अधूरे प्यार और बर्बादी की खूबसूरत कहानी है फिल्म कबीर सिंह

By रेनू तिवारी | Publish Date: Jun 21 2019 2:21PM
अधूरे प्यार और बर्बादी की खूबसूरत कहानी है फिल्म कबीर सिंह
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फिल्म कबीर सिंह में दिखाया गया है कि जब दो सच्चा प्यार करने वाले लोग जुदा होते हैं उन आशिकों का क्या होता है? प्यार के परवान पर चढ़ी लव स्टोरी का अगर दर्दनाक अंत हो तो एक आम लड़के लड़की को किस दौर का सामना करना पड़ता है उस वक्त की सच्चाई को फिल्म में उतारा गया है।

नयी दिल्ली। कहते है जहां प्यार होता है वहां कुछ मायने नहीं रखता। प्यार आबाद भी करता है और बर्बाद भी, प्यार दुनिया की सबसे खूबसूरत चीज है लेकिन अगर न मिले तो ये जिंदगी में तबाही मचा देती है। खुद को संभालना मुश्किल हो जाता है। प्यार में बर्बादी की कहानी है शाहिद की फिल्म कबीर सिंह। तेलुगू भाषा की फिल्म अर्जुन रेड्डी 2017 में संदीप रेड्डी बांगा ने बनाई थी। ये फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी। फिल्म कबीर सिंह, अर्जुन रेड्डी का हिंदी रीमेक है। इस फिल्म को भी निर्देशक संदीप रेड्डी बांगा ने ही बनाया है। 

फिल्म कबीर सिंह में दिखाया गया है कि जब दो सच्चा प्यार करने वाले लोग जुदा होते हैं उन आशिकों का क्या होता है? प्यार के परवान पर चढ़ी लव स्टोरी का अगर दर्दनाक अंत हो तो एक आम लड़के लड़की को किस दौर का सामना करना पड़ता है उस वक्त की सच्चाई को फिल्म में उतारा गया है।

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फिल्म की कहानी



कबीर राजवीर सिंह (शहिद कपूर) दिल्ली के आईआईएम मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई कर रहा है। कबीर टॉपर स्टूडेंट है। पढ़ाई में काफी बेहतर है लेकिन एक कमी है कि कबीर को गुस्सा बहुत आता। फिल्मों के हीरों की तरह ही कबीर सॉलिड स्टूडेंट है। लेकिन उसका गुस्सा ही उसकी कमजोरी है क्योंकि जब कबीर को गुस्सा आता है तो वो अपने गुस्से में किसी की जान भी ले सकता है। एक दिन कबीर के कॉलेज में एंट्री होती है प्रीति (कियारा आडवाणी) की। प्रीति कबीर की जूनियर होती है। एक दिन कबीर और प्रीति का आमना-सामना होता है और कबीर को प्रीति की सादगी से प्यार हो जाता है। कॉलेज में सभी को पता होता है कि प्रीति और कबीर प्यार में हैं। फिर कॉलेज खत्म होने के बाद कबीर पीजी करने के लिए दिल्ली से बाहर चला जाता है। कबीर से दूरी प्रीति को बर्दाश्त नहीं होती। प्रीति कबीर से मिलने चली जाती है। कहानी में मोड़ तब आता है जब कबीर पढ़ाई- लिखाई करते प्रीति का हाथ मांगने उनके घर जाता है जहां प्रीति के पापा उसे घर से निकाल देते हैं और प्रीति की शादी कहीं और कर देते है। इस सदमे से कबीर परेशान हो जाता है वो प्रीति को पाने की हर कोशिश कहता है नकामी मिलने पर कबीर खुद को किस तरह से बर्बाद करता है ये फिल्म में काफी दर्दनाक तरीके से दिखाया गया है। क्या कबीर को प्रीति मिलती है या नहीं, क्या वो बर्बादी की दुनिया से बाहर आता है? इसे जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।

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किरदारों की कलाकरी

परफॉर्मेंस देखी जाए तो हैदर और उड़ता पंजाब देखने के बाद ऐसा था कि शाहिद कपूर ही इस फिल्म के कबीर किरदार के लिए सही हैं, लेकिन फिल्म देखने के बाद ऐसा लगा कि शायद कोई और इस किरदार को शाहिद से अच्छा नहीं निभा सकता था। जिस तरह कबीर को गुस्सेवाला, जिद्दी, अड़ियल लड़का दिखाया गया है उस शाहित ने जबरदस्त तरीके से निभाया है। रोमांस और बर्बादी के मंजर में शाहिद ने खूद को डूबो दिया है। वहीं कियारा आडवाणी ने भी अपनी सादगी से लोगों का दिल जीत लिया। प्रीति के किरदार को कियारा ने काफी अच्छे से निभाया है। सपोर्टिंग रोल में कबीर के पिता बने एक्टर सुरेश ओबेरॉय, उसके भाई के रोल में अर्जन बाजवा, कॉलेज के डीन में रोल में आदिल हुसैन और बाकी एक्टर्स ने भी बढ़िया काम किया है।

कलाकार- शाहिद कपूर,कियारा आडवाणी, अर्जन बाजवा, कामिनी कौशल, सुरेश ओबेरॉय 



निर्देशक- संदीप रेड्डी वांगा

मूवी टाइप- Drama

अवधि- 2 घंटा 55 मिनट

रेटिंग- 3.5



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