Prabhasakshi NewsRoom: शाही Palace से दुनिया की सबसे कुख्यात Prison तक ऐसे पहुँचे Nicolas Maduro

Nicolas Maduro
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बताया गया है कि यह ऑपरेशन कई महीनों की तैयारी का नतीजा था। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने मादुरो की गतिविधियों, ठिकानों और सुरक्षा व्यवस्था की बारीकी से निगरानी की। जैसे ही अवसर मिला, अमेरिकी विशेष बलों ने तेज और निर्णायक हमला किया।

अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करने के लिए जो सुनियोजित और गुप्त सैन्य अभियान चलाया था उसकी पूरी जानकारी अब सामने आ गयी है। हम आपको बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लगातार निगरानी में चली यह कार्रवाई आधी रात के बाद राजधानी कराकास में की गई थी, जब अमेरिकी विशेष बलों ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति भवन और उसके आसपास के सुरक्षित इलाकों को चारों ओर से घेर लिया था। हेलीकॉप्टरों की गूंज, विस्फोटों की आवाज और भारी हथियारों से लैस अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी ने कुछ ही घंटों में सत्ता का संतुलन बदल दिया था और पैलेस जैसे राष्ट्रपति भवन के बेडरूम से सीधे मादुरो प्रिजन में पहुँच गये थे।

बताया गया है कि यह ऑपरेशन कई महीनों की तैयारी का नतीजा था। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने मादुरो की गतिविधियों, ठिकानों और सुरक्षा व्यवस्था की बारीकी से निगरानी की थी। जैसे ही अवसर मिला, अमेरिकी विशेष बलों ने तेज और निर्णायक हमला किया। मादुरो की सुरक्षा में तैनात कई जवान मारे गए और कुछ ने आत्मसमर्पण कर दिया। गिरफ्तारी के बाद मादुरो को तुरंत अमेरिका ले जाया गया और न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन स्थित एक कुख्यात जेल में बंद कर दिया गया।

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हम आपको बता दें कि निकोलस मादुरो को पकड़ने के लिए अमेरिका ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। समुद्र में युद्धपोत, आकाश में लड़ाकू विमान और जमीन पर विशेष बल। यह किसी फिल्मी कहानी जैसा नहीं बल्कि एक सख्त संदेश था। संदेश यह कि अगर कोई देश अमेरिकी नीति के खिलाफ चला, तो उसकी सत्ता को रात के अंधेरे में गिराया जा सकता है। देखा जाये तो यह ऑपरेशन अचानक नहीं हुआ। वर्षों से वेनेजुएला को आर्थिक प्रतिबंधों से जकड़ा गया। उसके तेल व्यापार पर शिकंजा कसा गया। जनता को भुखमरी के कगार पर धकेला गया। फिर जब देश कमजोर हुआ, तब सैन्य हथौड़ा चला दिया गया। इसे रणनीति कहते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि यह आर्थिक घेराबंदी के बाद किया गया सीधा सैन्य हस्तक्षेप है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस अभियान के बारे में जानकारी देते हुए कहा है, "मुझे संभावित खतरे के बारे में पता था, यह बहुत खतरनाक ऑपरेशन था। हमारे कुछ लोग घायल हुए, लेकिन अभी सभी ठीक हैं।'' उन्होंने कहा, ''एक हेलीकॉप्टर को काफी नुकसान हुआ, लेकिन हम सब कुछ वापस ले आए और कोई मारा नहीं गया।'' ट्रंप ने कहा कि मुझसे यह मत पूछिए कि कौन इंचार्ज है क्योंकि मैं आपको जवाब दूंगा और यह बहुत विवादित होगा।'' ट्रंप ने कहा, ''हम इंचार्ज हैं'"

हम आपको यह भी बता दें कि निकोलस मादुरो को अमेरिका की जिस जेल में रखा गया है वह इस समय पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बनी हुई है। ब्रुकलिन की यह जेल कोई साधारण सुधार गृह नहीं है। यह एक ऐसी जगह है जहां अंधेरा, गंदगी और डर स्थायी निवासी हैं। वर्षों से यह जेल अमानवीय हालात, ठंडे सेल, खराब भोजन और कैदियों के मानसिक टूटन के लिए बदनाम रही है। इसे हेलहोल कहा जाता है और यह नाम यूं ही नहीं पड़ा। यह वही जेल है जहां कैदी महीनों तक सूरज नहीं देखते। जहां रोशनी भी सजा की तरह लगती है। जहां बीमारी, अवसाद और अकेलापन धीरे धीरे इंसान को तोड़ देता है। किसी राष्ट्रपति को वहां रखना मानसिक दबाव और सार्वजनिक अपमान का हथियार भी है। यह जेल 1990 के दशक में शुरू हुई थी। यहाँ हिंसा, आत्महत्या और इनामी कैदियों के बीच झगड़े के कई मामले सामने आए हैं और पिछले कुछ वर्षों में कई कैदियों ने आत्महत्या की है। 

बहरहाल, अमेरिका यह जानता है कि तस्वीरें और सुर्खियां राजनीति का सबसे बड़ा हथियार होती हैं। एक राष्ट्रपति हथकड़ियों में, एक कुख्यात जेल में। इससे बड़ा संदेश क्या हो सकता है। यह दुनिया को डराने की रणनीति है। यह बताने की कोशिश है कि सत्ता कितनी भी बड़ी हो, अमेरिका के सामने टिक नहीं सकती।

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