मोक्षदा एकादशी व्रत करने से पूर्वजों को भी मिलता है इसका पुण्य फल

By कमल सिंघी | Publish Date: Dec 17 2018 5:29PM
मोक्षदा एकादशी व्रत करने से पूर्वजों को भी मिलता है इसका पुण्य फल
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मोक्षदा एकादशी को लेकर ऐसी भी मान्यता है कि इस दिन तुलसी की मंजरी, धूप, दीप, नैवेद्य आदि से भगवान दामोदर का पूजन करने, उपवास रखने व रात्रि में जागरण कर श्री हरि का कीर्तन करने से महापाप का भी नाश हो जाता है।

हर दिन एवं व्रत का अपना अलग महत्व है। एक ऐसा ही व्रत है मोक्षदा एकादशी जिसका हिंदू धर्म में विशेष महत्व बताया गया है। वैसे तो सभी एकादशियां पुण्यदायी मानी जाती हैं किंतु इसके महत्व को सदैव ही श्रेष्ठ स्थान प्रदान किया जाता है। यदि मनुष्य अनजाने में हुई अपनी भूलों का प्रायश्चित करना चाहता है तो उसे इस दिन के महत्व को समझते हुए यह व्रत अवश्य ही धारण करना चाहिए। एक वर्ष में अधिकमास को मिलाकर 26 एकादशियां आती हैं। लेकिन कुछ एकादशियां बहुत खास होती हैं। इन्हीं में एक होती है मोक्षदा। मार्गशीर्ष मास की शुक्ल एकादशी का नाम मोक्षदा एकादशी। इसके बारे में कहा जाता है कि मोक्षदा एकादशी व्रत की खासियत यह है कि यही वो दिन है जब भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र की धरा पर मानव जीवन को नई दिशा देने वाली गीता का उपदेश दिया था।




एकादशी की प्रचलित कथा
 
इस दिन को लेकर एक कथा भी प्रचलित है। कहा जाता है कि गोकुल नगर में वैखानस नामक राजा राज करता था उनके राज में प्रजा अत्यंत सुखी थी, किंतु एक दिन उनके स्वप्न आया कि उनके पिता नरक में बहुत कष्ट भोग रहे हैं, उनके पूर्व कर्मों की वजह से उनके साथ ऐसा हो रहा है। यह जानकर उनको बहुत ही दुख हुआ। उन्हें इसका मतलब समझ नहीं आया, अंत में उन्होंने ब्राह्मणों को बुलावा भेजा और उनसे इसका मतलब पूछा तब उन्हें ज्ञात हुआ कि उनके पिता के बिगड़े हुए कर्मों की वजह से उनके साथ ऐसा हो रहा है। ब्राह्मणों ने राजा को मोक्षदा एकादशी के व्रत के बारे में बताया, राजा ने उसे धारण किया जिसके फलस्वरूप उनके पिता को नरक के कष्टों से मुक्ति मिली। नरक के कष्टों से मुक्ति पाकर राजा के पिता ने उन्हें आशीर्वाद दिया जिसके फलस्वरूप उनके राज्य में और अधिक समृद्धि आ गई।


 



पूर्वजों को भी मिलता है इसका पुण्य फल
 
इस व्रत की कथा, पूजन करने से वाजपेयी यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है। मोक्षदा एकादशी को लेकर ऐसी भी मान्यता है कि इस दिन तुलसी की मंजरी, धूप, दीप, नैवेद्य आदि से भगवान दामोदर का पूजन करने, उपवास रखने व रात्रि में जागरण कर श्री हरि का कीर्तन करने से महापाप का भी नाश हो जाता है। कहा जाता है कि इस व्रत का फल पूर्वजों को भी प्राप्त होता है। इसलिए मनुष्यों के लिए यह अत्यंत ही पुण्यकारी बताया गया है। यह एकादशी मुक्तिदायिनी तो है ही साथ ही इसे समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली भी माना जाता है।
 
-कमल सिंघी

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