90 के दशक की शिव और आस्था के प्यार की अनोखी दास्तां है 'मलाल'

By रेनू तिवारी | Publish Date: Jul 5 2019 7:21PM
90 के दशक की शिव और आस्था के प्यार की अनोखी दास्तां है 'मलाल'
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फिल्म 90 के दशक की प्रेम कहानी पर आधारित है। फिल्म मलाल एक मधुर प्रेम की याद दिलाती है जब हाथ से लिखे नोट्स वास्तव में महत्व रखते थे और यहीं इस तरह के क्षण फिल्म में दिखाए गये है जो फिल्म को अलग बनाती है।

फिल्मकार संजय लीला भंसाली की फिल्म मलाल आज सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। इस फिल्म से जावेद जाफरी के बेटे मीजान जाफरी और भंसाली की भानजी शर्मिन सहगल ने बॉलीवुड में डेब्यू किया। इस फिल्म का निर्देशन मंगेश हडावले ने किया है लेकिन इस फिल्म के निर्माता संजय लीला भंसाली हैं। ये फिल्म 90 के दशक की प्रेम कहानी पर आधारित है। फिल्म मलाल एक मधुर प्रेम की याद दिलाती है जब हाथ से लिखे नोट्स वास्तव में महत्व रखते थे और यहीं इस तरह के क्षण फिल्म में दिखाए गये है जो फिल्म को अलग बनाती है।

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फिल्म मलाल की कहानी
बड़े पर्दे पर 90 के दशक में ऐसी कई फिल्में आयी थी जिसमें प्यार के बीच अमीरी-गरीबी के लंबे फासले आ जाते थे। उसी तर्ज पर फिल्म मलाल में भी दिखाया गया है कि एक लड़का टपोरी और बदमाश की तरह मुंबई की एक चौल में रहता है। जिसका नाम शिवा (मीजान जाफरी) है। शिवा एकदम चौल के दादा के स्टाइल में रहता है जिसे देख कर फिल्म तेजाब के मुन्ना की याद आ जाती है। एक दिन उसके घर के पड़ोस में अचानक नये पड़ोसी रहने के लिए आते है। शिवा को पड़ोस में रहने चौधरी परिवार की बेटी आस्था से प्यार हो जाता है। शिवा ठहरा चॉल में पला-बढ़ा गुंडई करनेवाला लड़का और आस्था कभी अमीर खानदान की बेटी थी। घाटा लगने के चलते चौधरी परिवार को चौल में आना पड़ा। इसी बैकग्राउंड को फिल्म में प्यार का दुश्मन बनाया गया है। अब दोनों के प्यार का क्या होता है क्या ये दोनों एक हो पाएंगे इसके लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।


 
फिल्म मलाल पर रिव्यू
मंगेश हडावले निर्देशन में बनी फिल्म  की कहानी 90 के दशक की दिखाई गई है, जिसमें प्यार करने वालो की दुनिया में रोमांस की बातें खतों में भी हुआ करती थी। फिल्म में समय को दिखाने के लिए फिल्म के बैकग्राउंड में 'टाइटैनिक' और 'हम दिल दे चुके सनम' जैसी फिल्मों के पोस्टर भी लगाए गये है। फिल्म में चौल में रहने वालों की जिंदगी को काफी नजदीकी से दिखाया गया है। फिल्म में महाराष्ट्र में आनेवाले उत्तर भारतीयों के मुद्दे पर भी ध्यान आकर्षित करवाया है। किस तरह एक समय में उत्तर भारतीयों के साथ व्यवहार किया जाता था। फिल्म का फर्स्ट हाफ काफी मनोरंजक है लेकिन सेकंड हाफ नें फिल्म बोर करने लगती है। 
कलाकार
फिल्म की जान मीजान और शारमिन है। मीजान ने अपने डेब्यू में मराठी मुलगे के किरदार को दिल से निभाया है और वो अपने किरदार की लोगों के जहन में छाप छोड़ने में कामयाब भी रहे हैं। मीजान फिल्म में ऐक्शन, इमोशन, डांस और रोमांस में अव्वल रहे हैं। फिल्म में एक साधारण लड़की का किरदार निभा रही शर्मिन सहगल खूबसूरत और मासूम लगी हैं। फिल्म में दोनों के अभिनय को देखकर आप यह कह सकते है कि मीजान और शर्मिन सहगल के रूप में इंडस्ट्री को दो फ्रेश प्रतिभावान चेहरे मिले हैं। फिल्म की सपॉर्टिंग कास्ट कहानी को मजबूती प्रदान करती है। 
 


कलाकार- मीजान, शर्मिन सहगल, समीर धर्माधिकारी 
निर्देशक- मंगेश हडावले
मूवी टाइप- Romance
अवधि- 2 घंटा 33 मिनट
रेटिंग 3***
 

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