Gulf Countries से 20,000 से अधिक Pakistanis का निष्कासन, Security कारणों से Saudi Arabia ने दिखाई सख्ती

काउंसिल में बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। मंत्रालय ने बताया कि डिपोर्टेशन की कार्रवाई सुरक्षा कारणों, तय समय से ज़्यादा रुकने, गैर-कानूनी तरीके से घुसने, भीख मांगने, ड्रग्स से जुड़े अपराधों, शरण की मांग खारिज होने और नकली या गलत कागजात होने जैसे कारणों से की गई।
पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में गुरुवार को पेश किए गए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 1 मार्च से 13 जुलाई के बीच 20,000 से ज़्यादा पाकिस्तानी नागरिकों को खाड़ी देशों (मुख्य रूप से सऊदी अरब और UAE) से सुरक्षा चिंताओं और अन्य वजहों से वापस भेज दिया गया। नारकोटिक्स कंट्रोल मिनिस्ट्री के आंकड़ों में यह भी बताया गया है कि ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के दौरान, कई पाकिस्तानियों को अपने शहरों में ईरानी हमलों से जुड़े वीडियो और अन्य सामग्री शूट करने या अपलोड करने के आरोप में हिरासत में लिया गया या वापस भेज दिया गया। इन आंकड़ों में छह देशों वाले 'गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल' (GCC) से डिपोर्ट किए गए लोगों की जानकारी शामिल है। इस काउंसिल में बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। मंत्रालय ने बताया कि डिपोर्टेशन की कार्रवाई सुरक्षा कारणों, तय समय से ज़्यादा रुकने, गैर-कानूनी तरीके से घुसने, भीख मांगने, ड्रग्स से जुड़े अपराधों, शरण की मांग खारिज होने और नकली या गलत कागजात होने जैसे कारणों से की गई।
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आंकड़ों के मुताबिक, 4,628 भगोड़ों को डिपोर्ट किया गया। इसके अलावा, 1,294 कैदियों, 968 ब्लैकलिस्ट किए गए लोगों, पासपोर्ट खोने से जुड़े मामलों में 1,155 लोगों, वीज़ा नियमों के उल्लंघन के लिए 689 पाकिस्तानियों और देश में एंट्री न मिलने वाले 342 लोगों को भी खाड़ी देशों से वापस भेजा गया। 6,000 से ज़्यादा डिपोर्टेशन मामलों को "अन्य" (Others) की श्रेणी में रखा गया, जिनके बारे में मंत्रालय ने कोई और जानकारी नहीं दी। आंकड़ों के मुताबिक, सबसे ज़्यादा लोगों को सऊदी अरब से वापस भेजा गया (15,500), इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (3,803), ओमान (1,606), बहरीन (521), कतर (429) और कुवैत (97) का नंबर आता है। संसदीय मामलों के मंत्री डॉ. तारिक फज़ल चौधरी ने गुरुवार को पूरक सवालों का जवाब देते हुए कहा कि इन आंकड़ों में सिर्फ़ वे लोग शामिल हैं जिन्हें संबंधित देशों के अधिकारियों ने औपचारिक रूप से हिरासत में लिया था और पाकिस्तानी मिशनों द्वारा आपातकालीन यात्रा दस्तावेज़ जारी किए जाने के बाद उन्हें वापस भेज दिया गया था। उन्होंने कहा कि अपनी मर्ज़ी से लौटने वाले या वैध पासपोर्ट पर वापस आने वाले पाकिस्तानियों को इसमें शामिल नहीं किया गया था।
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मंत्रालय के आंकड़ों में यह भी बताया गया है कि ईरानी हमले से जुड़े वीडियो और सामग्री को फ़िल्माने या अपलोड करने के बाद कई पाकिस्तानियों को हिरासत में लिया गया या वापस भेज दिया गया। 'डॉन' की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च में बहरीन ने देश में ईरानी हमलों के असर से जुड़े वीडियो फ़िल्माने, प्रकाशित करने और दोबारा पोस्ट करने के आरोप में छह लोगों को गिरफ़्तार करने की घोषणा की थी, जिनमें पांच पाकिस्तानी शामिल थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि संघर्ष के दौरान कुछ खाड़ी देशों में शिया समुदाय के लोगों को ज़्यादा कड़ी जांच-पड़ताल का सामना करना पड़ा।
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