मकर संक्रांति पर तिल से पूजा भी करें और तिल खाएं भी, होगा बड़ा लाभ

By मिताली जैन | Publish Date: Jan 10 2019 3:47PM
मकर संक्रांति पर तिल से पूजा भी करें और तिल खाएं भी, होगा बड़ा लाभ
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मकर संक्रांति के दिन तिल की महत्ता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस पर्व को ''''तिल संक्रांति'''' के नाम से भी पुकारा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वास्तव में इस दिन तिल को इतना महत्व क्यों दिया जाता है।

हिन्दू धर्म का एक विशेष पर्व माने जाने वाले मकर संक्रांति के अवसर पर लोग सिर्फ पूजा−पाठ, स्नान या दान ही नहीं करते। बल्कि इस दिन तिल खाने और उसे दान करने का एक विशेष महत्व है। यूं तो इस दिन तिल के अतिरिक्त चावल, उड़द की दाल, मूंगफली या गुड़ आदि का भी सेवन किया जाता है परंतु तिल का एक अलग ही महत्व है। लोग अन्य कोई चीज खाएं या न खाएं, लेकिन तिल को किसी न किसी रूप में शामिल अवश्य करते हैं। मकर संक्रांति के दिन तिल की महत्ता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस पर्व को ''तिल संक्रांति'' के नाम से भी पुकारा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वास्तव में इस दिन तिल को इतना महत्व क्यों दिया जाता है। नहीं न, तो चलिए आज हम आपको इस बारे में बताते हैं−
 
शनि के लिए महत्वपूर्ण तिल
मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं, इसलिए इस पर्व को मकर संक्रांति कहकर पुकारा जाता है और मकर के स्वामी शनि देव हैं। सूर्य और शनि देव भले ही पिता−पुत्र हैं लेकिन फिर भी वे आपस में बैर भाव रखते हैं। ऐसे में जब सूर्य देव शनि के घर प्रवेश करते हैं तो तिल की उपस्थिति के कारण शनि उन्हें किसी प्रकार का कष्ट नहीं देते। 


 

कम होता शनि कुप्रभाव


जैसा कि हम सभी जानते हैं कि तिल शनि प्रिय वस्तु है। शनि व्यक्ति के पूर्व जन्म के पापों का प्रायश्चित करवाते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन अगर तिल का दान व उसका सेवन किया जाए तो इससे शनि देव प्रसन्न होते हैं और उनका कुप्रभाव कम होता है। जो लोग इस दिन तिल का सेवन व दान करते हैं, उनका राहु व शनि दोष निवारण बेहद आसानी से हो जाता है।
 
मिलती है विष्णु की विशिष्ट कृपा
शनि देव के अतिरिक्त सृष्टि के पालनहार माने जाने वाले विष्णुजी के लिए भी तिल बेहद खास है। मान्यता है कि तिल की उत्पत्ति भगवान विष्णु के शरीर से हुई है और अगर तिल का उपयोग इस दिन किया जाए तो इससे व्यक्ति सभी प्रकार के पापों से मुक्त हो जाता है। साथ ही व्यक्ति को विष्णुजी की विशेष कृपा दृष्टि भी प्राप्त होती है। 


 

स्वास्थ्यवर्धक तिल
तिल को बेहद ही स्वास्थ्यवर्धक खाद्य वस्तु माना गया है। इसमें कॉपर, मैग्नीशियम, आयरन, फास्फोरस, जिंक, प्रोटीन, कैल्शियम, बी काम्प्लेक्स और कार्बोहाइट्रेड आदि महत्वपूर्ण तत्व पाये जाते हैं। इसके अतिरिक्त तिल में एंटीऑक्सीडेंट्स भी होते हैं जो कई बीमारियों के इलाज में मदद करते हैं। यह पाचन क्रिया को भी सही रखता है और शरीर को निरोगी बनाता है।

मौसम अनुकूल तिल
मकर संक्रांति का पर्व हर वर्ष जनवरी माह में मनाया जाता है। इस दौरान मौसम काफी ठंडा होता है। वहीं तिल की तासीर गर्म होती है और सर्दी के मौसम में जब शरीर का तापमान गिर जाता है तो शरीर को अतिरिक्त गर्मी की जरूरत होती है। ऐसे में तिल का सेवन शरीर में गर्मी व उर्जा के स्तर को बनाए रखता है। 
 

प्रचलित है कथा
मकर संक्रांति के दिन तिल खाने व उसका दान करने के पीछे एक पौराणिक कथा भी है। दरअसल, सूर्य देव की दो पत्नियां थी छाया और संज्ञा। शनि देव छाया के पुत्र थे, जबकि यमराज संज्ञा के पुत्र थे। एक दिन सूर्य देव ने छाया को संज्ञा के पुत्र यमराज के साथ भेदभाव करते हुए देखा और क्रोधित होकर छाया व शनि को स्वयं से अलग कर दिया। जिसके कारण शनि और छाया ने रूष्ट होकर सूर्य देव को कुष्ठ रोग का शाप दे दिया। अपने पिता को कष्ट में देखकर यमराज ने कठोर तप किया और सूर्यदेव को कुष्ठ रोग से मुक्त करवा दिया लेकिन सूर्य देव ने क्रोध में शनि महाराज के घर माने जाने वाले कुंभ को जला दिया। इससे शनि और उनकी माता को कष्ट भोगना पड़ा। तब यमराज ने अपने पिता सूर्यदेव से आग्रह किया कि वह शनि महाराज को माफ कर दें। जिसके बाद सूर्य देव शनि के घर कुंभ गए। उस समय सब कुछ जला हुआ था, बस शनिदेव के पास तिल ही शेष थे। इसलिए उन्होंने तिल से सूर्य देव की पूजा की। उनकी पूजा से प्रसन्न होकर सूर्य देव ने शनिदेव को आशीर्वाद दिया कि जो भी व्यक्ति मकर संक्रांति के दिन काले तिल से सूर्य की पूजा करेगा, उसके सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाएंगे। इसलिए इस दिन न सिर्फ तिल से सूर्यदेव की पूजा की जाती है, बल्कि किसी न किसी रूप में उसे खाया भी जाता है। 
 
-मिताली जैन

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