लाइसेंस तो मिल जाता है पर क्या ड्राइविंग नियमों के तहत करते हैं लोग ?

लाइसेंस तो मिल जाता है पर क्या ड्राइविंग नियमों के तहत करते हैं लोग ?

पिछले दिनों मैं महिला पहलवानों की धरती हरियाणा में था। मेरे मेजबान ने बताया कि कालेज में पढ़ने वाला, उनका बेटा आजकल बहुत उत्साहित है। उनके बेटे ने बताया कि सरकार ने ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने का काम आसान कर दिया है।

पिछले दिनों मैं महिला पहलवानों की धरती हरियाणा में था। मेरे मेजबान ने बताया कि कालेज में पढ़ने वाला, उनका बेटा आजकल बहुत उत्साहित है। उनके बेटे ने बताया कि सरकार ने ड्राइविंग लाइसेंस जारी  करने का काम आसान कर दिया है। अब उसके अपने ही कालेज के प्रिंसिपल ही लाइसेंस देने के लिए अधिकृत हो गए हैं। मैंने पूछा आपको ड्राइविंग आती है तो वह जोश में बोला, अंकलजी बाईक तो मैंने बचपन में ही सीख ली थी। उसकी बात सुनकर अचरज हुआ क्योंकि मैंने आमतौर पर अधिकांश जगह, ज़्यादातर नौजवान बिना हेलमेट के दोपहिया चलाते हुए देखे। इन नौजवानों में अठ्ठारह साल से कम उम्र के भी अनेक बच्चे दिखे। किसी लड़की को भी मैंने हेलमेट लगाए नहीं देखा। यह स्पष्ट तौर पर माना जा सकता है कि वहां सिर्फ हेलमेट बेचने की दुकान नहीं चल सकती। जो लोग हेलमेट पहन कर वाहन चलाते हैं वे सुरक्षा का महत्व समझते हैं या कहें उनके अभिभावकों ने यह आदत उनमें उगाई है। उन्हें एहसास है कि मानवीय जान की क्या कीमत है।

एक प्रश्न मेरे दिमाग में कौंधता रहा क्या सबकी जेब में ड्राइविंग लाइसेंस होगा। अगर होगा तो क्या वैध होगा। उनके वाहन चलाने (या भगाने) के अंदाज़ में यह आशंका हमेशा बनी रहती है कि जिस कर्मचारी ने इन्हें लाइसेंस देने के लिए संस्तुति की होगी क्या उसने सभी औपचारिक़ताएँ ईमानदारी से पूरी की होंगी। क्या ड्राइविंग टैस्ट नियमों के तहत दिया और लिया होगा। भारतीय कार्यालयों की कार्यशैली से सब परिचित हैं कि किस तरह से ड्राइविंग लाइसेंस बनाए जाते रहे हैं। माना जा सकता है कुछ सख्त अधिकारियों के कारण अब अनुशासन आ रहा है। लेकिन आज भी जो ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए जा रहे हैं उनके साथ क्या वाहन चलाने वालों की आदतें संशोधित हो रही हैं। आज भी युवा ही नहीं, बच्चे भी तीन नहीं चार चार भी एक ही दोपहिए पर सवार देखे जा सकते हैं। अभिभावक छोटे छोटे बच्चों को मेहनत से पढ़ने के लिए चाहे प्रेरित न करें लेकिन दोपहिया ज़रूर सिखाते हुए मिलते हैं। ऐसे वाहन चालकों को वाहन चलाने की अनुमति देना या न देना बराबर खतरनाक है। ज़रूरी यह है कि युवाओं को ड्राइविंग लाइसेंस आसानी से जारी करने से पहले उनके अभिभावक, शिक्षक उन्हें सही ड्राइविंग के बारे में व्यवहारिक रूप से सिखाएँ। क्या वे ऐसा कर सकेंगे, उनके लिए बहुत चैलेंजिंग होगा क्यूंकि उन्होंने खुद सही, ट्रैफिक नियमों के अनुसार गाड़ी कब चलाई है ?

मुझे एक और व्यक्ति से मिलने का मौका मिला जिन्होंने बड़े दिलचस्प तरीके से बताया कि उनको चालीस साल हो गए ड्राइविंग करते हुए, उन्होंने किसी के कहने पर अब जाकर लाइसेंस बनवाया। मैंने उनसे पूछा क्या आपका कभी चालान नहीं हुआ तो वह बोले, यार चालान निबटाना क्या मुश्किल है, हमारी जान पहचान हमेशा काम आती है। उन्होंने मुझे बताया कि एक बार पुलिस में लगे नए रंगरूट ने उन्हें रोक लिया। उनके पास कागज तो थे पर पता नहीं था कि अधूरे हैं या पूरे। उसने बोला कागज निकालो अंकल, हमने बोला कौन सा कागज देखोगे। हमने कागज उसे दे दिए तो बोला आपका लाइसेंस तो है ना इसमें। चालान तो होगा। हमने उसे कहा ये स्कूटर भी रख ले और कागज भी बाद में ले जाऊंगा। उसने कहा अंकलजी जाओ, स्कूटर भी ले जाओ कागज भी। यह हाल हरियाणा का ही नहीं दूसरे राज्यों का भी है। कुछ समय पहले सरकार ने ट्रैफिक नियम सख्ती से पालन के आदेशों के साथ नियम तोड़ने व उल्लंघन करने वालों के लिए मोटे जुर्माने का प्रावधान किया है। लेकिन क्या इस आदेश का सख्ती से पालन हुआ है, कहीं इस बढ़ोतरी का फायदा पुलिस वालों को तो नहीं हो रहा। क्या उनके नज़राने की राशि बढ़ गई है।

हरियाणा सरकार ने विश्वविद्यालय, मेडिकल कालेज, सरकारी आईटीआई के निदेशक और प्राचार्यों को लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने के लिए अधिकृत किया है। स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवश्यक ड्राइविंग प्रशिक्षण देने की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। सरकारी शिक्षण संस्थानों के कामकाज का हाल किसी से छिपा नहीं है। सड़कों पर बढ़ते अराजक ट्रैफिक में बढ़ती दुर्घटनाओं का कारण गलत ड्राइविंग है। उसका एक मुख्य कारण बिना अभ्यास किए हुए अवैध तरीकों से हासिल किए गए ड्राइविंग लाइसेंस हैं। सरकार सुविधाएं आराम से उपलब्ध करवाए इससे ज़्यादा ज़रूरी यह है कि ड्राइविंग लाइसेंस जैसा महत्वपूर्ण दस्तावेज़ जारी करते समय ज़रा भी कोताही न बरती जाए ताकि सड़कों पर उतरने वाले भविष्य के वाहन चालक, वाहनों को संयम व अनुशासन के साथ चलाएं। अगर ऐसा हुआ तो वे दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन सकते हैं।

-संतोष उत्सुक