सेना की टारगेट किलिंग का शिकार हुए 2 छात्र? बलूचों के खिलाफ पाक में चलाए जा रहे दमन चक्र के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज

सेना की टारगेट किलिंग का शिकार हुए 2 छात्र? बलूचों के खिलाफ पाक में चलाए जा रहे दमन चक्र के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज

लापता छात्रों को खोजने में अधिकारियों के विफल रहने के बाद बलूचिस्तान विश्वविद्यालय के छात्रों ने एक बार फिर विरोध तेज कर दिया है। द फ्राइडे टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा अपने साथी छात्रों - फसीह बलूच और सोहेल बलूच की सुरक्षित बरामदगी के लिए अपना विरोध प्रदर्शन शुरू किए दस दिन बीत चुके हैं।

बलूचिस्तान क्षेत्र में बलूच नागरिकों के लापता होने और प्रताड़ना का लंबा इतिहास रहा है। बलूचों के खिलाफ पाकिस्‍ताान में चलाए जा रहे दमन चक्र के खिलाफ लगातार आवाज उठती रहती है। लेकिन इस महीने की शुरुआत में विश्वविद्यालय परिसर से कथित रूप से अपहृत किए गए दो लापता छात्रों को खोजने में अधिकारियों के विफल रहने के बाद बलूचिस्तान विश्वविद्यालय के छात्रों ने एक बार फिर विरोध तेज कर दिया है। द फ्राइडे टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा अपने साथी छात्रों - फसीह बलूच और सोहेल बलूच की सुरक्षित बरामदगी के लिए अपना विरोध प्रदर्शन शुरू किए दस दिन बीत चुके हैं।

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इससे पहले अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों के साथ चर्चा की थी ताकि शैक्षिक गतिविधियां फिर से शुरू हो सकें लेकिन बातचीत विफल रही। 9 नवंबर को, छात्रों ने मामले में निष्क्रियता के विरोध में कैंपस के गेट बंद कर दिए थे और कक्षाओं और परीक्षाओं का बहिष्कार भी किया था। छात्रों के विरोध को देखते हुए सरकार ने आश्वासन दिया था कि 16 नवंबर तक लापता छात्रों को बरामद कर लिया जाएगा, जिसके बाद 13 नवंबर को आंदोलन रोक दिया गया था। पाकिस्तान की अखबार के रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने छात्रों की चिंताओं को दूर करने के लिए एक समिति भी बनाई, और इसके सदस्यों में से एक नसरुल्ला जराय, बलूचिस्तान एमपीए ने डॉन को पुष्टि की कि मुख्यमंत्री मीर अब्दुल कुदूस बिजेंजो को स्थिति के बारे में सूचित कर दिया गया।

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इससे पहले अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों के साथ चर्चा की थी ताकि शैक्षिक गतिविधियां फिर से शुरू हो सकें लेकिन बातचीत विफल रही। 9 नवंबर को, छात्रों ने मामले में निष्क्रियता के विरोध में कैंपस के गेट बंद कर दिए थे और कक्षाओं और परीक्षाओं का बहिष्कार भी किया था। छात्रों के विरोध को देखते हुए सरकार ने आश्वासन दिया था कि 16 नवंबर तक लापता छात्रों को बरामद कर लिया जाएगा, जिसके बाद 13 नवंबर को आंदोलन रोक दिया गया था। गौरतलब है कि हर वर्ष 13 नवंबर को बलूच शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन आजादी की मांग कर रहे बलूचों पर पाकिस्‍तान सरकार का कहर टूटा था। इसके बाद से ही बलूचों के गायब करने की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई थी। आजादी की मांग में कई बलूचों ने अपनी जान तक गंवा दी है।