आम Headache और Brain Cancer वाले सिरदर्द में क्या है फर्क? ये 5 Symptoms दिखें तो हो जाएं अलर्ट

सामान्य सिरदर्द को अक्सर तनाव समझा जाता है, लेकिन लगातार या सुबह के समय तेज होने वाला सिरदर्द ब्रेन ट्यूमर का शुरुआती संकेत हो सकता है। उल्टी, धुंधली दृष्टि या शरीर में असंतुलन जैसे अन्य लक्षण दिखने पर तत्काल न्यूरोसर्जन से सलाह लेना महत्वपूर्ण है, क्योंकि शीघ्र पहचान गंभीर बीमारी का सफल इलाज संभव बनाती है।
भागदौड़ भारी जिदंगी और गलत लाइफस्टाइल के कारण अक्सर सिरदर्द देखने को मिलता है। तनाव, नींद की कमी, स्क्रीन के ज्यादा इस्तेमाल या काम के दबाव को जिम्मेदार माना जाता है। ये सब सिरदर्द के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं। हर बार ऐसा हो, जरुरी नहीं है। एक्सपर्ट बताते हैं कि लगातार होने वाले या असामान्य सिरदर्द को हमेशा नजरअंदाज नहीं करें। कुछ मामलों में यह ब्रेन ट्यूमर का संकेत भी हो सकता है। नॉर्मल सिरदर्द और ब्रेन ट्यूमर की वजह से होने सिरदर्द में क्या अंतर होता है, इस लेख में हम आपको बताते हैं।
लगातार सिरदर्द बनें रहने से ब्रेन ट्यूमर का संकेत
- न्यूरोसर्जन ने बताया है कि ब्रेन ट्यूमर के कारण होने वाला सिरदर्द, नॉर्मल सिरदर्द से अलग होता है। ये धीरे-धीरे बढ़ता है और ये बहुत ज्यादा बार होता है। खासतौर पर सुबह के समय यह काफी तेज महसूस होता है।
- कई लोगों को सिरदर्द के साथ उल्टी, धुंधला नजर आना, वॉक करने में इंबैलेंस होना, दौरे, हाथ-पैरों में कमजोरी या याद रखने में मुश्किल होता है।
- ब्रेन ट्यूमर किसी भी आयु वर्ग के लोगों को प्रभावित कर सकता है और इसके सही इलाज के लिए इसके लक्षण जल्दी पता लग जाने चाहिए।
- सबसे बड़ी मुश्किल यहीं है कि इसके संकेत शुरुआत में समझ नहीं आते हैं और अक्सर इन्हें तनाव, माइग्रेन, साइनस की समस्या या थकान समझ लेते हैं, इसको पहचानने में काफी समय लगता है।
- डॉक्टर ने बताया है कि हफ्तों तक रहने वाला लगातार सिरदर्द, नींद से जगा देने वाला सिरदर्द, बार-बार उल्टी होना, कई बार दृष्टि में अचानक बदलाव देखने को मिलते हैं या नर्वस सिस्टम से संबंधित बदलावों की तुरंत जांच कराएं। एमआरआई स्कैन जैसे इमेजिंग परीक्षण शुरुआती दौर में पकड़ने में मदद करती है।
- कुछ सालों से ब्रेन ट्यूमर के इलाज के कई ऑप्शन हो गए हैं। ट्यूमर के प्रकार, आकार और स्थान के आधार पर उपचार में आमतौर पर सर्जरी में शामिल है। इसके अतिरिक्त रेडियोसर्जरी (जीकेआरएस/एसआरएस), विकिरण चिकित्सा, कीमोथेरेपी, टारगेट थेरेपी या और भी कोई तकनीकी से इसका इलाज किया जा सकता है। ऐसे में इससे घबराने की जरुरत नहीं है।
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