भूमि, सोना और मकान में निवेश करने से पहले कीजिए यह विचार

  •  कमलेश पांडेय
  •  दिसंबर 4, 2020   16:50
  • Like
भूमि, सोना और मकान में निवेश करने से पहले कीजिए यह विचार

दरअसल जानकारों का मानना है कि आप भूमि में उसी पैसे को निवेशित करें जिसकी जरूरत आपको निकट भविष्य में नहीं पड़े। क्योंकि भूमि सौदे को खरीदना जितना मुश्किल है, उससे भी ज्यादा परेशानी आती है उसे बेचने में। और जब तक बिक नहीं जाए, तब तक मन में संशय बना रहता है।

आपने देखा होगा कि जब भी किसी के पास जीवन-यापन से अतिरिक्त पैसा बचता है तो वह उसे उन जगहों पर लगाना चाहता है, जहां पर वे सुरक्षित हों और उससे बेहतर रिटर्न भी मिले और फिर मिलता रहे। इस नजरिए से भूमि, सोना और मकान को लम्बी अवधि के लिए बेहतर रिटर्न देने वाला साधन तो माना जा सकता है। लेकिन यदि आपको कम अवधि के लिए निवेश करना हो तो निवेश के अन्य विकल्पों पर विचार करेंगे, या फिर उपयुक्त तरीके से अनुभवी लोगों से बातचीत करके उसपर गौर फरमाएंगे तो अच्छा रहेगा।

अमूमन, ऐसा इसलिए कि पुरानी मान्यताओं को तरजीह देने वाले  भारतीय समाज के लोग आज भी भूमि, सोना या मकान में निवेश करना ज्यादा उपयुक्त और सुरक्षित समझते हैं। क्योंकि भूमि में बगान लग जाने और मकान में दुकान निकल जाने से उसके मूल्य में काफी बढोत्तरी हो जाती है। यहां पर एक कहावत भी प्रचलित है कि सोना बेचकर कोना खरीदा जाता है, लेकिन कोना बेचकर सोना कतई नहीं खरीदा जाता। क्योंकि सोना चल सम्पत्ति है, जबकि भूमि अचल प्रॉपर्टी। यही वजह है कि कुछ अपवादों को छोड़कर जो लोग इसमें निवेश करते हैं, वे बदलते वक्त के साथ बेहतर रिटर्न नहीं ले पाते। इसके दो कारण हैं:- एक, इसमें बहुत ज्यादा पूंजी की जरूरत पड़ती है, और दूसरा, जानकारी के अभाव में लोग भूमि, सोना या मकान का सही क्रय और वाजिब उपयोग नहीं कर पाते हैं।

इसे भी पढ़ें: मोबाइल ऐप या नेट बैंकिंग के बिना अटल पेंशन योजना अकाउंट कैसे खोलें

# भूमि में दीर्घ अवधि का निवेश ही देता है फायदा

दरअसल जानकारों का मानना है कि आप भूमि में उसी पैसे को निवेशित करें जिसकी जरूरत आपको निकट भविष्य में नहीं पड़े। क्योंकि भूमि सौदे को खरीदना जितना मुश्किल है, उससे भी ज्यादा परेशानी आती है उसे बेचने में। और जब तक बिक नहीं जाए, तब तक मन में संशय बना रहता है। इसलिए कि जरूरतमंद भूमि बिक्रेता को प्रायः अच्छा भाव नहीं मिल पाता है। इसके अलावा, कागजी कार्रवाई यथा- रजिस्ट्री, म्यूटेशन में लगा मोटा धन तुरंत बेचने पर प्रायः वापस नहीं लौट पाता।

यदि भूमि की खरीद-बिक्री के बीच में कोई प्रॉपर्टी डीलर या दलाल है तो और भी अधिक सजग रहें, क्योंकि कमीशन के अलावा दोनों ओर से टांके मारकर वह मोटी धनराशि पर हाथ फेर लेता है। यही नहीं, इसी चालबाजी और आपाधापी में कभी कभी खरीद-बिक्री का बना बनाया काम भी चौपट हो जाता है, क्योंकि क्रेता या बिक्रेता में से कोई न कोई नाराज हो ही जाता है। इसलिए व्यावसायिक पारदर्शिता की नीति को यहां भी लागू करें।

# भूमि सम्बन्धी कुछ महत्वपूर्ण पड़ताल करने से आपको मिलेगा अतिरिक्त लाभ और मानसिक सुकून

मसलन, जब भी आपको भूमि में निवेश करने की जरूरत पड़े तो हमेशा यह ध्यान रखिए कि उस भूमि का महत्व क्या है? उसका सर्कल रेट क्या है? उसका मार्केट मूल्य क्या है? दोनों में अंतर कितना है? वह व्यावसायिक भूखंड है या औद्योगिक या फिर रिहायशी। मुख्य बाजार या फिर अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों से उसकी दूरी क्या है? उसका रेंटल वैल्यू क्या है? क्या वह कृषि भूमि है, या फिर बाड़ी-झाड़ी?

ऐसा करते समय आप यह भी सोचिए कि क्या उस पर बगान लगाया जा सकता है? क्या उस पर व्यावसायिक काम किया जा सकता है? क्या उस पर मकान या गोदाम बनाकर नियमित रेंटल आमदनी विकसित की जा सकती है। यदि वह रिहायशी भूमि है तो कैसी कॉलोनी में है- नई कॉलोनी में या फिर पुरानी कॉलोनी में। क्योंकि नई कॉलोनी में अधिक रिटर्न मिलेगा, जबकि पुरानी कॉलोनी में कम। किसी भी नई या पुरानी कॉलोनी में बिजली, पानी, सड़क, स्कूल, अस्पताल, मार्केट काम्प्लेक्स, उपासना स्थल, खेल के मैदान, पार्क, सामुदायिक भवन आदि की उपलब्धता के आधार पर भी कीमत घटती-बढ़ती रहती है। ऐसी कॉलोनी की कीमत बस स्टैंड से दूरी, रेलवे स्टेशन से दूरी, हवाई अड्डे से दूरी, बाजार से दूरी, प्रमुख प्रतिष्ठानों से दूरी, मुख्य सड़क से दूरी के आधार पर भी निर्धारित होती है।

इसे भी पढ़ें: प्रवासी श्रमिकों के लिए रोजगार योजना है Garib Kalyan Rojgar Abhiyan

# भूमि लेने से पहले पता कीजिए यह महत्वपूर्ण बातें

दरअसल, ये ऐसी बातें हैं जो किसी भी भूमि के मूल्य में इजाफा करती हैं। इसलिए आप यह भी पता कीजिए कि सम्बन्धित कॉलोनी या व्यावसायिक इलाका कच्ची है या पक्की। स्थानीय अथॉरिटी से स्वीकृत है या फिर लाल डोरा क्षेत्र। उस भूमि पर बैंक लोन हो सकता है या नहीं। यदि हो सकता है तो फिर कितना? क्योंकि जितना हो सकता है, वही उसका वास्तविक मूल्य हुआ, जिसका भुगतान आप चेक या ड्राफ्ट के माध्यम से करते हैं। और जो आपसे ब्लैक में या नगद मांगा जाएगा, वह इस पेशे में जुड़े लोगों और बिक्रेता का अतिरिक्त लाभ होता है जिसकी अब परम्परा बन चुकी है। लेकिन यह दबी जुबान से चलती है, खुल्लमखुल्ला नहीं। इसलिए अपेक्षित सावधानी बरतें।

इसके अलावा, जब भी आप भूमि खरीदें तो लोन अवश्य करवाएं, इससे जमीन सम्बन्धी कमियों का पता अपने आप चल जाता है। साथ ही, पेपर चेन अवश्य लें। यदि रजिस्ट्री हो तो तुरंत करवाएं और पावर ऑफ अटॉर्नी के चक्कर में न पड़ें। साथ ही, म्यूटेशन भी अवश्य करवा लें। इससे आपकी भूमि परफेक्ट हो जाएगी और जब भी आप इसे बेचना चाहेंगे तो आसानी से बिक जाएगी और ठीकठाक मुनाफा देगी, बशर्ते कि आप चालाकी पूर्वक अपना काम करने को ततपर रहिए।

# मकान, दुकान, फ्लैट, कोठी, फैक्ट्री खरीदने से पहले जुटाइये महत्वपूर्ण जानकारियां, ताकि सुरक्षित रहे आपका निवेश

ये तमाम बातें किसी मकान, दुकान, फ्लैट, कोठी, फैक्ट्री आदि पर भी लागू होती हैं। हालांकि, कुछ अतिरिक्त कानूनी सावधानियां भी बरतनी पड़ती हैं और सम्बन्धित संस्थाओं के प्रावधानों के मुताबिक सौदे को जांचना-जंचवाना पड़ता है।जैसे, किसी भी मकान, दुकान, फ्लैट, कोठी या फैक्ट्री को खरीदने से पहले ये पता कीजिए कि उसका नक्शा सम्बन्धित निकाय से विधिवत पास हुआ है या नहीं। इसी तरह बिजली, पानी का लीगल कनेक्शन लगा हुआ है या नहीं। इस मामले में फैक्ट्री की भूमि, भवन का नियंत्रण प्रायः अलग संस्था के पास होता है, जहां से पॉल्युशन आदि के प्रावधानों की भी बरीकीपूर्वक जांच करनी-करवानी पड़ती है। बनी बनाई मकान, फ्लैट, कोठी आदि के निर्माण की गुणवत्ता का ख्याल अवश्य रखें और किसी अनुभवी अभियंता से इसकी जांच करवाएं। 

ऐसा नहीं हो कि मकान, दुकान, फ्लैट, कोठी आदि खरीदने के बाद उसमें मरम्मत या तोड़फोड़ करवानी पड़े। सम्भव हो तो किसी वास्तुविद से भी सलाह जरूर करें। ये ऐसी बारीकियां हैं जिससे आपका निवेश परिपक्व समझा जाएगा और उससे आपको अपेक्षा से अधिक लाभ भी मिल सकता है। इसलिए धैर्यपूर्वक डील करें, सस्ता सौदा खरीदें, महंगे दामों पर बेचें, ताकि आपके निवेश पर आपको अव्वल रिटर्न मिले। अब तक के ट्रेंड के मुताबिक प्रायः 10-12 साल में जमीन की कीमत दोगुनी हो ही जाती है। इसलिए इत्मीनान पूर्वक निवेश करें।

# सोने में निवेश से पहले कीजिए यह महत्वपूर्ण विचार

जहां तक सोने में निवेश की बात है तो सोने के सिक्के या बिस्कुट में ही निवेश करें। किसी भी तरह के स्वर्ण आभूषण में यदि निवेश करना पड़े तो हॉल मार्क वाले आभूषण में निवेश करें, क्योंकि ऐसा करने से टांके का चक्कर नहीं पड़ता है। क्योंकि आमतौर पर टांके के खेल में आपका लाभ प्रायः स्वर्णकार ही हड़प जाता है। दरअसल, किसी भी सोने की कीमत प्रायः कैरेट के हिसाब से ही तय होती है, लेकिन बिस्कुट आपको 24 कैरेट के मिल जाएंगे, किन्तु स्वर्णाभूषणों में 20-22 कैरेट या 16-18 कैरेट का प्रचलन ज्यादा है। इसका असर सोने की गुणवत्ता और कीमत पर भी पड़ता है। आपको पता होना  वैसे तो सोने के भाव प्रायः ऊपर ही जाता है, लेकिन ऑफ सीजन में ये कभी कभार 2-3 हजार रुपये तक डाउन भी हो जाता है। अब तक के ट्रेंड के मुताबिक, अमूमन 8-10 सालों में सोने के भाव दुगुने हो ही जाते हैं। इसलिए आपका निवेश दुगुना हो जाएगा।

- कमलेश पांडेय

वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार







कोरोना वैक्सीन के लिए जरूरी है Co-Win ऐप, कराना होगा रजिस्ट्रेशन, यहां जानें सब कुछ

  •  अंकित सिंह
  •  जनवरी 18, 2021   16:54
  • Like
कोरोना वैक्सीन के लिए जरूरी है Co-Win ऐप, कराना होगा रजिस्ट्रेशन, यहां जानें सब कुछ

तो सबसे पहले आपको बता दें कि को भी Co-Win ऐप है? सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक भारत में कोरोना टीकाकरण की योजना, कार्यान्वयन, निगरानी और मूल्यांकन के लिए Co-Win ऐप विकसित किया गया है। कोरोना वैक्सीन को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए इस ऐप की मदद ली जाएगी।

भारत में कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में निर्मित दो कोरोना वैक्सीन को आपातकालीन इस्तेमाल के लिए लॉन्च कर दिया है। एक सिरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की कोविशिल्ड है दूसरी भारत बायोटेक की कोवैक्सीन। इन दोनों टीकों ने भारत के आत्मनिर्भर बनने की राह को और भी मजबूत किया है। कोरोना के टीकाकरण अभियान के पहले चरण में लगभग 3 करोड़ फ्रंटलाइन वॉरियर्स को पहला डोज दिया जाएगा। भारत के इस कदम को लेकर विश्व में हर तरफ वाहवाही हो रही है। माना जा रहा है कि जल्द ही आम लोगों के लिए भी कोरोना वैक्सीन शुरू की जाएगी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि आम लोगों तक यह वैक्सीन कैसे पहुंचेगी। सरकार इसके लिए तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। सरकार ने Co-Win ऐप शुरू किया है जिसके जरिए आम लोग भी आसानी से टीका लगवा सकते हैं। आज हम आपको बताते हैं Co-Win ऐप के बारे में और आखिर यह ऐप आपको टीकाकरण में कैसे मदद करेगा इसके बारे में भी...

इसे भी पढ़ें: क्या है नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन? आम लोगों को इससे क्या होगा लाभ?

तो सबसे पहले आपको बता दें कि को भी Co-Win ऐप है? सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक भारत में कोरोना टीकाकरण की योजना, कार्यान्वयन, निगरानी और मूल्यांकन के लिए Co-Win ऐप विकसित किया गया है। कोरोना वैक्सीन को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए इस ऐप की मदद ली जाएगी। आम लोग इस ऐप पर रजिस्ट्रेशन करवा कर कोरोना का टीका आसानी से ले सकेंगे। इस ऐप पर टीकाकरण केंद्र से लेकर टीका लेने वाले लोगों तक की पूरी सूची होगी। इस ऐप के जरिए टीकाकरण प्रक्रिया की पूरी तरह से ट्रैकिंग की जाएगी। कुल मिलाकर अगर कम शब्दों में कहें तो Co-Win ऐप पर भारत में लगाए जाने वाले टीके को लेकर पूरा लेखा-जोखा रहेगा। Co-WIN ऐप को पांच मॉड्यूल में बांटा गया है। पहला है प्रशासनिक मॉड्यूल, दूसरा रजिस्ट्रेशन मॉड्यूल, तीसरा वैक्सीनेशन मॉड्यूल, चौथा लाभान्वित स्वीकृति मॉड्यूल और पांचवां हैं रिपोर्ट मॉड्यूल।

एक बात स्पष्ट कर दें कि Co-Win ऐप पर रजिस्ट्रेशन के बाद ही आप कोरोना का टीका लगवा सकते हैं। रजिस्ट्रेशन के लिए आपको अपनी आईडी दिखानी होगी। आपको बता दें कि रजिस्ट्रेशन के लिए  कोई भी फोटो आईडी का इस्तेमाल किया जा सकता है। आप इन आईडी का इस्तेमाल कर सकते है।

आधार कार्ड, 

वोटर आईडी कार्ड

ड्राइविंग लाइसेंस,

पैन कार्ड,

मनरेगा जॉब कार्ड,

पासपोर्ट 

पेंशन दस्तावेज फोटो के साथ,

बैंक या डाकघर द्वारा जारी फोटो वाली पासबुक

सांसद, विधायक, एमएलसी द्वारा जारी किए गए आधिकारिक पहचान पत्र 

स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड

सेवा पहचान पत्र

इसे भी पढ़ें: साल 2020 में इन योजनाओं को लेकर आई मोदी सरकार, आमजन को हो रहा सीधा फायदा

अब आपको यह बताते है कि Co-Win ऐप पर रजिस्ट्रेशन कैसे करा सकते हैं। सबसे पहले आपको गूगल प्ले स्टोर में जाकर Co-Win ऐप डाउनलोड करना होगा। ध्यान रहे कि आपको Co-Win ऐप  डाउनलोड करना है। वर्तमान में गूगल प्ले स्टोर पर Co-Win ऐप के ही नाम से कई फर्जी ऐप मौजूद है। ऐसे ऐप को इंस्टॉल करने से बचें। रिपोर्ट के मुताबिक Co-Win ऐप एंड्रॉयड, आईओएस और KaiOS, सभी प्लेटफार्म पर उपलब्ध रहेगा। नोकिया फोन और जिओ फोन इस्तेमाल करने वाले लोग भी Co-Win ऐप डाउनलोड कर सकते हैं। 

ऐप को डाउनलोड करने के बाद आपको रजिस्ट्रेशन करना होगा। रजिस्ट्रेशन से पहले Co-Win ऐप पर केंद्र और राज्य सरकार द्वारा जारी गाइडलाइंस बताई जाएगी। रजिस्ट्रेशन के दौरान आपको अपनी फोटो आईडी देनी होगी। बिना फोटो आईडी के रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाएगा। रजिस्ट्रेशन के दौरान आपको अपना मोबाइल नंबर भी रजिस्टर्ड करवाना होगा। रजिस्टर्ड मोबाइल पर ही रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद एक SMS आएगा। इस SMS में वैक्सीनेशन की तारीख, पता और समय बताया जाएगा। आपको यह भी बता दें कि जिस फोटो आईडी के जरिए आपने Co-Win ऐप पर रजिस्ट्रेशन करवाया है उसे टीका लगाते समय भी ले जाना जरूरी है। Co-Win ऐप या फिर मैसेज के जरिए ही आपको डोज की दूसरी तिथि बताई जाएगी।

- अंकित सिंह







कोरोना महामारी से जूझती जनता के लिए आरबीआई ने कीं यह पहलें

  •  जे. पी. शुक्ला
  •  जनवरी 16, 2021   15:57
  • Like
कोरोना महामारी से जूझती जनता के लिए आरबीआई ने कीं यह पहलें

लगातार अधिक तरलता को देखते हुए मौजूदा नीति दर गलियारे को 50 बीपीएस से बढ़ाकर 65 बीपीएस करने का निर्णय लिया गया है। नए कॉरिडोर के तहत, तरलता समायोजन सुविधा (एलएएफ) के तहत रिवर्स रेपो दर पॉलिसी रेपो दर से 40 बीपीएस कम होगी।

मौजूदा कोविड-19  महामारी के मद्देनजर भारतीय बाजार में खुदरा और साथ ही संस्थागत प्लेयर्स पर बोझ को कम करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा हाल ही में कई उपाय किए गए हैं। RBI ने हाल ही में 27 मार्च, 2020 को एक कोविद-19 नियामक पैकेज की घोषणा की थी, जिसमें भारत भर के उधारदाताओं को सभी किश्तों के भुगतान पर तीन महीने- 1 मार्च, 2020 और 31 मई, 2020 (मोरेटोरियम पीरियड) के बीच की मोहलत देने की अनुमति थी। 

यह स्टेटमेंट विभिन्न विकासात्मक और विनियामक नीतियों को निर्धारित करता है, जो COVID-19 की वजह से वित्तीय स्थितियों की मुश्किलों को सीधे संबोधित करता है। इसमें शामिल हैं: (i) सिस्टम में तरलता का विस्तार से यह सुनिश्चित करना कि वित्तीय बाजार और संस्थान COVID से संबंधित अव्यवस्थाओं के सामने सामान्य रूप से कार्य करने में सक्षम हैं; (ii) मौद्रिक संचरण को सुदृढ़ करना ताकि आसान शर्तों पर बैंक ऋण प्रवाह उन लोगों के लिए बने रहे जो महामारी से प्रभावित रहे हैं; (iii) COVID-19 व्यवधानों के कारण पुनर्भुगतान के दबावों को कम करने और कार्यशील पूंजी तक पहुंच में वित्तीय तनाव कम करना और (iv) महामारी की शुरुआत और इसके प्रसार के साथ उच्च अस्थिरता को देखते हुए बाजारों के कामकाज में सुधार।

इसे भी पढ़ें: क्या है नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन? आम लोगों को इससे क्या होगा लाभ?

नियामक पैकेज के तहत कुछ उपाय:

1. लक्षित दीर्घकालिक परिचालन संचालन (Targeted Long Term Repos Operations (TLTROs)

भारत में COVID-19 की शुरुआत और तेजी से प्रसार ने घरेलू इक्विटी, बॉन्ड और विदेशी मुद्रा बाजारों में बड़े बिकवाली को उत्साहित किया है। रिडेम्पशन प्रेशर के तेज होने से कॉरपोरेट बॉन्ड, कमर्शियल पेपर और डिबेंचर जैसे इंस्ट्रूमेंट्स पर लिक्विडिटी प्रीमियर बढ़ गए हैं। COVID-19 प्रकोप के साथ व्यापारिक गतिविधि के कमज़ोर होने के साथ, इन उपकरणों के लिए वित्तीय स्थितियां, जो उपयोग की जाती हैं, बैंक क्रेडिट में मंदी की स्थिति में कार्यशील पूंजी तक पहुंचने के लिए इसे सख्त कर दिया गया है।

बैंकों को प्राथमिक बाज़ार निर्गमों से अपने सक्षम उपकरणों के वृद्धिशील होल्डिंग्स के पचास प्रतिशत और द्वितीयक बाजार से शेष पचास प्रतिशत का अधिग्रहण करना होगा, जिसमें म्यूचुअल फंड और गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियां शामिल हैं। इस सुविधा के तहत बैंकों द्वारा किए गए निवेश को परिपक्वता (HTM) के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा, यहां तक कि कुल निवेश का 25 प्रतिशत से अधिक HTM पोर्टफोलियो में शामिल करने की अनुमति होगी। 

2. नकद आरक्षित अनुपात (Cash Reserve Ratio)

बैंकिंग प्रणाली में तरलता पर्याप्त बनी हुई है, जैसा कि 1-25 मार्च, 2020 के दौरान दैनिक औसत आधार पर 2.86 लाख करोड़ के ऑर्डर के एलएएफ के रिवर्स रेपो परिचालन के तहत बैंकिंग प्रणाली से अधिशेष के अवशोषण में परिलक्षित होता है। हालाँकि, इस तरलता का वितरण वित्तीय प्रणाली में अत्यधिक विषम है और बैंकिंग प्रणाली के भीतर भी ऐसा ही है।

COVID-19 के कारण होने वाले व्यवधान पर बैंकों की मदद करने के लिए एकमुश्त उपाय के रूप में, सभी बैंकों के नकदी आरक्षित अनुपात (CRR) को 100 आधार अंकों की घटाकर शुद्ध मांग और समय देनदारियों (एनडीटीएल) के 3.0 प्रतिशत करने का निर्णय 28 मार्च, 2020 के रिपोर्टिंग पखवाड़े से लिया गया है। सीआरआर में यह कमी सम्पूर्ण बैंकिंग प्रणाली में लगभग 1,37,000 करोड़ की प्राथमिक तरलता को अतिरिक्त एसएलआर की होल्डिंग्स के संबंध में घटकों की देयताओं के अनुपात में जारी करेगी। यह वितरण 26 मार्च, 2021 को समाप्त होने वाली एक वर्ष की अवधि के लिए उपलब्ध होगा।

इसके अलावा, कर्मचारियों की सामाजिक दूरी और परिणामस्वरूप बैंकों द्वारा सामना की जाने वाली कठिनाइयों का संज्ञान लेते हुए, पहले दिन से प्रभावी दैनिक सीआरआर बैलेंस रखरखाव की आवश्यकता को 90 प्रतिशत से घटाकर 80 प्रतिशत करने का निर्णय 28 मार्च, 2020 से लिया गया है। 

3. सीमांत स्थायी सुविधा (Marginal Standing Facility)

सीमांत स्थायी सुविधा (MSF) के तहत, बैंक वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) में 2 प्रतिशत तक की कटौती करके अपने विवेक पर रातोंरात उधार ले सकते हैं।

TLTRO, CRR और MSF से संबंधित ये तीन उपाय सिस्टम में कुल 3.74 लाख करोड़ की तरलता को इंजेक्ट करेंगे।

4. मौद्रिक नीति दर गलियारे का चौड़ीकरण (Widening of the Monetary Policy Rate Corridor)

लगातार अधिक तरलता को देखते हुए मौजूदा नीति दर गलियारे को 50 बीपीएस से बढ़ाकर 65 बीपीएस करने का निर्णय लिया गया है। नए कॉरिडोर के तहत, तरलता समायोजन सुविधा (एलएएफ) के तहत रिवर्स रेपो दर पॉलिसी रेपो दर से 40 बीपीएस कम होगी। सीमांत स्थायी सुविधा (MSF) की दर पॉलिसी रेपो दर से 25 बीपीएस ऊपर रहेगी।

इस तरह के प्रयास वास्तविक अर्थव्यवस्था के वित्तीय तनाव के संचरण को रोकेंगे और व्यवहार्य व्यवसायों की निरंतरता सुनिश्चित करेंगे और इन असाधारण रूप से परेशान समय में उधारकर्ताओं को राहत प्रदान करेंगे।

इसे भी पढ़ें: साल 2020 में इन योजनाओं को लेकर आई मोदी सरकार, आमजन को हो रहा सीधा फायदा

5. सावधि ऋण पर अधिस्थगन (Moratorium on Term Loans)

सभी वाणिज्यिक बैंकों (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, छोटे वित्त बैंकों और स्थानीय क्षेत्र के बैंकों सहित), सहकारी बैंक, अखिल भारतीय वित्तीय संस्थान और NBFC (आवास वित्त कंपनियों और सूक्ष्म-वित्त संस्थानों सहित) ("ऋण देने वाली संस्थाएं)" को 1 मार्च, 2020 तक बकाया सभी सावधि ऋणों के संबंध में किश्तों के भुगतान पर तीन महीने की मोहलत देने की अनुमति दी गई। 

6. कार्यशील पूंजी सुविधाओं पर ब्याज का स्थगितकरण (Deferment of Interest on Working Capital Facilities)

नकद ऋण / ओवरड्राफ्ट के रूप में स्वीकृत कार्यशील पूंजीगत सुविधाओं के संबंध में, उधार देने वाली संस्थाओं को 1 मार्च, 2020 तक बकाया ऐसी सभी सुविधाओं के संबंध में ब्याज के भुगतान पर तीन महीने की छूट देने की अनुमति दी जा रही है। ब्याज का भुगतान आस्थगित अवधि की समाप्ति के बाद किया जाएगा।

उधारकर्ताओं को COVID-19 की वजह से उत्पन्न आर्थिक गिरावट से सक्षम बनाने के लिए विशेष रूप से अधिस्थगन / स्थगन प्रदान किया जा रहा है।

7. वर्किंग कैपिटल फाइनेंसिंग में आसानी (Easing of Working Capital Financing)

नकद ऋण / ओवरड्राफ्ट के रूप में स्वीकृत कार्यशील पूंजी सुविधाओं के संबंध में, उधार देने वाली संस्थाएं मार्जिन को कम करके और / या उधारकर्ताओं के लिए कार्यशील पूंजी चक्र को आश्वस्त करके ड्राइंग पावर को रिकलकुलेट कर सकती हैं। उधारकर्ताओं के लिए विशेष रूप से COVID-19 से आर्थिक गिरावट की वजह से दी गई क्रेडिट शर्तों में इस तरह के बदलाव को उधारकर्ता की वित्तीय कठिनाइयों के कारण दी गई रियायतों के रूप में नहीं माना जाएगा।

8. नेट स्टेबल फंडिंग रेशियो (NSFR) के कार्यान्वयन को स्थगित करना (Deferment of Implementation of Net Stable Funding Ratio (NSFR)

वैश्विक वित्तीय संकट के बाद के वर्षों में किए गए सुधारों के हिस्से के रूप में, बेसल कमेटी ऑन बैंकिंग सुपरविजन (BCBS) ने नेट स्टेबल फंडिंग रेशियो (NSFR) की शुरुआत की थी, जो बैंकों को फंडिंग के पर्याप्त स्थिर स्रोतों के लिए अपनी गतिविधियों की फंडिंग को भविष्य के वित्त पोषण के तनाव के जोखिम को कम करने के लिए बैंकों की आवश्यकता के हिसाब से जोखिम को कम करता है।  

- जे. पी. शुक्ला







रेकरिंग डिपॉजिट से तैयार कीजिए एकमुश्त धनराशि, खाता संचालन प्रक्रिया हुई बेहद आसान

  •  कमलेश पांडेय
  •  जनवरी 14, 2021   13:34
  • Like
रेकरिंग डिपॉजिट से तैयार कीजिए एकमुश्त धनराशि, खाता संचालन प्रक्रिया हुई बेहद आसान

बता दें कि पोस्ट ऑफिस आरडी पर 5.8 प्रतिशत ब्याज दे रहा है। आप आरडी स्कीम में न्यूनतम 100 रुपए हर महीने निवेश कर सकते हैं। यदि अधिक करने की इच्छा है तो 10 रुपये के गुणक में ही करें। अधिकतम राशि की कोई सीमा नहीं है वैध तरीके से।

किसी भी व्यक्ति को 5-10 साल के अंतराल पर एकमुश्त धनराशि की जरूरत पड़ती है। कभी कभी प्रत्येक 10-20 वर्ष में बड़ी पूंजी की जरूरत महसूस होती है। लेकिन यह बात उनको काफी खलती है जिन्हें कोई सम्पत्ति या बड़ी पूंजी नहीं होती है। ऐसे में हम आपको यह बताना चाहते हैं कि अपनी नियमित या मासिक आय में से ही कुछ राशि बचाएं और उसे पोस्ट ऑफिस के आरडी खाते में जमा करें, ताकि आपकी भविष्य की योजनाएं निर्बाध रूप से साकार हो सकें।

इसे भी पढ़ें: क्या है नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन? आम लोगों को इससे क्या होगा लाभ?

अब आपको यह पता होना चाहिए कि ऑनलाइन बैंकिंग के जरिए पोस्ट ऑफिस के आर डी (रेकरिंग डिपाजिट) अकाउंट में आप घर बैठे ही पैसा जमा कर सकते हैं और आईपीपीबी ऐप के जरिए आपका यह काम होगा। इस प्रकार अब प्रति माह पैसा जमा करने के लिए पोस्ट ऑफिस जाने का चक्कर नहीं होगा और आसानीपूर्वक आपका पैसा आपके आर डी एकाउंट में जमा होता जाएगा। 

बता दें कि पोस्ट ऑफिस आरडी पर 5.8 प्रतिशत ब्याज दे रहा है। आप आरडी स्कीम में न्यूनतम 100 रुपए हर महीने निवेश कर सकते हैं। यदि अधिक करने की इच्छा है तो 10  रुपये के गुणक में ही करें। अधिकतम राशि की कोई सीमा नहीं है वैध तरीके से। ऐसे में यदि आपका रेकरिंग डिपॉजिट अकाउंट पोस्ट ऑफिस में है तो आपको इसमें पैसा जमा करने के लिए पोस्ट ऑफिस जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि आप  इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) ऐप के माध्यम से पोस्ट ऑफिस आरडी में ऑनलाइन पैसा जमा कर सकते हैं। कहने का तातपर्य यह कि आप अपनी मासिक किस्त को इस ऐप के माध्यम से ऑनलाइन अपने आरडी खाते में ट्रांसफर कर सकते हैं।

बताते चलें कि आप ऐसे ऐप से अपनी नियत राशि डिपाजिट कर सकते हैं। सबसे पहले अपने बैंक खाते से आईपीपीबी अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करें। फिर डीओपी प्रॉडक्ट्स पर जाएं और यहां पर रेकरिंग डिपॉजिट चुनें।

आर डी अकाउंट नंबर और फिर डीओपी कस्टमर आईडी लिखें। उसके बाद इंस्टालमेंट पीरियड और अमाउंट दर्ज करें। इतना करने पर इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक आपको आईपीपीबी ऐप के जरिए किए गए पेमेंट ट्रांसफर के लिए सूचित करेगा। इस तरह से आप इंडिया पोस्ट द्वारा ऑफर की जाने वाली अन्य स्कीम्स में भी आईपीपीबी बचत खाते के माध्यम से नियमित भुगतान कर सकते हैं।

आपको मालूम होना चाहिए कि आरडी यानी आवर्ती जमा (रेकरिंग डिपॉजिट) किसी भी बड़ी बचत में आपकी मदद कर सकती है। एक तरह से आप इसका इस्‍तेमाल गुल्लक की तरह कर सकते हैं। आशय यह कि आप इसमें हर महीने सैलरी आने पर एक निश्चित रकम डालते रहें और इसके मेच्योर होने पर आपके हाथ में एक बड़ी रकम होगी। फिलवक्त इंडिया पोस्ट की आरडी में 5.8 फीसदी ब्याज मिल रहा है। इस आरडी स्कीम में आप मिनिमम 100 रुपए हर महीने निवेश कर सकते हैं। इससे ज्यादा 10 के मल्टीपल में आप कोई भी रकम जमा करा सकते हैं। मैक्सिमम जमा राशि की कोई लिमिट नहीं है।

इसे भी पढ़ें: साल 2020 में इन योजनाओं को लेकर आई मोदी सरकार, आमजन को हो रहा सीधा फायदा

उल्लेखनीय है कि इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक की शुरुआत 1 सितंबर 2018 को हुई थी। आईपीपीबी देशभर में फैले 1.55 लाख पोस्ट ऑफिस और 3 लाख पोस्टल एम्पलॉयीज के जरिए अपनी बेहतर सेवाएं दे रहा है। इसमें 1.35 लाख पोस्ट ऑफिस ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं। आईपीपीबी मौजूदा समय में 13 भाषाओं में अपनी सेवाएं उपलब्ध करा रहा है। आप अपनी भावी बड़ी जरूरतों यथा- बच्चों की शिक्षा, उनके लिए बड़ी पूंजी की व्यवस्था, खुद के लिए अप्रत्याशित बड़े आकस्मिक व्यय के वास्ते पूंजी की व्यवस्था, शादी-विवाह व अन्य सामाजिक संस्कारों के निमित्त इसका उपयोग कर सकते हैं। कोई भी व्यक्ति अपनी नियमित आय या मासिक आय में से कुछ राशि की बचत करके अपने आरडी एकाउंट को चला सकता है। ऐसा करने से उसके पूरे परिवार का भला होगा।

- कमलेश पांडेय

वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार







This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.Accept