जानिए, क्या है ईडीएलआई बीमा? कैसे मिलेगा 7 लाख रुपये का मुफ्त बीमा और कोरोना से हुई मौत पर क्लेम भी

जानिए, क्या है ईडीएलआई बीमा? कैसे मिलेगा 7 लाख रुपये का मुफ्त बीमा और कोरोना से हुई मौत पर क्लेम भी

आप कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ से जुड़े हुए हैं और आपका पीएफ कटता है तो फिर ईपीएफओ की ओर से आपको जीवन बीमा की सुविधा दी जाती है। अब सरकार के नए मसौदे के मुताबिक, ईपीएफओ की ओर से कर्मचारी को 7 लाख रुपये तक का लाइफ कवर मिलेगा।

कोरोना काल में सरकार ने उन कर्मचारियों का भी विशेष ख्याल रखा है, जिनकी सेवाओं से कोई सरकारी अथवा निजी कम्पनी या फर्म दिन दूना रात चौगुनी तरक्की करते हैं। इसलिए पीएफ खाताधारकों को अब जिंदगी भर 7 लाख रुपये का बीमा कवर मुफ्त में मिलेगा। इसके लिए केंद्र सरकार की तरफ से नोटिफिकेशन जारी हो गया है, जो तत्काल प्रभाव से लागू माना जायेगा। जब से यह खबर आई है, इससे लाभान्वित कर्मचारियों व उनके परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं है।

बताते चलें कि अब पीएफ खाताधारकों को जिंदगीभर मुफ्त में सात लाख रुपये का बीमा कवर मिलेगा। जिसे एडीएलआई बीमा कवर का नाम दिया गया है। खास बात यह कि इसके लिए पीएफ खाताधारक के खाते से एक रुपया भी नहीं जमा कराया जाएगा, बल्कि ईडीएलआई स्कीम में केवल कंपनी की ओर से प्रीमियम जमा किया जाता है, जो कि कर्मचारी की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते का 0.50 फीसदी होता है। 

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उल्लेखनीय है कि इसके पहले इसके तहत कम से कम 2 लाख रुपये और ज्यादा से ज्यादा 6 लाख रुपये तक का बीमा दिया जाता था। लेकिन, केंद्र में दूसरी बार सत्तारूढ़ हुई और अप्रत्याशित कोरोना प्रकोप झेल रही नरेंद्र मोदी सरकार ने गजट के माध्यम से ऐलान किया है कि अब देश के पीएफ खाताधारकों को सात लाख रुपये तक की बीमा की सुविधा बिल्कुल मुफ्त में दी जाएगी। इसलिए, यहां पर हम आपको बता रहे हैं कि किस तरह से यह सुविधा आपको या आपके नामित उत्तराधिकारी को मिलेगी, जिससे आपको या आपके उत्तराधिकारी को भी किसी विडम्बना भरी परिस्थिति में एक हद तक सीमित आर्थिक राहत मिलेगी।

आपको मालूम होना चाहिए कि यदि आप कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ से जुड़े हुए हैं और आपका पीएफ कटता है तो फिर ईपीएफओ की ओर से आपको जीवन बीमा की सुविधा दी जाती है। अब सरकार के नए मसौदे के मुताबिक, ईपीएफओ की ओर से कर्मचारी को 7 लाख रुपये तक का लाइफ कवर मिलेगा। इसलिए आप यदि सरकारी या प्राइवेट जॉब करते हैं तो फिर यह जानकारी आपके लिए बेहद अहम है। इसे सुरक्षित रख लीजिए।

यहां पर यह स्पष्ट करते चलें कि ईपीएफओ के सभी सब्सक्राइबर इंप्लॉइज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस स्कीम यानी ईडीएलआई 1976 के तहत कवर होते हैं। जिसके तहत ईपीएफओ धारक को 7 लाख रुपये तक का बीमा कवर मिलता है। यूं तो पहले यह राशि महज 6 लाख रुपये थी। लेकिन, मोदी सरकार के श्रम मंत्री संतोष गंगवार की अध्यक्षता वाले ईपीएफओ के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (सीबीटी) ने गत 9 सितंबर 2020 को ईडीएलआई योजना के तहत अधिकतम बीमा राशि बढ़ाकर 7 लाख रुपये करने का फैसला किया था, जिसको अब काफी सराहा जा रहा है।

बेहद महत्वपूर्ण बात यह है कि ईपीएफओ के इस फैसले का फायदा देश के 5 करोड़ से अधिक सब्सक्राइबर्स को मिलेगा। ईडीएलआई स्कीम के तहत दावा इंप्लॉई की बीमारी, दुर्घटना या स्वाभाविक मृत्यु होने पर भी किया जा सकता है। अगर किसी कर्मचारी की कोविड-19 की वजह से भी मौत होती है तो परिजनों को ईडीएलआई के तहत 7 लाख रुपये मिल सकते हैं। बशर्ते कि कर्मचारी की मौत के बाद नॉमिनी की ओर से क्लेम के लिए कोई दावा किया जाएगा। इस योजना के तहत कोई भी भुगतान एकमुश्त होता है। अगर किसी कर्मचारी का कोई नॉमिनी नहीं है तो फिर उसके कानूनी उत्तराधिकारी को ही यह क्लेम दिया जाता है। ऐसे में मृत कर्मचारी का जीवनसाथी, उसकी कुंवारी बच्चियां और नाबालिग बेटा भी इसके लाभार्थी होते हैं।

हालांकि, ऐसे क्लेम को पाने के लिए केवल एक शर्त है। वह यह कि कर्मचारी की मौत से ठीक पहले 12 महीनों के अंदर एक से अधिक प्रतिष्ठानों में उसने नौकरी की हो। यानी कि मौत से पहले एक साल के अंदर कर्मचारी का कार्यरत होना बेहद जरूरी है। वहीं, क्लेम के दौरान इंश्योरेंस कंपनी को कर्मचारी की मृत्यु का प्रमाण पत्र, उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र (सक्सेशन सर्टिफिकेट), अवयस्क नामिती (माइनर नॉमिनी) की ओर से अभिभावक द्वारा दावा किए जाने पर अभिभाभवक प्रमाण पत्र (गार्जियनशिप सर्टिफिकेट) और बैंक डिटेल्स देने की जरूरत होगी।

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यहां पर यह स्पष्ट कर दें कि कर्मचारी की मौत के बाद  नॉमिनी को दावा (क्लेम) के लिए फॉर्म-5 आईएफ जमा करना होगा, जिसे नियोक्ता (एंप्लॉयर) सत्यापित करता है। अगर नियोक्ता उपलब्ध नहीं है तो फिर राजपत्रित (गजटेड) अधिकारी, मजिस्ट्रेट, ग्राम पंचायत के अध्यक्ष और नगरपालिका या जिला स्थानीय बोर्ड द्वारा वैरीफाई किया जाएगा।

दिलचस्प बात तो यह है कि ईडीएलआई स्कीम में केवल कंपनी की ओर से ही प्रीमियम जमा किया जाता है, जो कि कर्मचारी की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते का 0.50 फीसदी होता है। इसमें अधिकतम बेसिक सैलरी लिमिट 15 हजार रुपये निर्धारित है, यानी कि 15 हजार रुपये से अधिक बेसिक सैलरी होने के बावजूद काउंट केवल 15 हजार रुपये ही होगी।

अब आइए इसके गणित को समझने की कोशिश करते हैं।

अमूमन, ईडीएलआई स्कीम के तहत क्लेम कर्मचारी की आखिरी 12 महीने की बेसिक सैलरी और डीए के आधार पर होती है। अब ताजा संशोधन के मुताबिक, इंश्योरेंस कवर का क्लेम आखिरी बेसिक सैलरी और डीए का 35 गुना होगा। जिसमें 1.75 लाख रुपये का अधिकतम बोनस जुड़ेगा। उदाहरण के तौर पर मान लीजिए कि कर्मचारी की आखिरी 12 माह की बेसिक सैलरी+डीए, जो 15 हजार रुपये है। इस तरह इंश्योरेंस क्लेम (35 x 15,000) + 1,75,000= 7 लाख रुपये अधिकतम बनता है।

दरअसल, अगर किसी कर्मचारी की सर्विस के दौरान अचानक मौत हो जाती है तो उसके नॉमिनी को ईपीएफओ की ओर से इंप्लॉयीज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस यानी ईडीएलआई के तहत सात लाख रुपये दिए जाते हैं।

सरकार द्वारा हर पीएफ मेंबर को तीन तरह की सुविधाएं दी जाती हैं। पहला, ईपीएफ, दूसरा, ईपीएस और तीसरा ईडीएलआई। मसलन, ईडीएलआई का फुल फॉर्म होता है इंप्लॉयीज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस। यह पीएफ खाते से लिंक की गई होती है। यह सुविधा कर्मचारियों को बिल्कुल मुफ्त में दी जाती है।

बता दें कि गत 9 सितंबर 2020 को सीबीटी की बैठक में कर्मचारियों के लिए इसके तहत मिलने वाले बीमा लाभ की रकम को 6 लाख से बढ़ाकर 7 लाख रुपये कर दिया गया,  जो कि पीएफ खाताधारकों के लिए काफी अच्छी खबर थी। लेकिन इसके लिए किसी तरह की अधिकारिक घोषणा तब नहीं की गई थी। लेकिन अब गजट में इसके बारे में जानकारी देते हुए कहा गया है कि कर्मचारियों को कम से कम 2.5 लाख रुपये और ज्यादा से ज्यादा 7 लाख रुपये तक का बीमा दिया जाएगा, जो बिल्कुल मुप्त मिलेगा।

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बहरहाल, अगर किसी कर्मचारी की मौत सेवा के दौरान हो जाती है तो उसके नॉमिनी को सात लाख रुपये तक दिए जाएंगे। इसके लिए उसे ऑनलाइन या ऑफलाइन अप्लिकेशन देना होगा। अगर पीएफ खाताधारक ने अपने यूएएन में नॉमिनी का नाम दिया है तो उसे फॉर्म 20, 10 डी और फॉर्म 5 जमा करना होगा। अगर लाभार्थी द्वारा यह भरा जाता है तो उसे ऑनलाइन फॉर्म जमा करना होगा। अगर कर्मचारी ने यूएएन खाते में अपने नॉमिनी का नाम नहीं दिया है तो वह ऑनलाइन क्लेम नहीं कर सकता है। इसके लिए ऑफलाइन तरीके से पीएफ ऑफिस में नॉमिनी का नाम चढ़वाना होगा और ईपीएफओ द्वारा बताए गए दिशानिर्देशों का पालन करना होगा। इस तरह से आप ऑफलाइन क्लेम कर सकते हैं। नॉमिनी द्वारा बीमा के लिए क्लेम करने पर उसे पूरे पैसे मिलेंगे।

यहां पर यह स्पष्ट कर दें कि पीएफ की रकम वह धनराशि होती है जो रकम नियोक्ता द्वारा और कर्मचारी द्वारा मिलकर पीएफ खाते में जमा रहती है, उसको ब्याज समेत ईपीएओ नॉमिनी को देगा। वहीं, ईपीएस पेंशन का अभिप्राय उस स्थिति से है, जब अगर खाताधारक ने 10 वर्ष तक की सेवा पूरी नहीं की है तो पेंशन राशि सेवा के मुताबिक वापस मिल जाएगी। परन्तु अगर कर्मचारी ने 10 साल की सेवा पूरी कर ली है तो आपको मासिक पेंशन मिलेगी। वहीं, ईडीएलआई इंश्योरेंस के तहत अपेक्षित बीमा की रकम स्पष्ट गणना पर आधारित होती है। हालांकि, यह रकम कम से कम 2.5 लाख रुपये और ज्यादा से ज्यादा 7 लाख रुपये तक हो सकती है। ऐसी गणना के अनुसार, जो भी रकम बनेगी, उसे नामिती यानी नॉमिनी को दे दिया जाएगा।

- कमलेश पांडेय

वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार