डोभाल की बैठक में 11 देश शामिल, चीन-ईरान सबका लगा जमावड़ा

भारत और चीन के बीच के रिश्तों में अजीत डोभाल और वांग यी बहुत अहम भूमिका निभाते हैं। दोनों पक्ष की तरफ से यही दोनों वह व्यक्ति हैं जो बॉर्डर से जुड़े विवादों पर उच्च स्तरीय बातचीत करते हैं। ऐसे में उनका भी भारत आना बहुत अहम है। यह बैठक आज दुनिया के सामने मौजूद गैर पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों विषय पर केंद्रित है।
ब्रिक्स के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक चल रही है। यह बैठक बहुत अहम है। दो दिनों की इस बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल कर रहे हैं। इसमें समूह के 11 सदस्य देशों के सुरक्षा प्रमुख शामिल हो रहे हैं। इन देशों में भारत, ब्राजील, चीन, मिस्र, इथोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और यूएई भी शामिल है। यह बैठक बहुत खास है। यह मुलाकात ब्रिक्स की बैठक से इतों देशों ने मौजूदा हालात की समीक्षा की है। वेस्ट एशिया के क्षेत्र में जिस तरह की तनातनी है उन सबके बीच भारत और ईरान लगातार एक दूसरे के साथ कोऑपरेशन बनाए हुए हैं। ब्रिक्स प्लेटफार्म और उससे इधर भी दोनों देशों के रिश्तों की समीक्षा लगातार हो रही है और लगातार एक दूसरे के साथ सहयोग बढ़ाने का काम हो रहा है। इसके अलावा आपको चीन के एक बेहद अहम नेता वांग ई तस्वीरों में दिख रहे हैं। वह भी भारत पहुंचे हुए हैं। वह भी इस सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं।
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भारत और चीन के बीच के रिश्तों में अजीत डोभाल और वांग यी बहुत अहम भूमिका निभाते हैं। दोनों पक्ष की तरफ से यही दोनों वह व्यक्ति हैं जो बॉर्डर से जुड़े विवादों पर उच्च स्तरीय बातचीत करते हैं। ऐसे में उनका भी भारत आना बहुत अहम है। यह बैठक आज दुनिया के सामने मौजूद गैर पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों विषय पर केंद्रित है। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरों के तेजी से बदलते स्वरूप और उभरते सुरक्षा जोखिमों में नई तकनीक की भूमिका पर चर्चा की जाएगी। प्रतिनिधि साइबर सुरक्षा, डिजिटल कमजोर या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े खतरों पर विचार विमर्श कर रहे हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और प्रतिनिधि मंडल के प्रमुख आतंकवाद रोधी और सूचना और संचार तकनीकों के इस्तेमाल में सुरक्षा पर हाल ही में हुए ब्रिक्स संयुक्त कार्य समूहों की बैठक की नतीजा का भी समीक्षा कर रहे हैं। यह बैठक ऐसे वक्त में हो रही है जब भारत 2026 में चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है।
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इसके पहले भारत 2012, 2016, 2021 में इस समूह का नेतृत्व कर चुका है। भारत की अध्यक्षता, लचीलेपन, नवाचार, सहयोग, स्थिरता के लिए निर्माण यानी कि कई अहम विषयों के तहत हो रहा है जो 2025 के रियो शिखर सम्मेलन में पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा व्यक्त किए गए जन केंद्रित दृष्टिकोण को साफ तौर पर दिखा रहा है। अब ऐसे में यह मुलाकात और वो भी दो दिवसीय बैठक से क्या कुछ निकल कर सामने आता है वो देखना होगा।
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