ट्रंप ने दिया मौका, भारत के गहरे दोस्त देश में घुसने की तैयारी में चीन, अपना Airspace अचानक इस बड़े प्लान के लिए किया बंद?

40 दिन तक के लिए ऐसा करना किसी बड़े पैमाने पर युद्धाभ्यास या नई मिसाइल तकनीक के परीक्षण की ओर भी इशारा करता है। वहीं मीडिया रिपोर्ट्स यह भी बता रहे हैं कि ताइवान के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय ने भी कुछ ऐसी हरकतें देखी हैं जिससे चीन पर अविश्वास बढ़ गया है।
दुनिया अभी ईरान, इजराइल और अमेरिका के जंग की गवाह बनी हुई है। इस युद्ध को एक महीना से ज्यादा बीत चुका है। लेकिन कहीं से राहत की कोई अच्छी खबर नहीं आ रही। इस बीच चीन ने चौंकाते हुए बिना कोई वजह बताए 40 दिनों के लिए समुद्र के ऊपर के हवाई क्षेत्र के एक बड़े हिस्से को बंद कर दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या चीन ने मिडिल ईस्ट का फायदा उठाकर ताइवान को घेरने की तैयारी कर ली है? ताइवान पर कब्जा करने की तैयारी कर ली है। क्योंकि बता दें कि अचानक 40 दिनों के लिए चाइना ने अपना एयर स्पेस बंद करने का ऐलान किया है। ताइवान के पास युद्धपोत देखे गए हैं और बिना किसी ऐलान के यह सैन्य हलचल हो रही है। क्या यह सिर्फ एक अभ्यास है या फिर किसी बड़े एक्शन की तैयारी। सबसे बड़ा अलार्म जो है वो यह है कि चीन ने समुद्र के ऊपर एक बड़े हिस्से का एयर स्पेस लगभग 40 दिनों के लिए बंद करने का ऐलान कर दिया है और यह कोई सामान्य बात नहीं है। आमतौर पर बता दें कि एक से 3 दिन के छोटे अभ्यास होते हैं। लेकिन 40 दिन ये सीधे-सीधे इशारा करता है बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास या फिर नई मिसाइल या फिर वॉर टेक्नोलॉजी टेस्ट का और यह नोटम जो है यानी कि नोटिस टू एयर मिशनंस के जरिए जारी किया गया है जो पायलट्स को खतरे की चेतावनी देता है।
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40 दिनों के लिए अपना एयर स्पेस बंद किया
रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान युद्ध के बीच चीन ने 27 मार्च से 6 मई तक 40 दिनों के लिए अपना एयर स्पेस बंद किया है। यह इलाका ताइवान से भी बड़ा है और शंघाई के उत्तर दक्षिण में फैला हुआ है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या चीन का यह कदम ताइवान पर कब्जे की चीन की कोई कोशिश तो नहीं है? एक अमेरिकी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक चीन का यह कदम असामान्य लग रहा है। आमतौर पर एयर शो या छोटे अभ्यासों के लिए एक से तीन दिन के लिए एयर स्पेस को ब्लॉक रखा जाता है। लेकिन 40 दिन तक के लिए ऐसा करना किसी बड़े पैमाने पर युद्धाभ्यास या नई मिसाइल तकनीक के परीक्षण की ओर भी इशारा करता है। वहीं मीडिया रिपोर्ट्स यह भी बता रहे हैं कि ताइवान के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय ने भी कुछ ऐसी हरकतें देखी हैं जिससे चीन पर अविश्वास बढ़ गया है।
अमेरिका के लिए आई नई मुश्किल
रिपोर्ट्स के मुताबिक ताइवान के रक्षा मंत्रालय को स्थानीय समय अनुसार सोमवार सुबह 6:00 बजे तक अपने क्षेत्रीय जल के आसपास चीन के तीन फाइटर जेट्स, छह नौसैनिक जहाजों और दो सरकारी जहाजों के आने की जानकारी भी मिली। हालांकि बीजिंग ने इस इलाके में किसी भी तरह के योद्धाभ्यास के ऐलान का जिक्र नहीं किया है। जिससे अनिश्चितता और बढ़ गई है। वहीं इसे अमेरिका के लिए एक नई मुश्किल भी माना जा रहा है। चीन का एयर स्पेस बंद होने से जासूसी विमान और मिलिट्री फ्लाइट्स प्रभावित हो सकते हैं। यह सब तब हो रहा है जब अमेरिका ईरान से भीड़ों में लगा हुआ है। चीन के इस कदम से अमेरिकी सेना को अब एशिया में भी नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। जितना अनिश्चित
डॉनल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका हो चुका है, उससे कई गुना ज्यादा अनिश्चित चीन पहले से है। शी चिनफिंग ने इस संशय को और बढ़ाया है। फिर भी बहुत कुछ ईरान युद्ध के परिणामों पर निर्भर करेगा। और ईरान में क्या होगा, अभी कुछ कहना मुश्किल है, पर इतना साफ है कि इस युद्ध ने अमेरिका को पश्चिम एशिया में इस कदर फंसा दिया है, जिससे हिंद महासागर अशांत है और इंडो-पैसिफिक में एक वैक्यूम बनता दिख रहा है। स्वाभाविक है कि चीन इसका लाभ उठाने की कोशिश करेगा।
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ताइवान को अपना हिस्सा मानता है चीन
ताइवान को अपना हिस्सा मानता है। जबकि ताइवान खुद को अलग देश की तरह चलाता है। और यह विवाद बता दें चाइना और ताइवान का यह नया नहीं है। 1949 यानी कि 1949 से दोनों के रास्ते अलग हुए। लेकिन चीन का लक्ष्य कभी नहीं बदला। रीयनिफिकेशन यानी ताइवान को अपने साथ जोड़ना। रिपोर्ट्स यह कहती है कि चीन 2027 तक इस मिशन को पूरा करना चाहता है। और अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या चीन युद्ध की तैयारी कर रहा है? संकेत काफी खतरनाक है। एयर स्पेस को ब्लॉक कर देना, नेवी की तैनाती एयरफोर्स एक्टिव बिना घोषणा के मूवमेंट्स हुई जा रही है। एक्सपर्ट्स यह मानते हैं कि यह जॉइंट ऑपरेशन ड्रिल हो सकती है। जहां एयर, नेवी और मिसाइल फोर्स एक साथ काम कर रहे हो। यानी असल युद्ध से पहले की रिहर्सल। सबसे बड़ी बात जो है वो इसकी टाइमिंग है। जब दुनिया का ध्यान मिडिल ईस्ट पर है। अमेरिका ईरान में उलझा हुआ है और तभी चीन ने यह कदम उठाया है। यानी डिस्ट्रैक्शन का फायदा चाइना यहां पर उठाना चाहता है। और अब चुपचाप पोजीशन मजबूत करना भी उसका लक्ष्य है। तो क्या चीन सच में ताइवान को घेरने की तैयारी में है या यह सिर्फ दबाव बनाने की एक रणनीति चाइना ने अपनाई है।
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ताइवान के अंदरूनी मतभेद का फायदा उठाने की कोशिश
राजनीतिक विभाजन ताइवान में भी है, जिसका फायदा चीन उठा सकता है। ताइवान में सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी को चीन अलगाववादी मानता है, जबकि विपक्षी कुओमिंतांग के साथ बेहतर संबंधों की चाह रखता है। हालांकि माओ त्से तुंग की सारी लड़ाई कुओमिंतांग से थी। समय दुश्मन और दोस्त की मनोदशा बदल देता है। अगर चुनाव में कुओमिंतांग सत्ता पाती है तो तनाव कम हो सकता है, लेकिन यदि डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी जीतती है तो जोखिम बढ़ेगा। 2027 में अमेरिका और ताइवान में चुनाव होंगे, जबकि चिनफिंग अपने चौथे कार्यकाल के अंत की ओर खिसक रहे होंगे। 79 वर्ष की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते वह ताइवान मुद्दे पर निर्णायक कदम उठाने के लिए अधीर हो सकते हैं। हां, यह प्रश्न तब भी प्रासंगिक हो सकता है कि क्या चीन के पास ताइवान पर सफल आक्रमण करने की क्षमता है? चीन में भी सब कुछ अच्छा नहीं है। हाल ही में उन 5 शीर्ष जनरलों को हटा दिया गया, जो 2022 में ही नियुक्त किए थे।
बहरहाल, एक अमेरिकी पत्रिका में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ताइवान को अपनी लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए चीन के बढ़ते खतरे के बीच सेल्फ डिटरेंस यानी आत्मनिरोधक क्षमता विकसित करनी होगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह रणनीति सैन्य आक्रामकता बढ़ाने की नहींबल्कि संभावित हमले की लागत इतनी बढ़ाने की है कि चीन कम्युनिस्ट पार्टी के लिए ताइवान पर हमला करना बेहद महंगा और जोखिम भरा हो जाए। देखना होगा कि चीन ने जो अपना एयर स्पेस बंद किया है वो किस मकसद से किया है और जल्द ही चीन के इस कदम का खुलासा भी हो जाएगा।
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