विपक्षी दलों ने आम बजट 2019 को नारों और जुमलों का पिटारा बताया

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Publish Date: Jul 5 2019 6:28PM
विपक्षी दलों ने आम बजट 2019 को नारों और जुमलों का पिटारा बताया
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राजद के राज्यसभा सदस्य मनोज झा ने कहा कि बजट में लुभावने नारों और नामों वाली योजनायें ही सुनाई दीं। उन्होंने कहा कि सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण से ही पता चल गया था कि सरकार ने अर्थव्यवस्था में गलत बीमारी की पहचान की, ऐसे में गलत इलाज होना तय था।

नयी दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा शुक्रवार को पेश आम बजट की विपक्षी दलों ने नारों और जुमलों का पिटारा बताते हुये कहा है कि बजट ने सभी तबकों को निराश किया है। संसद भवन परिसर में बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने कहा, ‘‘बजट में शामिल नारों और जुमलों पर लोकसभा में खूब ‘वाह वाह’ हो रही थी। हकीकत यह है कि बजट में ना तो नये भारत के निर्माण के बारे में कुछ है, ना ही आम आदमी के साथ किसी तरह के न्याय की झलक दिखती है।’’ सिब्बल ने इसे दिशाहीन बजट बताते हुये कहा कि कृषि, भारी उद्योग, वस्त्र, निर्यात और निवेश सहित अर्थव्यवस्था के किसी भी प्रमुख क्षेत्र के लिये बजट में कोई दिशा और दृष्टि नहीं दिखी। उन्होंने कहा, ‘‘इस बजट में ना विजन (दृष्टिकोंण) है ना प्रोवीजन (प्रावधान) है क्योंकि इसमें यह बताया ही नहीं गया है कि कहां से राजस्व प्राप्तियां हासिल की जायेंगी और कितना व्यय हुआ।’’

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राजद के राज्यसभा सदस्य मनोज झा ने कहा कि बजट में लुभावने नारों और नामों वाली योजनायें ही सुनाई दीं। उन्होंने कहा कि सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण से ही पता चल गया था कि सरकार ने अर्थव्यवस्था में गलत बीमारी की पहचान की, ऐसे में गलत इलाज होना तय था। झा ने कहा, ‘‘इस बजट में आर्थिक गति को दुरुस्त करने के लिये सिवाय प्रतीकों के कोइ रोडमैप नहीं है। सरकार ने यह बजट सरकार ने चुनिंदा समृद्ध घरानों को और अधिक समृद्ध करने के लिये बनाया है। सब कुछ निजी हाथों में सौंपना उचित नहीं है, जनता इसका प्रतिकार करेगी।’’
बसपा प्रमुख मायावती ने कहा, ‘‘यह बजट निजी क्षेत्र को बढ़ावा देकर कुछ बड़े पूंजीपतियों की ही मदद करने वाला है। जिससे दलितों व पिछड़ों के आरक्षण की ही नहीं बल्कि महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी, किसान और ग्रामीण समस्या और भी जटिल होगी। देश में पूंजी का विकास भी इससे संभव नहीं है।’’ मायावती ने ट्वीट कर कहा, ‘‘भाजपा की केन्द्र सरकार द्वारा बजट को हर मामले में हर स्तर पर लुभावना बनाने की पूरी कोशिश की गई है। लेकिन देखना है कि इनका यह बजट जमीनी हकीकत में देश की आमजनता के लिए कितना लाभदायक सिद्ध होता है। जबकि पूरा देश गरीबी, बेरोजगारी, बदतर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा से पीड़ित व परेशान है।’’
सपा के राज्यसभा सदस्य चौधरी सुखराम सिंह ने इसे पूजीवादी बजट बताते हुये कहा कि इसमें समाज के शोषित और वंचित वर्गों की उपेक्षा कर सिर्फ पूंजीपति वर्ग की सहूलियतों का ख्याल रखा गया है। उन्होंने कहा कि बजट में पेट्रोल डीजल की कीमत में ढाई रुपये तक के इजाफे से मंहगाई चरम पर होगी और इसका सीधा असर आम आदमी पर पडे़गा। राकांपा अध्यक्ष और पूर्व कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा कि वित्त मंत्री ने बजट में कृषि क्षेत्र के लिये जीरो बजट खेती की बात जरूर कही लेकिन देश भर में कर्ज के बोझ तले दबे किसानों को कोई राहत या समाधान नहीं दिया। पवार ने कहा कि बजट में किसानों की आय दोगुना करने की ठोस कार्ययोजना पेश की जानी चाहिये थी। 


वामदलों ने भी बजट को जनविरोधी बताते हुये कहा है कि इसमें सिर्फ धनाड्य वर्ग की बेहतरी के उपाय किये गये है। माकपा पोलित ब्यूरो की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि चुनाव के बाद पेश बजट सरकार की ओर से भारतीय उद्योगपतियों के लिये चुनावी मदद की वापसी का तोहफा है। भाकपा ने कहा कि इस बजट में जनता से जुड़े मुद्दों की पूरी तरह से अनदेखी किये जाने के कारण बजट ने जनसामान्य को निराश किया है। दिल्ली में सत्तारूढ़ आप के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने शुक्रवार को संसद में पेश किये गये आम बजट को जनसामान्य, खासकर महिलाओं, युवाओं, किसानों और उद्यमियों की परेशानियों को बढ़ाने वाला बताते हुये कहा है कि ‘‘यह करों के भार से भरा हुआ बजट है।’’ पूर्व केन्द्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी के अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा ने आम बजट को किसान, मजदूर, युवा और महिला विरोधी बताया है। कुशवाहा ने कहा कि बजट में किसानों को आर्थिकसंकट से उबारने और आय दोगुना करने का बजट में कोई जिक्र नहीं है। 
 

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