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सबसे बड़ी बात यह है कि दोनों ही वर्दियां देश की सुरक्षा के लिए है। टकराव के लिए नहीं। जिस तरीके से ब्रिगेडियर ने संयम दिखाया उसने बहुत कुछ सिखाया। जब पहले जजों को भीड़ ने घेर लिया और अब सेना के अधिकारी को इस तरीके से सड़क पर रोका तो यह साफ संकेत है कि ग्राउंड लेवल पर बेहतर तालमेल और कंट्रोल की सख्त आवश्यकता भी है जरूरत भी है। लेकिन इस पूरे मामले में एक चीज तो बिल्कुल साफ दिखी कि पावर नहीं अनुशासन जीत गया। भारतीय सेना का यही चरित्र है। शांत रहकर भी सबसे मजबूत रहे।