नरक चतुर्दशी शुद्धता तथा सम्पन्नता का होती है कारक

Narak Chaturdashi
नरक चतुर्दशी से कथा भी बहुत रूचिकर है। पौराणिक कथाओं के अनुसार नरक चतुर्दशी के दिन ही भगवान श्री कृष्ण ने राक्षस नरकासुर का मारा था। साथ ही नरक चतुर्दशी के दिन ही भगवान विष्णु ने राजा बलि को भी वामन अवतार रूप में प्रकट होकर आशीर्वाद दिया था।

आज है नरक चतुर्दशी, इसे नरक चौदस, नर्का पूजा या छोटी दीपावली भी कहा जाता है। इस दिन घर की सफाई कर दिया जलाने का खास महत्व है।

नरक चतुर्दशी के बारे में विशेष जानकारी

नरक चतुर्दशी कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। इस दिन घर में खूब सफाई की जाती है तथा तेल लगाकर चिचिड़ी की पत्तियों को पानी में डालकर स्नान किया जाता है। पंडितों की मान्यता है कि इस तरह स्नान करने से सभी तरह से पापों से मुक्ति मिलती है तथा यम का सामना नहीं करना पड़ता है।

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नरक चतुर्दशी से जुड़ी कथा पौराणिक कथा

नरक चतुर्दशी से कथा भी बहुत रूचिकर है। पौराणिक कथाओं के अनुसार नरक चतुर्दशी के दिन ही भगवान श्री कृष्ण ने राक्षस नरकासुर का मारा था। साथ ही नरक चतुर्दशी के दिन ही भगवान विष्णु ने राजा बलि को भी वामन अवतार रूप में प्रकट होकर आशीर्वाद दिया था। नरक चतुर्दशी की एक कथा धर्मात्मा राजा रन्तिदेव से भी सम्बन्धित है। राजा रन्तिदेव बहुत दयालु थे और उन्होंने सदैव धर्म अनुसार राज्य किया, लेकिन एक दिन उनके द्वार से एक गरीब आदमी भोजन न मिलने से भूखा ही लौट गया।

लेकिन राजा को इस बात का पता भी नहीं चला। इसके कुछ सालों बाद जब राजा की मृत्यु हुई उनके पास यमदूत खडे़ हो गए। राजा चौंक गए और उन्होंने यमदूत से पूछा कि मैंने जीवन में कोई पाप तो नहीं किया है फिर आप क्यों आ गए? इस पर यमदूत ने कहा कि एक बार अनजाने में एक गरीब आदमी आपके यहां से भूखा लौट गया था। राजा बहुत तपस्वी प्रवृत्ति के थे। उन्होंने यमदूत से एक साल का समय मांगा। ऋषियों से सलाह लेकर उन्होंने नरक चतुर्दशी का व्रत किया और भूख लोगों को भोजन कराकर अपने अपराधों के लिए माफी मांगी। इसके बाद राजा पापमुक्त होकर विष्णु लोक को चले गए। 

ऐसे मनाएं नरक चतुर्दशी

दीपावली से पहले नरक चतुर्दशी का खास महत्व है इसलिए इस विधिवत मनाएं। इसके लिए शरीर में तिल के तेल आदि का उबटन लगाएं। इसके बाद हल से उखाड़ी गयी मिट्टी का ढेला सिर के ऊपर बार-बार घुमाएं। वैसे तो कार्तिक मास में तेल लगाना निषेध होता है लेकिन नरक चतुर्दशी के दिन तेल लगाकर स्नान करें। नहाते समय वरुण देवता को स्मरण करते हुए मंत्र जाप करें और नहाएं। नहाते समय ध्यान रखें कि नहाने के पानी में हल्दी और कुमकुम जरूर डालें।

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नरक चतुर्दशी का महत्व

हिन्दू धर्म में नरक चतुर्दशी का खास महत्व है और इसे मुक्ति देने वाला पर्व माना जाता है। इसी दिन श्रीकृष्ण ने नरकासुर नाम के राक्षस का वध किया था इसलिए इस चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन सूर्योदय से पहले उठने से मनुष्य को यमलोक का दर्शन नहीं करना पड़ता है। 

नरक चतुर्दशी पर क्यों जलाते हैं दीए

ऐसी मान्यता है कि सभी प्रकार के नरक से मुक्त कराने का कार्य यम करते हैं। इसलिए, नरक चतुर्दशी की रात को यम के नाम का दीया जलाया जाता है। साथ ही घर से निकाल कर एक दीए को कूड़े के ढेर पर भी रखा जाता है। कूड़े के ढेर पर दीया रखने से आशय घर से गंदगी को हटाना है।

नरक चतुर्दशी पर स्नान की है विशेष महत्ता 

सूर्योदय से पहले उठकर स्नान का खास महत्व है। ऐसी मान्यता है इससे रूप में निखार आ जाता है। इस स्नान के लिए कार्तिक अहोई अष्टमी के दिन एक तांबे के लौटे में जल भरकर रखा जाता है और उसे स्नान के जल में मिलाकर स्नान किया जाता है। पंडितों का मानना है कि ऐसा करने से नरक के भय से मुक्ति मिलती है। स्नान के दौरान तिल के तेल से मालिश कर औधषीय पौधा अपामार्ग अर्थात चिरचिरा को सिर के ऊपर से चारों ओर तीन बार घुमाने का प्रचलन है। स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर हाथ जोड़कर यमराज से प्रार्थना करें। ऐसा करने से पापों का नाश हो जाता है।

- प्रज्ञा पाण्डेय

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