क्या आप भी हैं Sleep Debt के शिकार? जानिए सेहत पर इसके गंभीर Mental Health और शारीरिक प्रभाव

Sleep Debt
Unsplash

स्लीप डेट शरीर की आवश्यक नींद और वास्तव में ली गई नींद के बीच के अंतर का एक विश्लेषणात्मक परिणाम है जो शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचाता है। यह स्थिति न केवल मेटाबॉलिज्म और इम्यून सिस्टम को प्रभावित करती है बल्कि दीर्घकालिक संज्ञानात्मक समस्याओं का कारण भी बनती है। पर्याप्त विश्राम के बिना शरीर और मस्तिष्क की कार्यक्षमता में गिरावट स्वास्थ्य संकट की ओर इशारा करती है।

अक्सर हम सभी नींद को लेकर काफी परेशान रहते हैं। हर बार यही सोचते हैं कि 'इस वीकेंड हफ्ते भर की नींद पूरी करेंगे....' लेकिन ऐसा हो नहीं पता है। जब हमारा पूरा हफ्ता भागदौड़ में बीतता है और आखिर में हम यही सोच लेते हैं कि छुट्टी वाले दिन या वीकेंड पर नींद पूरी करके हम अपनी थकान दूर करेंगे, हालांकि ऐसा हो नहीं पाता है।

असल में आपके शरीर को जो रोजाना नींद चाहिए, वो उतनी मिल नहीं रही है जो कि हमारे शरीर के लिए काफी जरुरी होती है। जब आपकी नींद पूरी न हो, तो इसका असर आपके तन और मन पर साफ दिखाई देता है। नींद की कमी के पीछे कई कारण हो सकते हैं। अक्सर देखा जाता है कि बिजी शेड्यूल के चक्कर में नींद पूरी नहीं होती है।

ऐसे में 'स्लीप डेट' (Sleep Debt) या स्लीप डेफिसिट बढ़ जाता है। आखिर यह क्या है, इसके क्या लक्षण है और कैसे यह आपके पूरे शरीर और मन प्रभावित करता है, आइए आपको बताते हैं। 

Sleep Debt क्या होता है?

दरअसल, 'स्लीप डेट' तब होता है जब आपको नींद की जरुरत है और असल में आपको मिलने वाली नींद की मात्रा में अंतर होना। यह सब तब होता है जब आपकी नींद पूरी न हो, आप देर तक काम करते हैं, तनाव की वजह से सो नहीं पा रहे हैं या आपके सोने का कोई तय समय नहीं होता है। रोजाना एक या दो घंटे कम सोने से भी 'स्लीप डेट' हो सकता है और इसका आपकी सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। 

नींद की कमी के लक्षण

 - थकान होना

 - सुबह उठने में मुश्किल अधिक होना

 - दिन में बहुत ज्यादा नींद आना

 - ध्यान और फोकस की कमी

 - भूलने की आदत

 - सिरदर्द

 - चिड़चिड़ापन

शरीर पर बुरा असर डालती है नींद की कमी

अक्सर नींद की कमी से लोगों की शारीरिक और मानसिक सेहत खराब हो जाती है। नींद न आने (इंसोम्रिया) के चलते इम्यून सिस्टम का कमजोर होना, मेटाबॉलिज्म पर असर दिखना, वजन पर असर होना और बार-बार बीमार बनें रहने की समस्या देखी जाती हैं। वहीं, पर्याप्त नींद न लेने से आपकी याददाश्त, सीखने की क्षमता और ध्यान लगाने की शक्ति पर काफी असर देखने को मिलता है। 

इतना ही नहीं,  तनाव और बेचैनी महसूस होती है। नींद की भारी कमी होने पर आपको मेंटल हेल्थ जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।

रोजाना कितनी नींद है जरूरी?

डॉक्टर मानते हैं कि कम से कम रोजाना 8-9 घंटे की नींद लेना बहुत जरुरी है। वहीं आपकी स्लीप साइकिल तय होनी चाहिए। किसी भी तरह से पूरी नींद नहीं ले पा रहे हैं, तो आप इस बात का ध्यान दें। यदि आपको नींद आने में काफी दिक्कत होती है तो लाखों कोशिशों के बाद भी नींद नहीं आती है, तो डॉक्टर को जरुर दिखाएं।

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
All the updates here:

अन्य न्यूज़