भारत के बाद अफगानिस्तान को पुतिन का खास तोहफा, गदगद हुआ तालिबान!

रूस की सबसे बड़ी फार्मा एजेंसियों में से एक फार्मा सिंटेज ने अब अफगानिस्तान का हाथ थाम लिया है। लेकिन इस खबर का सबसे बड़ा धमाका सुनिए। इस रूसी कंपनी को चलाने वाले आदमी भारतीय मूल के एक जांबाज कारोबारी हैं।
आज काबुल की धरती से एक ऐसी खबर सामने आई जिसने पूरे दक्षिण एशिया की राजनीति में भूचाल ला दिया। जब पूरी दुनिया ने अफगानिस्तान को एक जलता हुआ घर समझकर अपने दरवाजे बंद कर दिए तब दो पुराने यारों ने यानी भारत और रूस ने तय कर लिया कि वो इस मुल्क को पाकिस्तान की साजिशों की आग में जलने नहीं देंगे। एक तरफ भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने ऐलान किया कि भारत का एक विशाल विमान 20 टन क्रिटिकल मेडिकल सप्लाई लेकर काबुल में उतर चुका है। तो वहीं दूसरी तरफ रूस की दिग्गज कंपनी फार्मा सिंटेज ने अफगानिस्तान के साथ दवाइयों का महा समझौता महा डील कर ली है। हम उस कूटनीतिक सर्जिकल स्ट्राइक की बात करेंगे जो बिना गोली चलाए इस्लामाबाद के घमंड को चकनाचूर कर चुकी है। जब पूरी दुनिया ने अफगानिस्तान को उसके हाल पर छोड़ दिया था तब दिल्ली और मॉस्को ने तय किया कि वे इस मुल्क को यानी अफगानिस्तान को पाकिस्तान की साजिशों की आग में नहीं जलने देंगे। रूस की सबसे बड़ी फार्मा एजेंसियों में से एक फार्मा सिंटेज ने अब अफगानिस्तान का हाथ थाम लिया है। लेकिन इस खबर का सबसे बड़ा धमाका सुनिए। इस रूसी कंपनी को चलाने वाले आदमी भारतीय मूल के एक जांबाज कारोबारी हैं।
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सोचिए रूस की तकनीक और भारतीय दिमाग जब यह दोनों मिलेंगे तो पाकिस्तान का पत्ता कटना तय था। रूस अब अफगानिस्तान को वो सब देगा जिसके लिए वो पहले पाकिस्तान का मोहताजदा इंसुलिन, एंटीबायोटिक्स, हार्ट और कैंसर की दवाइयां सब कुछ। और जब अफगानिस्तान ने पाकिस्तानी आयात पर बैन लगाया तो शहबाज शरीफ को लगा कि काबुल घुटने पर आ जाएगा। लेकिन रूस और भारत ने मिलकर पाकिस्तान के इस ब्लैकमेल वाले प्लान को मिट्टी में मिला दिया। अब काबुल के अस्पतालों में जो दवाइयां चलेंगी उन पर या तो भारत का तिरंगा लहरा रहा होगा या फिर रूस का ट्राई कलर। इतिहास गवाह है। दोस्त वही जो अंधेरे में हाथ थाम ले और भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक ट्वीट के जरिए दुनिया के बड़े-बड़े रणनीतकारों को नक्शा खोलने पर मजबूर कर दिया। काबुल एयरपोर्ट पर जब भारत का विमान उतरा तो वह सिर्फ लोहा और इंजन नहीं था। वो अफगानिस्तान के करोड़ों माता-पिता की उम्मीद थी। 20 टन क्रिटिकल मेडिकल सप्लाई थी और यह महज दवाइयां नहीं है दोस्तों। यह पाकिस्तान के उस घमंड पर सबसे बड़ी चोट थी जो सोचता था कि अफगानिस्तान उसके बिना सांस भी नहीं ले सकता है। इसमें बीसीजी, टिटनेस और डिप्थीरिया जैसे जानलेवा रोगों के टीों का कच्चा माल शामिल है।
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भारत ने साफ कर दिया और कह दिया कि मोर कंसाइनमेंट्स आर अंडरवे। यानी मतलब यह तो बस ट्रेलर है। पूरी पिक्चर अभी बाकी है। पाकिस्तान के लिए संदेश मैसेज साफ है कि तुम नफरत भेजो हम जिंदगी भेजेंगे। काबुल का इंदिरा गांधी चिल्ड्रन हॉस्पिटल आज भी वहां की सबसे बड़ी उम्मीद है जिसे भारत ने अपने खून पसीने से सवारा है अफगानिस्तान में। रूस का इस मिशन में भारत के साथ जुड़ना पाकिस्तान के लिए कॉफिन में आखिरी कील जैसा है। अब अफगानिस्तान को अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए डूरन लाइन पार करने की जरूरत नहीं होगी। भारत और रूस ने मिलकर पाकिस्तान के उस ब्लैकमेलिंग कार्ड को ही जला कर रख दिया है।
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