अंग्रेजी बोल रहे थे जर्मनी के लोग, पुतिन ने हड़काया, क्यों चौंक गया भारत!

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अभिनय आकाश । Apr 8 2026 11:18AM

अपनी भाषा पर शर्मिंदा होना या उसे छोड़ देना एक पतन की निशानी है। भारत में अंग्रेजी को सफलता का एक पैमाना माना जाने लगा है। जॉब इंटरव्यू में आप अंग्रेजी नहीं बोल पाए तो आपको हीन भावना से देखा जाता है।

रूस और जर्मनी को लेकर एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरे यूरोप में बवाल मचा दिया है। आपने शायद ध्यान ना दिया हो लेकिन ईरान अमेरिका जंग ने जर्मनी को निहत्ते ही रूस के सामने धकेल दिया है। रूस के डर से जर्मनी ने एक ऐसा कानून पास किया है जिसके तहत 17 से 45 साल के जर्मन लोगों को अगर 3 महीने से ज्यादा विदेश जाना है तो जर्मनी के लोगों को अपनी सरकार और सेना से परमिशन लेनी होगी। ऐसा क्यों किया गया है वह आपको आगे बताएंगे। लेकिन उससे पहले देखिए कि कुछ समय पहले कैसे पुतिन ने जर्मनी के कुछ बिजनेसमैन को अंग्रेजी बोलने के लिए हड़का दिया। पुतिन ने कहा कि आप जर्मनी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। आपको जर्मन बोलनी चाहिए। आप मुझसे अंग्रेजी में सवाल क्यों पूछ रहे हैं? आपको अपनी संप्रभुता के बारे में भी सोचना चाहिए। अपनी भाषा पर गर्व, शक्ति और पहचान का प्रतीक होता है। 

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अपनी भाषा पर शर्मिंदा होना या उसे छोड़ देना एक पतन की निशानी है। भारत में अंग्रेजी को सफलता का एक पैमाना माना जाने लगा है। जॉब इंटरव्यू में आप अंग्रेजी नहीं बोल पाए तो आपको हीन भावना से देखा जाता है। किसी पार्टी इवेंट या फंक्शन में अगर आप खुद का परिचय अंग्रेजी में नहीं दे पाए तो आपका मजाक बना दिया जाता है। भारत में आजकल अंग्रेजी को तरक्की से जोड़कर देखा जा रहा है। जबकि रूस, चीन और जापान जैसे देशों के लोग अपनी भाषा बोलने में नहीं शर्माते। ऐसे में सवाल है कि क्या इन देशों में तरक्की नहीं हो रही? अंग्रेजी सीखना या बोलना गलत बात नहीं है। लेकिन उसके लिए हिंदी को छोटा समझना बेहद गलत है। बहरहाल आप पुतिन का यह बयान सुनिए। उसके बाद इससे भी धमाकेदार खबर बताएंगे। आप जर्मनी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। आपको जर्मन बोलना चाहिए। आप मुझसे अंग्रेजी में सवाल क्यों पूछ रहे हैं? अपनी संप्रभुता के बारे में सोचिए। 

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चलिए अब आते हैं जर्मनी के उस होश उड़ा देने वाले ऐलान पर जिसने यूरोप में हड़कंप मचा दिया है। दरअसल जर्मनी ने ऐलान किया है कि 17 से 45 साल की उम्र के जितने भी लोग हैं वो अगर 3 महीने से ज्यादा समय के लिए विदेश जाते हैं तो उन्हें सरकार और सेना से अनुमति लेनी होगी। इसके अलावा जर्मनी में 2008 के बाद पैदा हुए लोगों को एक सर्वे फॉर्म भरना होगा। इसमें पूछा जाएगा कि क्या आप अपनी इच्छा के अनुसार सेना के लिए काम करना चाहेंगे? जर्मन सरकार के इस फैसले ने जर्मनी के लोगों को हिलाकर रख दिया है। आपको बता दें कि यह सब कुछ इसलिए किया जा रहा है क्योंकि जर्मनी की सेना इस वक्त बुरे हाल में है। जर्मनी को खतरा है कि ट्रंप की वजह से नाटो टूटने की कगार पर है। अगर नाटो टूट गया तो रूस सबसे पहले यूरोप में जर्मनी पर ही हमला करेगा। जर्मनी को जीतने का मतलब है पूरे यूरोप को जीतना। मजे की बात देखिए कि इस वक्त जर्मनी के पास सिर्फ 1,84,000 सैनिक ही हैं। जबकि रूस के पास 13 लाख सैनिक हैं। जर्मनी के पास सिर्फ 300 एयरक्राफ्ट हैं। रूस के पास 4000 एयरक्राफ्ट हैं। ऐसे खतरे के बीच जर्मनी चाहता है कि वह जल्द से जल्द अपने सैनिकों की संख्या को बढ़ा ले। 

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