होली भाई दूज पर तिलक करने से मिलती है संकट से मुक्ति

Holi Bhai Dooj
होली के अगले दिन देश के कई हिस्सों में भाईदूज मनाने की परंपरा है। वैसे तो दीपावली के बाद आने वाला भाई दूज सबसे ज्यादा लोकप्रिय त्यौहार है। लेकिन होली भाई दूज का भी चलन जोरों पर है। यह त्योहार द्वितीय तिथि को मनाया जाता है।

आज होली भाई दूज है, यह त्यौहार भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को सुदृढ़ करने के लिए मनाया जाता है। तो आइए हम आपको होली भाई दूज के महत्व तथा पूजा की विधि के बारे में बताते हैं। 

जानें होली दूज के बारे में 

होली के अगले दिन देश के कई हिस्सों में भाईदूज मनाने की परंपरा है। वैसे तो दीपावली के बाद आने वाला भाई दूज सबसे ज्यादा लोकप्रिय त्यौहार है। लेकिन होली भाई दूज का भी चलन जोरों पर है। यह त्योहार द्वितीय तिथि को मनाया जाता है। इस साल होली भाईदूज का त्योहार 30 मार्च को है।

इसे भी पढ़ें: भारत की विविधता भरी संस्कृति की पहचान का पर्व है होली

होली दूज के दिन ऐसे करें पूजा

होली की सुबह होली भाईदूज मनाया जाता है। इस दिन किसी भी पवित्र नदी में स्नान कर भगवान विष्णु तथा गणेश की पूजा करना लाभदायक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन गोबर के दूज बनाए जाते हैं और इनकी विधि-विधान से पूजा होती है। बहनें दूज से भाई की लंबी आयु के लिए प्रार्थना करती हैं। साथ ही बहनें भाई के शत्रु एवं बाधा का नाश होने की प्रार्थना करती हैं। इसके अलावा भारत में कई जगहों पर भाई को चौकी या पीड़ा पर बैठाकर उसके माथे पर तिलक लगाती हैं और आरती उतारकर उनकी पूजा करती हैं।

होली दूज से जुड़ी पौराणिक कथा 

होली दूज हिन्दुओं का विशेष त्यौहार है। शास्त्रों में इससे जुड़ी एक पौराणिक कथा प्रचलित है। इस कथा के अनुसार एक नगर में एक बुढ़िया रहती थी। बुढ़िया के दो बच्चे थे एक बेटा और एक बेटी। बुढ़िया ने अपनी बेटी की शादी कर दी थी। एक बार होली के बाद भाई ने अपनी मां से अपनी बहन के यहां जाकर तिलक कराने का आग्रह किया तो बुढ़िया ने अपने बेटे को जाने की अनुमति दे दी। बुढ़िया का बेटा एक जंगल से गुजर रहा था जहां उसे एक नदी मिली। उस नदी ने बोला कि मैं तुम्हारा काल हूं और मैं तुम्हारी जान लूंगी। इस पर बुढ़िया का बेटा बोला पहले मैं अपनी बहन से तिलक करा लूं फिर मेरे प्राण हर लेना।

इसके बाद वह आगे बढ़ा जहां उसे एक शेर मिला बुढ़िया के बेटे ने शेर से भी यही कहा। इसके बाद उसे एक सांप मिलता है उसने सांप को भी यही जवाब दिया। जिसके बाद वह अपनी बहन के घर पहुंचता है। उस समय उसकी बहन सूत काट रही थी। जब उसका भाई उसे पुकारता है तो वह उसकी आवाज को अनसुना कर देती है। लेकिन जब भाई दुबारा आवाज लगाता है तो उसकी बहन बाहर आ जाती है। इसके बाद उसका भाई तिलक कराकर चल दुखी मन से वापस जंगल की ओर चला जाता है। इस पर बहन उसके दुख का कारण पूछती और भाई उसे सब बता देता है।

इसे भी पढ़ें: होली परंपरा, हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया जाने वाला त्यौहार

उस बुढ़िया की लड़की कहती है कि रूको भाई मैं पानी पीकर आती हूं और वह एक तालाब के पास जाती है जहां उसे एक बुढ़िया मिलती है और वह उस बुढ़िया से अपनी इस समस्या का समाधान पूछती है। इस पर बुढ़िया कहती है यह तेरे ही पिछले जन्मों का कर्म है जो तेरे भाई को भुगतना पड़ रहा है। अगर तुम अपने भाई को बचाना चाहती हो तो उसकी शादी होने तक वह हर विपदा को टाल दे तो तेरा भाई बच सकता है। इसके बाद वह अपने भाई के पास जाती है और कहती है कि मैं तुझे घर छोड़ने के लिए चलूंगी और वह शेर के लिए मांस, सांप के लिए दूध और नदी के लिए ओढ़नी लाती है। इसके बाद दोनों आगे बढ़ते हैं रास्ते में उन्हें पहले शेर मिलता है। उसकी बहन शेर के आगे मांस डाल देती है। उसके बाद आगे उन्हें सांप मिलता है। जिसके बाद उस बुढ़िया की लड़की उसे दूध दे देती है और अंत में उन्हें नदी मिलती है। जिस पर वह ओढ़नी डाल देती है। इस प्रकार वह बहन अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति से अपने भाई को बचा लेती है।  

जानें होली दूज का महत्व

होली दूज भाई-बहनों के लिए विशेष त्यौहार है। जिस तरह से दिवाली के बाद भाई दूज मनाकर भाई की लंबी उम्र के लिए कामना की जाती है और उसे नर्क की यातनाओं से मुक्ति दिलाने के लिए उसे तिलक लगाया जाता है। वैसे ही होली के बाद भाई का तिलक करके होली की भाई दूज मनायी जाती है ताकि उसे सभी प्रकार के संकटों से बचाया जा सके। पंडितों के अनुसार होली के अगले दिन भाई को तिलक करने से उसे सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति मिलती है। 

- प्रज्ञा पाण्डेय

अन्य न्यूज़