Pakistan की गीदड़ भभकी पर West Bengal की सियासत भड़की, चूहे को शेर बताकर किसको डराना चाहती हैं Mamata Banerjee?

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हम आपको बता दें कि ख्वाजा आसिफ ने पिछले सप्ताह सियालकोट में मीडिया से बातचीत के दौरान यह दावा किया था कि भविष्य में भारत के साथ होने वाला कोई भी संघर्ष सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा और पाकिस्तान कोलकाता जैसे बड़े शहरों को भी निशाना बना सकता है।

भारत के खिलाफ जहर उगलने के आदी पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने जब कोलकाता को निशाना बनाने की धमकी दी तो यह उनकी बौखलाहट का खुला प्रदर्शन था, लेकिन हैरानी इससे भी ज्यादा इस बात पर है कि भारत के भीतर कुछ नेता इस खोखली धमकी को लेकर हंगामा खड़ा कर रहे हैं। जिसे बार-बार उसकी हर हरकत पर मुंहतोड़ जवाब मिला हो, जिसे उसकी गुस्ताखियों की सजा उसके घर में घुसकर दी गई हो, उसकी गीदड़ भभकी पर तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का शोर मचाना न केवल हास्यास्पद है बल्कि चिंताजनक भी है। देखा जाये तो यह एक कमजोर और बेअसर खतरे को बढ़ा चढ़ाकर पेश करने और चूहे को शेर बताकर लोगों में डर पैदा करने की कोशिश से ज्यादा कुछ नहीं है।

हम आपको बता दें कि ख्वाजा आसिफ ने पिछले सप्ताह सियालकोट में मीडिया से बातचीत के दौरान यह दावा किया था कि भविष्य में भारत के साथ होने वाला कोई भी संघर्ष सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा और पाकिस्तान कोलकाता जैसे बड़े शहरों को भी निशाना बना सकता है। देखा जाये तो पाकिस्तान की इस ताजा धमकी को भारत में गंभीरता से कम और हास्य के रूप में अधिक लिया जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की सैन्य क्षमता, तकनीक और खुफिया तंत्र पाकिस्तान से कहीं अधिक मजबूत है, ऐसे में इस तरह की बयानबाजी केवल मानसिक दबाव बनाने का असफल प्रयास है।

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लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दिलचस्प पहलू देश के भीतर की राजनीति बन गई है। तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला और तीखी भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने यह तक कह दिया कि उनकी सरकार आने पर दुश्मनों को उनके घर में घुसकर जवाब दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी प्रधानमंत्री से सवाल किया कि उन्होंने इस धमकी पर प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी?

दूसरी ओर, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि पाकिस्तान की किसी भी दुस्साहसिक हरकत का जवाब अभूतपूर्व और निर्णायक होगा। उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत अपनी सुरक्षा को लेकर किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करेगा। राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के बयान पर कहा, "पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने जो बयान दिया है उसके बारे में इतना कहूंगा कि उन्हें ये नहीं भूलना चाहिए कि 55 साल पहले 1971 में पाकिस्तान ने एक बार बंगाल की तरफ नजर उठाने की कोशिश की थी तो पाकिस्तान के दो टुकड़े हो गए एक पाकिस्तान और दूसरा बांग्लादेश बन गया। इस बार यदि बंगाल की तरफ नजर उठाने की कोशिश की तो उसका क्या परिणाम होगा ये भविष्य में पता चल जाएगा।"

अब यह समझना जरूरी है कि पाकिस्तान ने खास तौर पर कोलकाता का नाम क्यों लिया? देखा जाये तो इसके पीछे कई रणनीतिक कारण छिपे हो सकते हैं। एक तो पाकिस्तान यह संदेश देना चाहता है कि वह केवल सीमा क्षेत्रों तक सीमित नहीं है बल्कि भारत के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंचने का दावा करता है। कोलकाता जैसे ऐतिहासिक और प्रमुख शहर का नाम लेकर वह मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। साथ ही पाकिस्तान जानता है चूंकि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं तो ऐसे में वहां की राजधानी का नाम लेना तुरंत ही सुर्खियों में ला सकता है।

इसके अलावा, पश्चिम बंगाल की राजनीति में पहले से ही सीमा और घुसपैठ के मुद्दे गर्म रहते हैं। ऐसे में कोलकाता का नाम लेकर पाकिस्तान अप्रत्यक्ष रूप से भारत के आंतरिक राजनीतिक माहौल को प्रभावित करने की कोशिश करना चाह रहा है। साथ ही, यह एक रणनीतिक भ्रम पैदा करने की चाल भी हो सकती है। जब खतरे को कई दिशाओं में दिखाया जाता है तो विरोधी देश को अपनी सैन्य तैयारी को व्यापक स्तर पर फैलाना पड़ता है। पाकिस्तान संभवतः भारत की रणनीतिक एकाग्रता को बांटने की कोशिश कर रहा है।

इसके अलावा, पाकिस्तान के घरेलू हालात भी इस बयानबाजी के पीछे एक बड़ा कारण हैं। आर्थिक संकट, आंतरिक अस्थिरता और पश्चिमी सीमाओं पर तनाव के बीच वहां की सरकार भारत विरोधी बयान देकर अपने नागरिकों का ध्यान भटकाने की कोशिश करती है। पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुक्त अब्दुल बासित जैसे लोगों के बयान भी इसी मानसिकता को दर्शाते हैं, जिनमें भारत के बड़े शहरों को निशाना बनाने की बात कही गई है। यह सब मिलकर एक मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा प्रतीत होता है।

देखा जाये तो यह स्पष्ट है कि पाकिस्तान की यह धमकी उसकी कमजोरी और हताशा का प्रतीक है। भारत आज न केवल सैन्य बल्कि कूटनीतिक और आर्थिक रूप से भी मजबूत स्थिति में है। ऐसे में इस तरह की गीदड़ भभकियां केवल शोर से अधिक कुछ नहीं हैं। भारत की नीति स्पष्ट है कि किसी भी आक्रामकता का जवाब उसी की भाषा में दिया जाएगा। और इतिहास गवाह है कि जब जब पाकिस्तान ने सीमा लांघने की कोशिश की है, उसे मुंहतोड़ जवाब मिला है।

(इस लेख में लेखक के अपने विचार हैं।)
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