्स, डेटा और मॉडल्स पर आत्मनिर्भरता चाहते हैं। भारत जैसे देश डोमेस्टिक एआई पर जोर देकर वैश्विक खिलाड़ी बन रहे हैं, जबकि जियोपॉलिटिकल टेंशन व्यापार को प्रभावित कर रहे हैं। ट्रंप 2.0 जैसे नीतिगत बदलाव एआई निवेश को नया आकार दे रहे हैं।

जहां तक राजनीतिक और सामाजिक बदलाव की बात है तो चुनावों में एआई डीपफेक और लक्षित प्रचार से लोकतंत्र को चुनौती दे रही है। साथ ही, यह सरकारी निर्णयों को डेटा-आधारित बना रही है, लेकिन पूर्वाग्रहों का खतरा भी है। भारत में जियो और सरकार एआई को स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि के लिए समावेशी बना रहे हैं।

जहां तक वैश्विक संतुलन में बदलाव की बात है तो चीन और भारत जैसे देश एआई में अग्रणी बनकर मध्य वर्ग की ताकत से जियोपॉलिटिक्स को प्रभावित कर रहे हैं। विश्व आर्थिक मंच जैसे प्लेटफॉर्म पर एआई निवेश (1.5 ट्रिलियन डॉलर) को भू-राजनीतिक स्थिरता का आधार माना जा रहा है।

# चीन और अमेरिका की AI रणनीति से भारत का तुलना 

जहां तक चीन और अमेरिका की AI रणनीति से भारत का तुलना की बात है तो भारत, अमेरिका और चीन की AI रणनीतियां उनके भू-राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को दर्शाती हैं, जहां अमेरिका नवाचार पर, चीन राज्य नियंत्रण पर और भारत समावेशी उपयोग पर केंद्रित है। स्टैनफोर्ड इंडेक्स जैसे आकलनों में अमेरिका शीर्ष पर है, चीन रिसर्च वॉल्यूम में मजबूत है, जबकि भारत टैलेंट और स्किलिंग में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

जहां तक निवेश और बुनियादी ढांचा में तुलना की बात है तो अमेरिका ओपनएआई, गूगल जैसे निजी दिग्गजों से लचीले नियमों के साथ AI लीडरशिप बनाए रखता है, जबकि चीन बायडू-अलीबाबा को सरकारी समर्थन से 2030 तक वैश्विक नेतृत्व का लक्ष्य रखता है। वहीं भारत सर्वम AI जैसे संप्रभु, बहुभाषी मॉडल्स से वैश्विक दक्षिण की आवाज बन रहा है, जो अमेरिका-चीन से अलग समावेशी पथ अपनाता है—हालांकि निवेश में पीछे है।

जहां तक अमेरिका, चीन और भारत के करवटों के भू-राजनीतिक निहितार्थ की बात है तो अमेरिका वैश्विक पार्टनरशिप से प्रभाव बढ़ाता है, चीन निगरानी और सैन्य AI से, जबकि भारत पेरिस AI समिट जैसे मंचों से डिवाइड कम कर शासन में AI उपयोग पर जोर देता है। यही वजह है कि भारत चीन से आगे निकलकर तीसरा स्थान बना रहा है, लेकिन हार्डवेयर अंतर को कम करने की जरूरत है।

- कमलेश पांडेय

वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक

(इस लेख में लेखक के अपने विचार हैं।)
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