बढ़ते जा रहे लव जिहाद के मामलों के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला बनेगा नजीर

  •  अजय कुमार
  •  नवंबर 2, 2020   15:18
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बढ़ते जा रहे लव जिहाद के मामलों के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला बनेगा नजीर

लव जिहाद या रोमियो जिहाद, मुस्लिम पुरुषों द्वारा हिंदू समुदाय से जुड़ी महिलाओं को इस्लाम में परिवर्तन के लिए प्रेम का स्वांग रचाना है। यह हिंदू समाज की जनसंख्या को कम करने के लिए शुरू किया गया एक जिहाद है।

शादी-विवाह एक पवित्र बंधन होता है, जिसमें धर्मानुसार दो आत्माओं का मिलन होता है। जब यह रिश्ता जोड़ा जाता है तो यही उम्मीद रहती है कि पति-पत्नी हर सुख-दुख में उम्र भर एक-दूसरे का साथ निभाएंगे। ऐसे पवित्र बंधन को समाज भी मान्यता देता है, लेकिन समस्या तब आड़े आती है जब धर्म की आड़ लेकर शादी-विवाह के नाम पर अधर्म किया जाता है। शादी करने के लिए धर्म परिवर्तन तक कर लिया जाता है। यहां तक कि हिन्दू धर्म की लड़की को मुसलमान बना दिया जाता है तो कुछ मामलों में शादी करने के लिए मुस्लिम लड़कियां भी अपना धर्म बदलते दिख जाती हैं, लेकिन ऐसे मामले न के बराबर होते हैं। पिछले कुछ वर्षों से हिन्दू लड़कियों का जर्बदस्ती या फिर बहला-फुसला कर धर्म परिवर्तन करने के मामले काफी बढ़ गए हैं। इस बात के कई प्रमाण हैं कि इस्लाम के नाम पर बनी कुछ संस्थाओं का काम ही यही है कि किस तरह से हिन्दू लड़कियों को बरगला कर मुस्लिम धर्म स्वीकारने और निकाह करने को मजबूर किया जाए, लेकिन इस संबंध में हाईकोर्ट का फैसला मील का पत्थर साबित हो सकता है जिसमें उसने शादी के लिए धर्म परिवर्तन को अवैध करार दिया है। इस फैसले से हिन्दुस्तान में लव जिहाद चलाने वालों के मंसूबों पर भी पानी फिर सकता है।

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दरअसल, लव जिहाद या रोमियो जिहाद, मुस्लिम पुरुषों द्वारा हिंदू समुदाय से जुड़ी महिलाओं को इस्लाम में परिवर्तन के लिए प्रेम का स्वांग रचाना है। यह हिंदू समाज की जनसंख्या को कम करने के लिए शुरू किया गया एक जिहाद है। जिसका समर्थन इस्लाम करता है एवं कुरान अपनी कई आयतों में इसका वर्णन करती है। अर्थात् ये अमानवीय व्यवहार मुस्लिम पुरुष द्वारा हिन्दू धर्म की महिला के साथ प्रेम का ढोंग रचकर जबरन धर्म परिवर्तन कराने की प्रक्रिया होती है। अभी हाल ही में बल्लभगढ़ में हुआ निकिता तोमर हत्याकाण्ड इसका ताजा मामला है। इसमें निकिता तोमर का दो वर्ष पहले 2018 में अपहरण भी हुआ था किंतु पुलिस द्वारा सख्त कार्यवाही न किए जाने से एवं परिवार द्वारा ढुलमुल रवैया अपनाने से निकिता तोमर की हत्या हो गयी। यह अवधारणा 2009 में भारत में राष्ट्रीय स्तर पर पहली बार केरल और उसके बाद कर्नाटक में राष्ट्रीय ध्यानाकर्षण की ओर बढ़ी।

बहरहाल, लव जिहाद शब्द भारत के सन्दर्भ में प्रयोग किया जाता है किन्तु कथित रूप से इसी तरह की गतिविधियाँ अन्य देशों में भी होती हैं। केरल हाईकोर्ट के द्वारा दिए एक फैसले में लव जेहाद को सत्य पाया है। 02 नवंबर 2009 में पुलिस महानिदेशक जैकब पुन्नोज ने कहा था कि कोई भी ऐसा संगठन नहीं है जिसके सदस्य केरल में लड़कियों को मुस्लिम बनाने के इरादे से प्यार करते थे। दिसंबर 2009 में न्यायमूर्ति के.टी. शंकरन ने पुन्नोज की रिपोर्ट को स्वीकार करने से इंकार कर दिया और निष्कर्ष निकाला कि जबरदस्ती धर्मांतरण के संकेत हैं। अदालत ने ‘लव जिहाद‘ मामलों में दो अभियुक्तों की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि पिछले चार वर्षों में इस तरह के 3,000-4,000 सामने आये थे।

कर्नाटक सरकार ने 2010 में कहा था कि हालांकि कई महिलाओं ने इस्लाम में धर्म परिवर्तन किया है लेकिन ऐसा करने के लिए उन्हें मनाने का कोई संगठित प्रयास नहीं किया गया। उत्तर प्रदेश पुलिस ने सितंबर 2014 में लव जिहाद के छह मामलों में से पांच में से धर्म परिवर्तन के प्रयास का कोई सबूत नहीं पाया। पुलिस ने कहा कि बेईमान पुरुषों द्वारा छल के छिटपुट मामले एक व्यापक साजिश के सबूत नहीं हैं। 2017 में केरल उच्च न्यायालय ने अपने एक फैसले में लव जिहाद के आधार पर एक मुस्लिम पुरुष से हिंदू महिला के विवाह को अमान्य घोषित किया। तब मुस्लिम पति द्वारा भारत के सर्वोच्च न्यायालय में एक अपील दायर की गई थी, जहां अदालत ने लव जिहाद के पैटर्न की स्थापना के लिए सभी समान मामलों की जांच करने के लिए एनआईए को निर्देश दिया।

लव जिहाद की अवधारणा पहली बार 2009 में केरल और कर्नाटक में व्यापक धर्मांतरण के दावों के साथ भारत में राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आई। लेकिन ऐसे दावे बाद में पूरे भारत, पाकिस्तान और यूनाइटेड किंगडम में फैल गए। 2009, 2010, 2011 और 2014 में भारत में लव जिहाद के आरोपों ने विभिन्न हिन्दू, सिख और ईसाई संगठनों में चिंता जताई जबकि मुस्लिम संगठनों ने आरोपों से इंकार किया। यह अवधारणा कई लोगों के लिए राजनीतिक विवाद और सामाजिक चिंता का स्रोत बनी हुई है हालांकि 2014 तक किसी संगठित लव जिहाद के विचार को भारतीय मुख्यधारा द्वारा व्यापक रूप से साजिश सिद्धांत के रूप में नहीं माना गया था।

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अब इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला देते हुए न केवल शादी के लिए धर्म परिवर्तन को अवैध करार दिया है बल्कि दो अलग धर्म के जोड़े की याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने कुरान का जिक्र करते हुए यहां तक कह दिया कि इस्लाम में बिना आस्था और विश्वास के केवल शादी करने के उद्देश्य से धर्म बदलना स्वीकार्य नहीं है। यह इस्लाम के खिलाफ है। कोर्ट ने नूर जहां बेगम केस के फैसले का हवाला दिया, जिसमें कोर्ट ने कहा कि शादी के लिए धर्म बदलना स्वीकार्य नहीं है। इस केस में हिन्दू लड़की ने धर्म बदल कर मुस्लिम लड़के से शादी की थी। इसी फैसले के हवाले से कोर्ट ने मुस्लिम से हिंदू बनकर शादी करने वाली याचिकाकर्ता को राहत देने से इंकार कर दिया।

-अजय कुमार







शशिकला ने इसलिए दी है अपने राजनीतिक हितों की कुर्बानी...पर पिक्चर अभी बाकी है

  •  नीरज कुमार दुबे
  •  मार्च 4, 2021   15:25
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शशिकला ने इसलिए दी है अपने राजनीतिक हितों की कुर्बानी...पर पिक्चर अभी बाकी है

शशिकला का राजनीति से दूर रहने वाला बयान इसलिए चौंका गया क्योंकि बेंगलुरू जेल से रिहा होने के बाद शशिकला ने पिछले महीने ही सक्रिय राजनीति में आने की घोषणा की थी। जेल से छूटने के बाद शशिकला ने चेन्नई में जबरदस्त रोड शो भी किया था।

चुनावों के दौरान नेता या तो दल बदल कर या पुराना गठबंधन तोड़कर नया गठबंधन बनाकर राजनीतिक सनसनी फैला देते हैं या फिर चुनावों से पहले कोई बड़ी हस्ती राजनीति में एंट्री मार लेती है लेकिन तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से पहले सबको चौंकाते हुए वीके शशिकला ने राजनीति से दूर रहने का ऐलान कर सबको चौंका दिया है। अन्नाद्रमुक की निष्कासित नेता और तमिलनाडु की दिवंगत मुख्यमंत्री जे जयललिता की दशकों तक करीब सहयोगी रहीं वीके शशिकला ने घोषणा की है कि ‘वह राजनीति से दूर रहेंगी’ लेकिन जयललिता के ‘स्वर्णयुगीन’ शासन के लिए प्रार्थना करेंगी। एक अप्रत्याशित और आकस्मिक ऐलान के तहत उन्होंने ‘‘अम्मा के समर्थकों’’ से भाई-बहन की तरह काम करने की अपील की और यह भी गुजारिश की कि वे यह सुनिश्चित करें कि जयललिता का ‘स्वर्णयुगीन शासन जारी रहे।’’ उन्होंने एक बयान में कहा, ''मैं राजनीति से दूर रहूंगी और अपनी बहन पुराचि थलावी (जयलिलता), जिन्हें मैं देवीतुल्य मानती हूं, और ईश्वर से अम्मा के स्वर्णयुगीन शासन की स्थापना के लिए प्रार्थना करती रहूंगी।’’ उन्होंने जयललिता के सच्चे समर्थकों से छह अप्रैल के चुनाव में एकजुट होकर काम करने और साझे दुश्मन को सत्ता में आने से रोकने की अपील की।

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शशिकला का राजनीति से दूर रहने वाला बयान इसलिए चौंका गया क्योंकि बेंगलुरू जेल से रिहा होने के बाद शशिकला ने पिछले महीने ही सक्रिय राजनीति में आने की घोषणा की थी। जेल से छूटने के बाद शशिकला ने चेन्नई में जबरदस्त रोड शो भी किया था जिसे उनके शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा गया था। ऐसे में तमाम तरह की अटकलें लगायी जा रही हैं कि अचानक से ऐसा क्या हुआ कि शशिकला राजनीति से दूर हो गयीं। वह शशिकला जोकि जयललिता के जीवित रहते एक तरह से पार्टी और राज्य के शासन संबंधी निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थीं, वह शशिकला जिन्होंने जयललिता के निधन के बाद मुख्यमंत्री बनने का पूरा प्रयास किया लेकिन उन्हें अचानक जेल जाना पड़ गया, आखिर वह सजा पूरी होने के बाद क्यों अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने से पीछे हट गयीं? जेल से छूटने के बाद शशिकला ने अन्नाद्रमुक में वापसी के भरसक प्रयास किये लेकिन जब दाल नहीं गली तो ऐसा लग रहा था कि वह अपना मोर्चा बनाकर अन्नाद्रमुक को नुकसान पहुँचा सकती हैं। लेकिन शशिकला ने ऐसा नहीं किया।

अटकलें हैं कि शशिकला के इस अप्रत्याशित कदम की पटकथा भाजपा ने लिखी है। पहले तो भाजपा ने प्रयास किये कि शशिकला की अन्नाद्रमुक में वापसी हो जाये लेकिन जब ऐसा नहीं हो सका तो शशिकला को राजनीति से दूर रहने के लिए मना लिया गया क्योंकि शशिकला अगर अपना मोर्चा खड़ा करतीं तो द्रमुक को फायदा हो सकता था। बताया जा रहा है कि भाजपा का पूरा प्रयास है कि तमिलनाडु में एनडीए का शासन बरकरार रहे। यदि द्रमुक और कांग्रेस गठबंधन तमिलनाडु में सरकार बनाने में सफल रहता है तो विपक्षी खेमा मजबूत होगा साथ ही दक्षिण में भगवा खेमे की धाक कम पड़ेगी। भाजपा की नजर इसके साथ ही 2024 के लोकसभा चुनावों पर भी है। यदि एक बार फिर अन्नाद्रमुक सरकार बने तो लोकसभा चुनावों के दौरान तमिलनाडु में एनडीए का प्रदर्शन सुधर सकता है। उल्लेखनीय है कि पिछले चुनावों में एनडीए का यहां नुकसान उठाना पड़ा था। फिलहाल तो शशिकला के ऐलान के बाद अन्नाद्रमुक काफी मजबूत हो गयी है क्योंकि जो पार्टी बगावत रोकने में सफल हो जाये उसका पलड़ा भारी हो ही जाता है। मुख्यमंत्री ई. पलानीस्वामी और उपमुख्यमंत्री ओ. पनीरसेल्वम के बीच विवाद सुलझाने और दोनों को साथ मिलकर काम करने के लिए भी भाजपा ने ही मनाया था। देखा जाये तो अन्नाद्रमुक में एकता कायम रखने के पीछे भाजपा का ही सबसे बड़ा हाथ है।

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बहरहाल, शशिकला ने अपने इस कदम से तमिलनाडु की जनता को यह भी संदेश दिया है कि भले उनके भतीजे ने अन्नाद्रमुक से निकाले जाने के बाद अपनी अलग पार्टी बना ली हो लेकिन अम्मा की भक्त शशिकला ने अन्नाद्रमुक से निकाले जाने के बाद कोई नई पार्टी नहीं बनायी और अम्मा की सत्ता की वापसी के लिए अपने राजनीतिक हितों की कुर्बानी दे दी। अब अगर तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक का वर्तमान नेतृत्व सत्ता में वापस नहीं लौट सका तो चुनावों के बाद पार्टी की कमान शशिकला को सौंपने की माँग भी हो सकती है। इसलिए शशिकला की इस चाल का पूरा परिणाम सामने आ गया है यह नहीं कहा जा सकता।

-नीरज कुमार दुबे







हमारी जीवनशैली में मूल्यों की अहमियत क्यों घटती जा रही है ?

  •  ललित गर्ग
  •  मार्च 3, 2021   17:39
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हमारी जीवनशैली में मूल्यों की अहमियत क्यों घटती जा रही है ?

कोरोना महामारी से अस्त-व्यस्त हुए जीवन में हर व्यक्ति अपने जीवन की विसंगतियों एवं विडम्बनाओं को लेकर आत्ममंथन कर रहा है, कोरोना की त्रासदी ने इंसान को अपने जीवन मूल्यों और जीवनशैली पर पुनर्चिंतन करने को मजबूर किया है।

''अणुव्रत-मिशन'' की 72 वर्षों की एक ‘युग यात्रा’ नैतिक प्रतिष्ठा का एक अभियान है। परिवर्तन जीवन का शाश्वत नियम है, प्रगति एवं विकास का यह सशक्त माध्यम है। जीवन का यही आनन्द है, यह जीवन की प्रक्रिया है, नहीं तो जीवन, जीवन नहीं है। टूटना और बनना परिवर्तन की चौखट पर शुरू हो जाता है। नये विचार उगते हैं। नई व्यवस्थाएं जन्म लेती हैं एवं नई शैलियां, नई अपेक्षाएं पैदा हो जाती हैं। अब जब भारत नया बनने के लिए, स्वर्णिम बनने के लिए और अनूठा बनने के लिए तत्पर है, तब एक बड़ा सवाल भी खड़ा है कि हमें नया भारत कैसा बनाना है? ऐसा करते हुए हमें यह भी देखना है कि हम इंसान कितने बने हैं? हममें इंसानियत कितनी आई है? हमारी जीवनशैली में मूल्यों की क्या अहमियत है? यह एक बड़ा सवाल है। बेशक हम नये शहर बनाने, नई सड़कें बनाने, नये कल-कारखाने खोलने, नई तकनीक लाने, नई शासन-व्यवस्था बनाने के लिए तत्पर हैं लेकिन मूल प्रश्न है नया इंसान कौन बनायेगा?

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अणुव्रत आंदोलन अपनी स्थापना से लेकर अब तक इसी प्रयास में रहा कि इंसान इंसान बने, विकास के साथ-साथ हम विवेक को कायम रखें, नैतिक मूल्यों को जीवन का आधार बनाएं। जिस प्रकार गांधीजी ने ‘मेरे सपनों का भारत’ पुस्तक लिखी, वैसे ही अणुव्रत आन्दोलन के संस्थापक आचार्य तुलसी ने मेरे सपनों का हिन्दुस्तान एक प्रारूप प्रस्तुत किया जिसमें उन्होंने गरीबी, धार्मिक संघर्ष, राजनीतिक अपराधीकरण, अस्पृश्यता, नशे की प्रवृत्ति, मिलावट, रिश्वतखोरी, शोषण, दहेज और वोटों की खरीद-फरोख्त को विध्वंस का कारण माना। उन्होंने स्टैंडर्ड ऑफ लाइफ के नाम पर भौतिकवाद, सुविधावाद और अपसंस्कारों का जो समावेश हिन्दुस्तानी जीवनशैली में हुआ है उसे उन्होंने हिमालयी भूल के रूप में व्यक्त किया है। आचार्य श्री महाश्रमण इसी भूल को सुधारने के लिए व्यापक प्रयत्न कर रहे हैं। अणुव्रत का स्थापना दिवस- 1 मार्च, 2021 को एक नई एवं आदर्श जीवनशैली को लेकर प्रस्तुत हुआ। कोरोना महामारी से अस्त-व्यस्त हुए जीवन में हर व्यक्ति अपने जीवन की विसंगतियों एवं विडम्बनाओं को लेकर आत्ममंथन कर रहा है, कोरोना की त्रासदी ने इंसान को अपने जीवन मूल्यों और जीवनशैली पर पुनर्चिंतन करने को मजबूर किया है। इसी बदलाव की चौखट पर अणुव्रत आन्दोलन एक ऐसी जीवनशैली की स्थापना के लिये तत्पर है, जिसे अपना कर मानवमात्र स्व-कल्याण से लेकर विश्व कल्याण की भावना को चरितार्थ करने में सक्षम हो सकेगा। 

जीवन के त्रासदियों एवं कमियों के परिमार्जित करने का एक सफल एवं सार्थक उपक्रम है अणुव्रत। यह नये भारत को बनाने के हमारे संकल्प-सपने क्या-क्या हो, इसकी एक बानगी प्रस्तुत करता है। कहते हैं कि सपने पूरे करने के लिये उन्हें देखना जरूरी है। अणुव्रत आन्दोलन आदर्श जीवन का एक संकल्प है, एक संरचना है, एक सपना है। जिसे आधार बनाकर स्वर्णिम भारत बनाना है। लेकिन हम भारतीयों का यह दुर्भाग्य है कि हमने सपने देखना छोड़ दिया है, हमारे संकल्प बौने होते जा रहे हैं। हम आत्मकेन्द्रित होते जा रहे हैं। ‘जितना है उसी में संतुष्ट’ की सोच अब वैश्विक प्रतिस्पर्धा में हमें पीछे छोड़ रही है। 72 साल पहले देश ने एकजुट होकर एक सपना देखा, वो पूरा भी हुआ। तभी हम आजाद हैं। लेकिन हम आजादी के नशे में जरूरी मूल्यों को भूल गये। परिणाम सामने है, हम आजाद होकर भी हमारे बाद आजाद हुए राष्ट्रों की तुलना में पीछे हैं, समस्याग्रस्त हैं, अपसंस्कृति के शिकार हैं, आलसी हैं, अनैतिक हैं, भ्रष्ट हैं। फिर वक्त सपने देखने का आ चुका है। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देशवासियों से ‘नये भारत-सशक्त भारत- आत्मनिर्भर भारत, सपनों का भारत’ के निर्माण का आह्वान कर रहे हैं, वहीं अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य महाश्रमण ‘मूल्यों का भारत-स्वर्णिम भारत’ निर्मित करने के लिये पांव-पांव चल कर नैतिक शक्तियों को बल दे रहे हैं। एक स्वर्णिम भारत के लिए नैतिक मूल्य बुनियादी आवश्यकता है।

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बहत्तर वर्षों पूर्व दिल्ली के चांदनी चौक में अणुव्रत का एक ऐतिहासिक अधिवेशन हुआ, तब अणुव्रत अचरज की चीज थी। अणुव्रत अनुशास्ता से राष्ट्र का नया परिचय था। आज उस रूप में अणुव्रत बुजुर्ग है। अणुव्रत अनुशास्ता नैतिक जगत के शिखर पुरुष हैं। उस समय के विषय थे- काला बाजार, मिलावट....। आज के विषय हैं काला धन, भ्रष्टाचार, लोकतंत्र शुद्धि, चुनाव शुद्धि, शिक्षा में सुधार.....। बुराइयां रूप बदल-बदल कर नये मुखौटे लगाकर आती हैं, जिन्हें शांति व अहिंसा प्रिय नागरिकों को भुगतना पड़ता है। जूझना पड़ता है। सत्ता के स्तर पर गन्दी राजनीति और व्यवस्था के स्तर पर भ्रष्टाचार एवं पक्षपात ने हमारे राष्ट्रीय जीवन के नैतिक मूल्यों को ध्वस्त कर दिया है। राष्ट्रीय विकास के केन्द्र में व्यक्ति नहीं होगा तो सब कुछ नष्ट हो जाएगा। अणुव्रत का दर्शन है कि लोक सुधरेगा तो तंत्र सुधरेगा। व्यक्ति का रूपांतरण होगा तो समाज का रूपांतरण होगा।

अणुव्रत आंदोलन विचार क्रांति के साथ-साथ राष्ट्र क्रांति का मंच है। जब भी राष्ट्र में नैतिक मूल्य धुंधलाने लगे, अणुव्रत आन्दोलन ने एक दीप जलाया। यह दीप मानव संस्कृति का आधार है और दीप का आधार है नैतिक मूल्य, अन्धकार से प्रकाश की यात्रा, असत्य पर सत्य की स्थापना, निराशाओं में आशाओं का संचार। अणुव्रत ऐसी ही सार्थक यात्रा है और इस यात्रा के दौरान ही मनुष्य अपने ‘स्व’, ‘पर’ और प्रकृति को गंभीरता से ले पाता है। इस चेतना के बाद ही वह समझ सकता है कि मनुष्य की वैयक्तिकता और सामाजिकता एक ही सिक्के के दो पहलु हैं। तभी वह सही अर्थों में इंसान हो पाता है। वह इंसान जिसके बारे में गालिब ने बड़ी कसक के साथ कहा था, ‘आदमी को भी मयस्सर नहीं इंसां होना।’

भारत एक बड़ी पुरानी सभ्यता रहा है और उसकी अपनी समृद्ध संस्कृति है। हमारे विकास का मॉडल उसी बिन्दु से शुरू करना चाहिए, लेकिन हम अपनी जड़ों से कटकर, अपने संस्कारों से विलग होकर, इतिहास के शून्य में खड़े होते रहे हैं। अब स्वर्णिम भारत को आकार देते हुए हमें इस पर विचार करना चाहिए कि वे कौन-सी दरारें थीं जो हमारे सामाजिक ढांचे को खोखला बनाती रहीं, जीवनबोध में वह कैसा ठहराव था कि हम, जिन्हें संसार में सर्वोपरि होना था, सबसे पीछे रह गये। हमारा जीवन जिन नैतिक आधारों के आसपास बसता है, उन्हें ठीक से समझना और ठीक से बरतना ही जीवन में वास्तविक रूपान्तरण पैदा कर सकता है- व्यक्ति के भी और राष्ट्र के भी। यहीं स्वर्णिमता के नये अर्थ खुलते हैं, यहीं संस्कृति के जीवंत अध्यायों की पुनर्रचना की संभावना पैदा होती है। यहीं मानव जीवन की गरिमा का वास्तविक आधार बनता है। और यहीं कही एक सूर्योदय है। वरना हांकने को तो कुछ भी हांका जा सकता है और नैतिकता को हांकना तो बहुत आसान है, पर यह आत्मक्षय का ही मार्ग प्रशस्त करता है।

अणुव्रत स्थापना दिवस शाश्वत से साक्षात् और सामयिक सत्य को देखने, अनुभव करने का एक विनम्र प्रयास है। आत्म-प्रेरित नैतिक मूल्यों की प्रतिष्ठा का संयुक्त अभियान है। महानता की दिशा में गति का प्रस्थान है। सपने एवं संकल्प सदैव आशावादी होते हैं। पर वर्तमान से कोई कभी सन्तुष्ट नहीं होता। इतिहास कभी भी अपने आप को समग्रता से नहीं दोहराता। अपने जीवित अतीत और मृत वर्तमान के अन्तर का ज्ञान जिस दिन देशवासियों को हो जाएगा, उसी दिन हमें मालूम होगा कि महानता क्या है। हम स्वर्ग को जमीन पर नहीं उतार सकते, पर बुराइयों से तो लड़ अवश्य सकते हैं, इस लोकभावना को जगाना होगा, यही अणुव्रत का मिशन है। महानता की लोरियाँ गाने से किसी राष्ट्र का भाग्य नहीं बदलता, बल्कि तंद्रा आती है। इसे तो जगाना होगा, भैरवी गाकर। महानता को सिर्फ छूने का प्रयास जिसने किया वह स्वयं बौना हो गया और जिसने संकल्पित होकर स्वयं को ऊंचा उठाया, महानता उसके लिए स्वयं झुकी है।

हमें गुलाम बनाने वाले सदैव विदेशी नहीं होते। अपने ही समाज का एक वर्ग दूसरे को गुलाम बनाता है- शोषण करता है, भ्रष्ट बनाता है। उस राष्ट्र की कल्पना करें, जहां कोई नागरिक इतना अमीर नहीं हो कि वह किसी गरीब को खरीद सके अथवा कोई इतना निर्धन नहीं हो कि स्वयं को बिकने के लिए बाध्य होना पड़े। मैं न खाऊंगा और न खाने दूंगा- यही हो सकता है स्वर्णिम राष्ट्र का आधार। आज जिन माध्यमों, महापुरुषों, मंचों से नैतिकता मुखर हो रही है, वे बहुत सीमित हैं। अणुव्रत ने इन शक्तियों को खड़ा किया है। आचार्य श्री तुलसी, आचार्य श्री महाप्रज्ञ की परम्परा को आचार्य श्री महाश्रमण आगे बढ़ा रहे हैं। साध्वीप्रमुखा कनकप्रभाजी ने अणुव्रत को बहुत बल दिया है। अगर हम ऊपर उठकर देखें तो दुनिया में अच्छाई और बुराई अलग-अलग दिखाई देगी। भ्रष्टाचार के भयानक विस्तार में भी नैतिकता स्पष्ट अलग दिखाई देगी। आवश्यकता है कि नैतिकता की धवलता अपना प्रभाव उत्पन्न करे और उसे कोई दूषित न कर पाये। इस आवाज को उठाने के लिए ''अणुव्रत'' सदा ही माध्यम बना है। नैतिकता का प्रबल पक्षधर बना है।

-ललित गर्ग







दुश्मन को खोजकर मारेगा ‘हंटर किलर’, बेहद शक्तिशाली है अर्जुन मार्क-1ए टैंक

  •  योगेश कुमार गोयल
  •  मार्च 2, 2021   12:35
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दुश्मन को खोजकर मारेगा ‘हंटर किलर’, बेहद शक्तिशाली है अर्जुन मार्क-1ए टैंक

अर्जुन टैंक को सेना में शामिल किए जाने के बाद सेना द्वारा इसके अपडेटेड वर्जन के लिए 72 तरह के सुधारों की मांग की गई थी, जिसके बाद डीआरडीओ द्वारा सेना के सुझावों को शामिल करते हुए नया ‘हंटर किलर’ टैंक अर्जुन मार्क-1ए तैयार किया गया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा गत दिनों देश का मुख्य स्वदेशी युद्धक टैंक ‘अर्जुन मार्क-1ए’ (एमके-1ए) चेन्नई में सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे को सौंपते हुए राष्ट्र को समर्पित किया गया। सीमा पर दुश्मनों को करारा जवाब देने के लिए इस टैंक का विकास रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के ‘लड़ाकू वाहन अनुसंधान और विकास प्रतिष्ठान’ (सीवीआरडीई) द्वारा किया गया है। डीआरडीओ रक्षा क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए तेजी से कार्य कर रहा है। अत्याधुनिक क्षमता से लैस अर्जुन मार्क-1ए टैंक पूर्णतः स्वदेशी है, जिसकी डिजाइनिंग से लेकर डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग तक का सारा काम देश में ही सम्पन्न हुआ है। भारतीय सेना अर्जुन श्रेणी के कई टैंकों का पहले से ही इस्तेमाल कर रही है। गौरतलब है कि टैंक निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए भारत ने वर्ष 1972 में शुरुआत की थी लेकिन तीन दशकों तक इस क्षेत्र में अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बाद आखिरकार भारत का स्वदेशी ‘अर्जुन’ टैंक परीक्षण में खरा उतरा। अर्जुन टैंक वर्ष 2004 में सेना में शामिल हुआ था और तब से अब तक इसमें कई बदलाव हो चुके हैं।

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अर्जुन टैंक को सेना में शामिल किए जाने के बाद सेना द्वारा इसके अपडेटेड वर्जन के लिए 72 तरह के सुधारों की मांग की गई थी, जिसके बाद डीआरडीओ द्वारा सेना के सुझावों को शामिल करते हुए नया ‘हंटर किलर’ टैंक अर्जुन मार्क-1ए तैयार किया गया। ‘अर्जुन मार्क-1ए’ अर्जुन टैंक का अद्यतन वर्जन है और पहले के वर्जन से ज्यादा अपग्रेडेड, शक्तिशाली, घातक और विध्वंसक है। अर्जुन टैंक दुनिया के बेहतरीन टैंकों में शामिल है और अब इसका अत्याधुनिक वर्जन भारतीय सेना में शामिल होने के बाद भारतीय सेना की ताकत काफी बढ़ जाएगी। डीआरडीओ के वैज्ञानिक वी. बालामुरगन के मुताबिक अर्जुन टैंक में कुल 71 बदलाव किए गए हैं, जिनमें 40 बड़े बदलाव हैं। अर्जुन मार्क-1ए आधुनिक युद्धक टैंक प्रौद्योगिकियों के साथ सुसज्जित है, जिसमें बेहतर मारक क्षमता, उच्च गतिशीलता, उत्कृष्ट सुरक्षा इत्यादि अनेक विशेषताएं हैं। स्वदेशी रूप से डिजाइन व निर्मित मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन एमके-1ए में स्वदेशी गोला-बारूद का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

डीआरडीओ द्वारा अर्जुन टैंक के नए संस्करणों की सप्लाई करने के लिए कुछ समय पूर्व सेना के साथ अनुबंध किया गया था। भारतीय सेना के पास पहले से ही 124 अर्जुन टैंक हैं लेकिन वे परम्परागत तकनीक के टैंक हैं, जो पश्चिमी रेगिस्तान में तैनात हैं जबकि अर्जुन मार्क-1ए को आर्म्ड फाइटिंग व्हीकल क्षमता में देश की आत्मनिर्भरता के लिए विकसित किया गया है। बता दें कि वर्ष 2012 में ही 118 उन्नत अर्जुन टैंक खरीदने के लिए मंजूरी दे दी गई थी और रक्षा खरीद समिति ने वर्ष 2014 में इसके लिए 6600 करोड़ रुपये जारी कर दिए थे लेकिन सेना द्वारा इसकी फायर क्षमता सहित कई अन्य सुधारों की मांग की गई थी। वर्ष 2015 में रूस के साथ 464 मध्यम वजन के टी-90 टैंक की खरीद के लिए 14 हजार करोड़ रुपये का सौदा किया गया था और डीआरडीओ द्वारा सेना की मांग के अनुरूप अर्जुन टैंक को उन्नत किए जाने के बाद ‘अर्जुन मार्क-1ए’ की खरीद को 2020 में हरी झंडी मिली। भारतीय सेना और डीआरडीओ द्वारा संयुक्त रूप से राजस्थान के सीमावर्ती जैसलमेर स्थित पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में मार्च 2020 में देश में निर्मित उन्नत युद्धक टैंक अर्जुन मार्क-1ए का परीक्षण किया गया था, जो सभी मानकों पर खरा उतरा था लेकिन सेना द्वारा डीआरडीओ से इसमें कुछ और सुधार की मांग की गई थी।

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सेना के लिए 8400 करोड़ की कीमत पर 118 अर्जुन मार्क 1ए टैंक खरीदे गए हैं। अर्जुन टैंक का डिजाइन तैयार करने वाले रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन (डीआरडीओ) के चेयरमैन जी. सतीश रेड्डी के मुताबिक सेना को पांच टैंक ढ़ाई वर्ष के भीतर सौंप दिए जाएंगे। रेड्डी के अनुसार टैंक के नए संस्करण में जो 71 अतिरिक्त फीचर जोड़े गए हैं, वे इसे दुनिया के सभी श्रेष्ठ टैंकों के समकक्ष खड़ा करते हैं। दुनियाभर में सबसे ज्यादा 9150 टैंक चीन के पास हैं जबकि अमेरिका के पास 8325 और भारत के पास 3569 टैंक हैं। ऐसे में सेना को बेहद ताकतवर बनाने के लिए ऐसे अत्याधुनिक स्वदेशी टैंकों को सेना में शामिल किया जाना समय की बड़ी मांग है। इस टैंक के सेना का महत्वपूर्ण अंग बनने के बाद भारतीय सेना की जमीन पर मारक क्षमता को काफी मजबूती मिलेगी। अर्जुन मार्क-1ए साधारण अर्जुन टैंक से कई गुना ज्यादा ताकतवर है और तेजी से अपने लक्ष्य का पीछा कर सकता है। यह टैंक अपने लक्ष्य को ढूंढ़कर उस पर वार कर सकता है तथा इसमें आड़ लेकर हमला कर रहे दुश्मनों को तबाह करने की विलक्षण क्षमता है और इसी कारण इसे ‘हंटर किलर टैंक’ भी कहा जाता है। मारक और बचाव क्षमता के दृष्टिगत विश्वस्तरीय अर्जुन मार्क-1ए टैंक में मुख्य हथियार और सहायक हथियार, दोनों की भूमिका निभाने की क्षमता भी है। इस टैंक में विशेष सेंसर लगाए गए हैं, जो रासायनिक हमले से इसकी रक्षा कर सकते हैं। यही नहीं, टैंक पर ग्रेनेड और मिसाइलों से हमले का भी कोई असर नहीं होगा।

भारतीय सेना की विशेष ताकत बना यह टैंक न सिर्फ लैंड माइंस को साफ करते हुए आसानी से आगे बढ़ सकता है बल्कि अपने लक्ष्य को स्वयं तलाश करने में भी सक्षम है। यह टैंक दिन-रात, हर प्रकार के मौसम अर्थात् हर समय अपने लक्ष्य पर अचूक और तेज गति से हमला कर सकता है और दुश्मन को खोजकर मार सकता है। उच्च कोटि के इंजन और बेहद दमदार ट्रांसमिशन सिस्टम से लैस इस टैंक का लचीला हाइपरन्यूमेटिक सस्पेंशन इसे बहुत घातक बना देता है। इसमें दुश्मन पर पहले वार करने, दौड़ते-भागते लक्ष्यों पर भी निशाना साधने और लगातार हिलने वाले लक्ष्यों पर अचूक निशाना लगाने की विलक्षण क्षमता है। युद्ध के दौरान कम से कम समय में दुश्मनों के हमलों का जवाब देने की क्षमता से लैस यह टैंक युद्ध में ज्यादा से ज्यादा दूरी तक दुश्मन के सैन्य साजो-सामान का विनाश कर सकता है। इसमें लगा उच्च गुणवत्ता का रनिंग गियर धमाके के समय भारी झटके को सीमित कर देता है।

68 टन वजनी और 58 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से दौड़ने में सक्षम इस टैंक में गन कंट्रोल सिस्टम और ट्रैक सिस्टम इंजन स्वदेशी हैं। इसमें 1200 एमएम की गन के अलावा 7.62 एमएम और ग्राउंड टार्गेट के लिए 12.7 एमएम की गन लगी है। रात में दुश्मन पर नजर रखने के लिए इसमें थर्मल इमेजिंग सिस्टम लगे हैं। इसके अलावा इसमें लगी एंटी एयरक्राफ्ट मशीनगन से जमीन से ही लड़ाकू हेलिकॉफ्टर को मार गिराया जा सकेगा। माना जा रहा है कि आने वाले समय में इस टैंक से मिसाइलें भी छोड़ी जा सकेंगी। टैंक में कमांडर, गनर, लोडर और चालक का क्रू होगा। 118 अर्जुन मार्क-1ए टैंकों की कुल दो रेजीमेंट बनेंगी और दोनों रेजीमेंट में 59-59 टैंक होंगे। सेना की दो टैंक रेजीमेंट के पुराने टैंक अर्जुन मार्क-1ए टैंकों से बदले जाएंगे।

-योगेश कुमार गोयल

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार तथा सामरिक मामलों के विश्लेषक हैं)







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