महालक्ष्मी व्रत पूजा: जानें तिथि, समय और पूजा विधि

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मिताली जैन । Sep 17, 2022 1:02PM
महालक्ष्मी की पूजा की शुरुआत तिथि 3 सितंबर थी और इसका समापन 17 सितंबर को को होगा। यह पूजा 16 दिनों तक चलती है। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है और व्रत किया जाता है। साथ ही उनका पूरे विधि-विधान के साथ पूजन किया जाता है।

हिंदू पंचांग के अनुसार कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 17 सितंबर को दोपहर के समय 2:14 पर यह पूजा शुरू होगी और 18 सितंबर की शाम 4 बजकर 33 मिनट तक रहेगी। आपको बताते चलें कि महालक्ष्मी की पूजा की शुरुआत तिथि 3 सितंबर थी और इसका समापन 17 सितंबर को को होगा। यह पूजा 16 दिनों तक चलती है। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है और व्रत किया जाता है। साथ ही उनका पूरे विधि-विधान के साथ पूजन किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार यह बहुत ही महत्वपूर्ण व्रत है। जो भी जातक मां लक्ष्मी की पूरे श्रद्धाभाव से पूजा करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, जीव के सभी संकट दूर हो जाते हैं। जीवन खुशहल और समृद्ध हो जाता है। अगर आप किसी कारणवश इस व्रत को संपूर्ण रूप से न कर पाएं तो अपनी इच्छा अनुसार कम दिन के लिए भी इस व्रत का पालन कर सकते हैं। 

विशेषता

- महालक्ष्मी व्रत में अन्न ग्रहण नहीं किया जाता

- व्रत के 16वें दिन पूजा कर इस व्रत का उद्यापन किया जाता है।

- इस व्रत को बहुत ही शुभ माना जाता है।

- व्रत को पूरे विधि-विधान के साथ किया जाना चाहिए। 

- श्रद्धा भाव से करने पर जातक के घर में सुख-शांति होती है और उसके घर में धन का आगमन बढ़ता है।

- मान्यता है कि जो महिला इस व्रत को करती है, उसके घर में हमेशा खुशियां बनी रहती हैं।

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महालक्ष्मी व्रत का विधि-विधान

व्रत के समापन के दिन यानी 17 सितंबर, शनिवार को प्रात:काल उठें। स्नान आदि कामों से निवृत्त होने के बाद पूजा का संकल्प लें। पूजा के लिए के दौरान निम्न मंत्र का उच्चारण करें-

करिष्यहं महालक्ष्मि व्रतमें त्वत्परायणा

तदविघ्नेन में यातु समाप्तिं स्वत्प्रसादत:।।

इस मंत्र को आंख बंद करके और दोनों हाथों को जोड़कर देवी लक्ष्मी की मूर्ति के समक्ष उच्चारित करें। यह पूजा और भी सफल तब होगी जब आप इस मंत्र के भाव को समझेंगे और मन में मां लक्ष्मी के प्रति पूरी श्रद्धा रखेंगे। उक्त मंत्र का अर्थ है कि दे मां देवी, मैं आपकी सेवा में तत्पर होकर इस व्रत का पालन करूंगी। मेरा व्रत बिना किसी बाधा के पूर्ण हो जाए। मन में इन बातों को दोहराकर हाथ में 16 गांठें लगी एक डोरा बांधें। इसके बाद एक साफ जगह पर देवी लक्ष्मी की उस प्रतिमा को स्थापित करें, जिसमें वह हाथी पर विराजमान हों। अब मां के समक्ष शुद्ध घी का दीपक जलाएं और पूजा आरंभ करते हुए माता को फूल अर्पित करें, चंदन, अबीर, गुलाल, दूर्वा, लाल सूत, सुपारी, नारियल आदि चीजें भी चढ़ाएं। अब देवी लक्ष्मी के साथ-साथ हाथी की भी पूजा करें। अंत में भोग लगाएं और मां की आरती करें। पूजा संपन्न होने पर प्रसाद ग्रहण करें।

- मिताली जैन

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