‘डिजिटल हमशक्ल’ भविष्य में हमारे व्यवहार का अनुमान लगाएंगे

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डिजिटल हमशक्ल भविष्य का अनुमान लगाने वाले विशेषज्ञों की एक और कल्पना हो सकती है। लेकिन इसके सच होने की संभावना उससे कहीं अधिक है, जितना लोग विश्वास करना चाहेंगे

(जॉर्डन रिचर्ड शॉनहर, सहायक प्रोफेसर, मनोविज्ञान, कॉनकॉर्डिया विश्वविद्यालय) मॉन्ट्रियल (कनाडा)| एक ‘डिजिटल हमशक्ल’ किसी व्यक्ति, उत्पाद या प्रक्रिया की उस नकल को कहते हैं, जिसे डाटा की मदद से तैयार किया जाता है।

सुनने में यह भले ही कोई विज्ञान-फंतासी लगती हो, लेकिन कुछ लोगों ने दावा किया है कि अगले कुछ दशकों में संभवत: हमारा एक डिजिटल हमशक्ल होगा। एक व्यक्ति की नकल के रूप में डिजिटल हमशक्ल आदर्श रूप से वही फैसले लेगा, जो हम समान परिस्थितियों में लेते हैं।

डिजिटल हमशक्ल भविष्य का अनुमान लगाने वाले विशेषज्ञों की एक और कल्पना हो सकती है। लेकिन इसके सच होने की संभावना उससे कहीं अधिक है, जितना लोग विश्वास करना चाहेंगे

। हम भले ही यह मान सकते हैं कि हम विशेष और अद्वितीय हैं, लेकिन पर्याप्त जानकारी के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) हमारे व्यक्तित्व, सामाजिक व्यवहार और खरीदारी से जुड़े फैसलों के बारे में कई सटीक अनुमान लगा सकती है। ‘

बिग डाटा’ युग का मतलब है कि इंटरनेट पर हमारे द्वारा किए गए व्यवहार के साथ-साथ हमारे खुले विचारों और वरीयताओं के बारे में बड़ी मात्रा में जानकारी (जिसे ‘डाटा लेक’ कहते हैं) एकत्रित की जाती है। वर्ष 2019 में वॉल्ट डिजनी कंपनी ने हुलु का अधिग्रहण किया था।

हुलु एक ऐसी कंपनी है, जिसके बारे में पत्रकारों और कार्यकर्ताओं ने दावा किया था कि डाटा जुटाने के मामले में उसका रिकॉर्ड संदिग्ध है।

यह भी संभव है कि कॉफी ऑर्डर करने के लिए इस्तेमाल में लाए जाने वाले साधारण स्मार्टफोन एप्लिकेशन बड़े पैमाने पर उपयोगकर्ताओं से जुड़ी जानकारी जुटाते हों।

कैंब्रिज एनालिटिक घोटाला इन चिंताओं की पुष्टि करता है। उपयोगकर्ता और नियामक किसी व्यक्ति द्वारा लोगों के व्यवहार की पहचान करने, उसका अंदाजा लगाने और उसमें बदलाव लाने की संभावनाओं को लेकर फिक्रमंद हैं। लेकिन, हमें कितना चिंतित होना चाहिए?

उच्च बनाम निम्न ‘निष्ठा’ -अनुसंधानों में ‘निष्ठा’ का अर्थ यह होता है कि कोई नकल या मॉडल अपने लक्ष्य से किस हद तक मेल खाती है।

यानी ‘अनुकारक निष्ठा’ से तात्पर्य समानता के उस स्तर से है, जो एक नकल और वास्तविक दुनिया के संदर्भ के बीच पाई जाती है।

मिसाल के तौर पर जब रेसिंग से जुड़ा वीडियो गेम खेलते समय हम रफ्तार बढ़ाने और घटाने के लिए कीबोर्ड या कंट्रोलर पर मौजूद कोई बटन दबाते हैं तो संबंधित गेम हमारी छवि के बारे में बताता है। वहीं, एक वाहन में हमारा व्यवहार बयां करने के लिए विंड स्क्रीन, चेसिस, गियर स्टिक और गैस एवं ब्रेक पेडल जैसे अनुकारक होते हैं।

एक डिजिटल हमशक्ल को उच्च स्तर की निष्ठा की जरूरत होती है, जो वास्तविक समय में वास्तविक दुनिया की जानकारी एकत्रित करने में सक्षम होगी। उद्योग में डिजिटल हमशक्ल के आमूल-चूल प्रभाव हो सकते हैं।

अगर हम इंसानों और मशीनों के बीच संवाद को लेकर कोई मॉडल तैयार करने में सफल हो जाते हैं तो हमें संसाधनों को आवंटित करने, कमी एवं खराबी का अनुमान लगाने और भविष्य का आकलन करने की क्षमता हासिल हो जाएगी। किसी इंसान का डिजिटल हमशक्ल उसकी प्राथमिकताओं, पूर्वाग्रहों और व्यवहार से जुड़ा डाटा बड़ी मात्रा में जुटाएगा।

यह भविष्यवाणियां करने के लिए उपयोगकर्ता के तत्कालिक भौतिक एवं सामाजिक वातावरण के बारे में जानकारी हासिल करने में सक्षम होगा।

उपरोक्त बातों को ध्यान में रखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि सही मायने में डिजिटल हमशक्ल हासिल करना निकट भविष्य में संभव नहीं है। दरअसल, डाटा जुटाने के लिए आवश्यक सेंसर और उपयोगकर्ता के डिजिटल हमशक्ल को बनाने रखने के लिए जरूरी संसाधनों की संख्या काफी अधिक होगी। 

यही वजह है कि मौजूदा समय में डेवलपर निम्न निष्ठा वाले मॉडल का इस्तेमाल कर रहे हैं। नैतिकता से जुड़े मुद्दे -डिजिटल हमशक्ल का निर्माण डाटा की अखंडता, मॉडल द्वारा की जाने वाली भविष्यवाणी की सटीकता, डिजिटल हमशक्ल को बनाने और अद्यतन करने के लिए आवश्यक निगरानी क्षमता एवं स्वामित्व तथा संबंधित मॉडल तक पहुंच से जुड़े सामाजिक ए‍वं नैतिक मुद्दों को जन्म देता है। हमें डाटा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आधारित किसी भी दावे के प्रति आलोचनात्मक होना चाहिए, क्योंकि डिजाइन से जुड़े निर्णय हमारे लिए उपलब्ध नहीं हैं।

हमें समझना चाहिए कि डाटा कैसे एकत्रित, संसाधित, इस्तेमाल और प्रस्तुत किया गया था। शक्ति असंतुलन -डाटा, गोपनीयता और निगरानी के संबंध में शक्ति असंतुलन से जुड़ा मुद्दा जनता के बीच चर्चा का विषय है।

छोटे पैमाने पर यह डिजिटल खाई पैदा कर सकता है या फिर बढ़ा सकता है। डिजिटल खाई उन लोगों के बीच के अंतर को कहते हैं, जिन्हें डिजिटल तकनीक तक पहुंच हासिल है और या नहीं हासिल है। बड़े पैमाने पर यह सूचना और प्रौद्योगिकी तक पहुंच एवं नियंत्रण को लेकर एक नए उपनिवेशवाद के जन्म का खतरा बढ़ाता है।

यहां तक ​​​​कि कम निष्ठा वाले डिजिटल हमशक्ल का निर्माण भी उपयोगकर्ताओं की निगरानी करने, उनके व्यवहार के बारे में अनुमान लगाने, उन्हें प्रभावित करने का प्रयास करने और दूसरों को उनका प्रतिनिधित्व करने के अवसर प्रदान करता है।

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