बजट दस्तावेजों को भारतीय परम्पराओं से जोड़कर निर्मला ने दिया महत्वपूर्ण संदेश

By अजेंद्र अजय | Publish Date: Jul 6 2019 12:18PM
बजट दस्तावेजों को भारतीय परम्पराओं से जोड़कर निर्मला ने दिया महत्वपूर्ण संदेश
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निर्मला सीतारमण ने बजट दस्तावेजों को नए अंदाज में पेश कर इसे भारतीय परंपराओं से जोड़ने की कोशिश की है। यह भी संदेश देने का प्रयास किया है कि गुलामी के दौर की बेकार परंपराओं को तोड़कर नई सोच व न्यू इंडिया को बढ़ावा दिया जाएगा।

समय चक्र के साथ इतिहास का सतत संबंध है। समय के साथ कुछ इतिहास का हिस्सा बन जाते हैं और कुछ इतिहास सृजित करते हैं। शुक्रवार को लोकसभा में जब केंद्रीय बजट प्रस्तुत हुआ तो यह घटना एक नया इतिहास रचने की साक्षी बन गई। निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट प्रस्तुत कर देश की पहली महिला वित्त मंत्री के रूप में अपना नाम दर्ज करा लिया। हालांकि, इससे पूर्व 28 फरवरी, 1970 को इंदिरा गांधी ने भी बजट प्रस्तुत किया था। मगर वह प्रधानमंत्री पद के साथ-साथ वित्त मंत्री का दोहरा प्रभार संभाल रहीं थीं। इंदिरा गांधी के पास 16 जुलाई 1969 से 27 जून 1970 तक वित्त मंत्री का प्रभार भी था। इसलिए निर्मला सीतारमण पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री हैं।



निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट प्रस्तुत करने के साथ देश में वर्षों पुरानी एक परंपरा को भी तोड़ डाला। अंग्रेजों के समय से तत्कालीन वित्त मंत्री चमड़े के ब्रीफकेस में बजट दस्तावेज लेकर पहुंचते थे। मगर निर्मला सीतारमण लाल मखमली कपड़े में बजट दस्तावेजों को रख कर संसद पहुंचीं। वित्त मंत्री की पोटली पर अशोक स्तंभ नत्थी किया गया था और पोटली को लाल व पीली पट्टियों वाले रिबन से बांधा गया था। यानी, बजट को देश में प्रचलित परंपरागत बही खाते वाला रूप दिया गया था। बही खातों पर लाल रंग के कपड़े की जिल्द चढ़ी होती है। व्यापार फले-फूले इसके लिए चंदन से स्वास्तिक का निशान बनाया जाता है।
निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट के नए रूप को भारतीय धार्मिक परंपराओं से जोड़कर देखा जा सकता है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं में धन, संपदा व समृद्धि की देवी के रूप में महालक्ष्मी की पूजा की जाती है। लक्ष्मी पूजन के लिए लाल रेशमी कपड़ा, सोना, रोली व चंदन सर्वार्थ सिद्धिकारक माने जाते हैं। इस लिहाज से स्वर्णिम रंग का अशोक स्तंभ सोने का प्रतीक, लाल व पीले रंग का रिबन रोली-चंदन और लाल रंग का मखमली कपड़ा लक्ष्मी पूजन में चढ़ाई जाने वाली भेंट का प्रतीकात्मक स्वरूप मान सकते हैं। भारतीय संस्कृति में लाल रंग को पवित्रता का प्रतीक भी माना जाता है। निर्मला सीतारमण ने बजट दस्तावेजों को नए अंदाज में पेश कर इसे भारतीय परंपराओं से जोड़ने की कोशिश की है। यह भी संदेश देने का प्रयास किया है कि गुलामी के दौर की बेकार परंपराओं को तोड़कर नई सोच व न्यू इंडिया को बढ़ावा दिया जाएगा।


निर्मला सीतारमण पहले तब भी अचानक चर्चाओं में आयी थीं, जब उन्हें मोदी-1 सरकार में रक्षा मंत्री बनाया गया था। निर्मला देश की पहली पूर्णकालिक महिला रक्षा मंत्री बनीं। इससे पूर्व 14 जनवरी 1980 से 15 जनवरी 1982 तक तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पास रक्षा मंत्री का प्रभार रहा है। रक्षा मंत्री के रूप में निर्मला सीतारमण के कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। महिलाओं के लिए सेना के द्वार खोले गए। राफेल विमान सौदे को लेकर उन्होंने राहुल गांधी के आरोपों का मुंहतोड़ जवाब दिया। उनका नाम पहली ऐसी रक्षा मंत्री के रूप में दर्ज है, जिन्होंने भारतीय सेना के अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमान सुखोई-30 में उड़ान भरी। रक्षा मंत्री के रूप में वे लगातार सैनिकों की हौसला अफजाई करती रहीं। सैनिकों के उत्साह को बढ़ाने के लिए निर्मला सीतारमन एक बार दशहरे के मौके पर विश्व के सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र सियाचिन तक पहुंच गईं।


18 अगस्त 1959 को मदुरै (तमिलनाडु) में जन्मी निर्मला सीतारमण उन विरले राजनीतिज्ञों में से एक हैं, जिन्होंने कम समय में राजनीति के शिखर को छुआ है। तमिलनाडु के त्रिरूचिरापल्ली  स्थित सीतालक्ष्मी रामास्वामी कालेज व दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाली निर्मला सीतारमण विवाह के पश्चात कुछ वर्षों तक लंदन में रहीं। वहां उन्होंने दुनिया की सबसे बड़ी प्रोफेशनल सर्विसेज फर्म में से एक और चार बड़ी लेखा फर्मों में सबसे बड़ी 'प्राइस वॉटर हाउस कूपर्स' में वरिष्ठ प्रबंधक (शोध एवं विश्लेषण) के पद पर कार्य किया। इसके बाद कुछ समय तक उन्होंने बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के लिए काम किया। 
 
वर्ष 1991 में निर्मला भारत लौटीं और हैदराबाद स्थित सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी स्टडीज में उप निदेशक बनीं। वर्ष 2003 से 05 तक राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य रहीं। उन्होंने वर्ष 2008 में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की और राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य बनीं। वर्ष 2010 में भाजपा ने उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया। वर्ष 2014 में केंद्र में मोदी सरकार का गठन होने पर निर्मला सीतारमण को किसी सदन का सदस्य ना होने के बावजूद भी वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में स्वतंत्र प्रभार का राज्य मंत्री और वित्त व कारपोरेट कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री का प्रभार दिया गया। मंत्री नियुक्त होने के बाद उन्हें राज्यसभा में भेजा गया।
निर्मला सीतारमण एक अनुभवी अर्थशास्त्री हैं। गंभीर विषयों पर उनकी गहरी पकड़ है। तर्क शक्ति व प्रभावी संवाद कला उनके व्यक्तित्व का हिस्सा हैं। वर्ष 2012 में भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने निर्मला सीतारमण को उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में मीडिया प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी थी। उस चुनाव में मुझे उनके साथ कार्य करने का अवसर मिला। कई लोगों के मन में सवाल उठता था कि एक दक्षिण भारतीय महिला ठेठ हिंदी भाषी प्रदेश में कैसे कार्य करेंगी? मगर उन्होंने सारी आशंकाओं को निर्मूल साबित कर दिखाया और अपने प्रबंधन की अमिट छाप छोड़ी।
 
मोदी सरकार-2 में निर्मला सीतारमण को वित्त जैसा भारी-भरकम मंत्रालय दिया गया है। केंद्र सरकार की ओर से उच्च स्तरीय निर्णय लेने वाली कैबिनेट की आठ समितियों में से सात में उनको जगह दी गई है। तो इसके पीछे निर्मला सीतारमण की अपने कार्य के प्रति पूर्ण निष्ठा, दक्षता और कार्य निष्पादन का बेहत्तर कौशल एकमेव कारण है। उनका व्यक्तित्व दूरदर्शितापूर्ण है। वह अपने कार्य के प्रति बेहद संजीदा रहती हैं और जो टास्क उन्हें दिया जाता है, उसे पूरा करने के लिए जुनून की हद तक चली जाती हैं। सामान्य बातचीत में बेहद सौम्य व सरल व्यवहार वाली निर्मला सीतारमण बिना किसी लाग-लपेट के अपनी बात रखती  हैं। उनकी यह शैली व व्यवहार उन्हें राजनेताओं की पारंपरिक छवि से अलग दिखाती है। उनके व्यक्तित्व के यही गुण शायद उन्हें राष्ट्रीय फलक पर अपनी एक अलग पहचान बनाने में सहायक सिद्ध हुए। बहरहाल, धार्मिक अभिरुचियों वाली इस अर्थशास्त्री से देश की बहुत उम्मीदें जुड़ी हुई हैं।
 
-अजेंद्र अजय
 
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं और उत्तराखंड भाजपा के नेता हैं।)
 

 

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