America-Iran की जंग में फंसा Iraq, Trump की वॉर्निंग के बाद राष्ट्रपति चुनाव फिर स्थगित

ट्रंप ने अल-मलिकी का विरोध करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, जब पिछली बार मलिकी सत्ता में थे, तब देश गरीबी और पूरी तरह अराजकता में चला गया था। ऐसा दोबारा नहीं होने दिया जाना चाहिए।
इराक की संसद ने देश के नए राष्ट्रपति के चुनाव को फिर टाल दिया है। संसद के मीडिया ऑफिस ने कहा कि स्पीकर अब राजनीतिक दलों और गठबंधनों के नेताओं से मुलाकात कर चुनाव की आखिरी तारीख तय करेंगे। यह दूसरी बार है जब संसद ने राष्ट्रपति चुनाव को स्थगित किया है। इससे पहले यह मतदान पिछले हफ्ते होना था। इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि प्रमुख राष्ट्रपति दावेदार अल मलिकी को चुना गया तो अमेरिका इराक को मिलने वाली मदद बंद कर देगा। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को इराक को आगाह किया कि अगर उसके पूर्व प्रधानमंत्री नूरी अल-मलिकी फिर से सत्ता में आते हैं, तो अमेरिका देश का समर्थन नहीं करेगा। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब कुछ दिन पहले ‘कोऑर्डिनेशन फ्रेमवर्क’ नाम के प्रमुख राजनीतिक गठबंधन ने नूरी अल-मलिकी का समर्थन करने की घोषणा की थी। इस गठबंधन में प्रमुख शिया दल भी शामिल हैं। अमेरिकी प्रशासन नूरी अल-मलिकी को ईरान का करीबी मानता है।
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ट्रंप ने अल-मलिकी का विरोध करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, जब पिछली बार मलिकी सत्ता में थे, तब देश गरीबी और पूरी तरह अराजकता में चला गया था। ऐसा दोबारा नहीं होने दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा उनकी गलत नीतियों और विचारधाराओं के कारण अगर वे चुने जाते हैं, तो अमेरिका इराक की मदद नहीं करेगा और अगर अमेरिका मदद के लिए वहां नहीं होगा, तो इराक के पास सफलता, समृद्धि या आजादी की कोई संभावना नहीं होगी।’ पश्चिम एशिया में स्थिति लगातार तनावपूर्ण होती जा रही है और ट्रंप ईरान पर नए हमले करने पर विचार कर रहे हैं। अमेरिका द्वारा 2003 में सद्दाम हुसैन को सत्ता से हटाए जाने के बाद से ईरान इराक की सरकार में गहरा प्रभाव बनाए हुए है।
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सांप्रदायिक संतुलन अहम
इराक की सत्ता में परपरागत रूप से प्रमुख पदों का बंटवारा सांप्रदायिक संतुलन के आधार पर होता है। आम तौर पर शक्तिशाली प्रधानमंत्री पद शिया मुस्लिम के पास होता है, संसद अध्यक्ष सुन्नी समुदाय से होता है, जबकि आमतौर पर राष्ट्रपति का औपचारिक पद कुर्द समुदाय को दिया जाता है।
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