गोवा में टैक्सी चालकों को मिली है छूट, पर्यटकों को लूट सके तो लूट

By मनोज झा | Publish Date: Feb 8 2019 5:31PM
गोवा में टैक्सी चालकों को मिली है छूट, पर्यटकों को लूट सके तो लूट
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कई दुकानदारों का कहना था कि निजी टैक्सी मालिकों की मनमानी के चलते ज्यादातर टूरिस्ट होटल के आस-पास ही घूमना पसंद करते हैं। सवाल उठता है कि जिस राज्य की अर्थव्यवस्था पूरी तरह पर्यटन पर टिकी हो वहां इस तरह की व्यवस्था क्यों ?

गोवा का नाम दिमाग में आते ही हर किसी का मन रोमांचित हो उठता है। समंदर किनारे एक से बढ़कर एक बीच, वातावरण ऐसा कि हर कोई का दिल झूम उठे। मुझे अब तक दो बार गोवा जाने का अवसर मिला है लेकिन इस बार का अनुभव काफी खराब रहा। उसके पीछे वजह गोवा में ओला और उबर टैक्सी का नहीं चलना था। एयरपोर्ट से होटल पहुंचने के बाद हमने शाम को पणजी जाने का मूड बनाया...होटल से पता करने पर मालूम हुआ कि उनके यहां सिर्फ इनोवा गाड़ी है...हम ठहरे तीन लोग, अब हर जगह इनोवा से जाना बजट में फिट नहीं बैठता। होटल से बाहर निकलकर टैक्सी के लिए छानबीन शुरू की तो होश ठिकाने आ गए। मेरे होटल से पणजी टाउन महज 10 किलोमीटर की दूरी पर था...लेकिन निजी टैक्सी वाले मुझसे 700 रुपए मांग रहे थे....शाम ढलने को थी...आखिरकार किसी तरह हमने 1200 रुपए में आने-जाने का सौदा कर लिया...वहां भी टैक्सी वाले ने एक शर्त रख दी कि 2 घंटे से ज्यादा रुकने पर हमें अतिरिक्त पैसा देना होगा। गोवा में ओला और उबर सर्विस नहीं है ये हमें पहले से मालूम था लेकिन इसका इतना बड़ा खामियाजा भुगतना होगा इसका अंदाजा नहीं था।
 
 
गोवा में बाइक और कार किराए पर मिलती है...लिहाजा अगली सुबह हमने रेंट पर कार लेने का मन बनाया....मैंने कहा कि मैं गाड़ी खुद चलाऊंगा ताकि अलग से ड्राइवर का पैसा नहीं देना पड़े...लेकिन पत्नी तैयार नहीं थी...वैसे मैं गाड़ी अच्छी चलाता हूं लेकिन पत्नी का मानना था कि नई जगह पर खुद गाड़ी चलाने से बचना चाहिए। हमने छोटी गाड़ी लेने का मन बनाया ताकि पैसा कम लगें लेकिन ये मेरी भूल थी। खैर बात को विस्तार मे ले जाने से बेहतर है कि हम मुद्दे की बात करें। तो मुद्दा यही है कि गोवा में अब टूरिस्टों को परेशानी में डाला जा रहा है। वहां ट्रांसपोर्ट से जुड़े माफिया शुरू से ओला और उबर के खिलाफ हैं...जब-जब ओला और उबर को लेकर चर्चा हुई....निजी टैक्सी मालिकों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया..उनकी गुंडागर्दी के आगे राज्य सरकार भी बेबस नजर आई।


 
 
गोवा सरकार की ओर से वहां ऐप आधारित टैक्सी सेवा की शुरूआत तो हुई लेकिन इससे वहां जाने वाले टूरिस्टों को कोई फायदा नहीं हो रहा। हमें पणजी में कई स्थानीय दुकानदारों ने बताया कि निजी टैक्सी चालक टूरिस्टों से मनमाफिक पैसा वसूलते हैं और इसका असर उनके व्यापार पर दिख रहा है। कई दुकानदारों का कहना था कि निजी टैक्सी मालिकों की मनमानी के चलते ज्यादातर टूरिस्ट होटल के आस-पास ही घूमना पसंद करते हैं। सवाल उठता है कि जिस राज्य की अर्थव्यवस्था पूरी तरह पर्यटन पर टिकी हो वहां इस तरह की व्यवस्था क्यों ?
 
आप दुनिया के किसी मुल्क में चले जाइए...टूरिस्ट वहीं जाना पसंद करते हैं जहां उन्हें किसी तरह की असुविधा ना हो....अब गोवा में दिल्ली-बैंगलोर और फिर दूसरे बड़े शहरों की तरह मेट्रो सेवा भी नहीं है...लिहाजा वहां जाने वाले टूरिस्टों के सामने कोई दूसरा विकल्प भी नहीं बचता। गोवा की अपनी एक खूबसूरती है और इसे बरकरार रखने के लिए वहां की सरकार को कड़े कदम उठाने होंगे।



 
जरा सोचिए अगर गोवा में ओला और उबर सेवा की शुरूआत हो गई तो इससे टूरिस्टों को कितनी राहत मिलेगी। अभी देश-विदेश से गोवा पहुंचे टूरिस्ट अपनी यात्रा के दौरान बजट का बड़ा हिस्सा ट्रांसपोर्ट पर खर्च कर डालते हैं। अगर वहां ओला-उबर सेवा शुरू हो जाती है तो फिर किसी टूरिस्ट को 10 किलोमीटर के लिए 600 या 700 रुपए खर्च नहीं करने होंगे। देर से ही सही गोवा सरकार को इस पर फैसला लेना ही होगा। अगर चंद ट्रांसपोर्ट माफियाओं के आगे सरकार झुक जाती है और कोई कदम नहीं उठाती है तो आने वाले समय में इसका टूरिज्म पर व्यापक असर देखने को मिलेगा।


 
मनोज झा
(लेखक पूर्व पत्रकार रह चुके हैं।)

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