India-Nordic Summit से यूरोप में बढ़ेगी भारत की धाक, PM Modi की Oslo यात्रा के क्या हैं मायने?

शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और पांच नॉर्डिक देशों के उनके समकक्ष, जिनमें आइसलैंड की प्रधानमंत्री क्रिस्ट्रुन फ्रॉस्टडॉटिर, नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर, स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन, फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो और डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन शामिल हैं, एक साथ आ रहे हैं। ये नेता मिलकर रणनीतिक द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे।
हाई लेवल डिप्लोमैटिक और इकोनॉमिक रिलेशन में एक नए चैप्टर का आागाज करते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार (स्थानीय समय) को ओस्लो में तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के आयोजन स्थल पर पहुंचे, जिससे उत्तरी यूरोप में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम उठाने की नींव रखी गई। स्वीडन में अपने द्विपक्षीय सम्मेलनों को पूरा करने के बाद, प्रधानमंत्री मोदी सोमवार को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो पहुंचे थे। प्रधानमंत्री की उपस्थिति उनके चार देशों के यूरोपीय दौरे के अगले महत्वपूर्ण चरण को दर्शाती है। यह उच्च स्तरीय वार्ता कूटनीति में एक ऐतिहासिक अध्याय खोलती है, जो 1983 में इंदिरा गांधी की यात्रा के बाद 43 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की स्कैंडिनेवियाई देश की पहली यात्रा है।
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शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और पांच नॉर्डिक देशों के उनके समकक्ष, जिनमें आइसलैंड की प्रधानमंत्री क्रिस्ट्रुन फ्रॉस्टडॉटिर, नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर, स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन, फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो और डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन शामिल हैं, एक साथ आ रहे हैं। ये नेता मिलकर रणनीतिक द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे। इन उच्च स्तरीय वार्ताओं का उद्देश्य सीमा पार वाणिज्यिक संबंधों, तकनीकी संयुक्त उद्यमों और निवेश पोर्टफोलियो को मजबूत करते हुए तात्कालिक आर्थिक और अंतर्राष्ट्रीय चुनौतियों का समाधान करना है।
यह राजनयिक प्रयास मंच के पिछले संस्करणों का एक महत्वपूर्ण अनुवर्ती कदम है, जिसकी शुरुआत 2018 में स्वीडन के स्टॉकहोम में हुए पहले शिखर सम्मेलन से हुई थी, जिसके बाद 2022 में डेनमार्क के कोपेनहेगन में दूसरा संस्करण आयोजित किया गया था।
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इस यात्रा के आर्थिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा से नॉर्डिक देशों के साथ भारत के द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों को गति मिलेगी और भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) और भारत-ईएफटीए टीईपीए (भारत और आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड के बीच व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता) के बाद मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण में मदद मिलेगी।"
इस शिखर सम्मेलन में व्यापक, बहुक्षेत्रीय वार्ताएं होंगी, जहां पांचों नॉर्डिक देशों के नेता भारत के साथ व्यापार, प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा, रक्षा और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इन विस्तृत चर्चाओं से पूरे क्षेत्र में सतत आर्थिक सुरक्षा के निर्माण के प्रति साझा प्रतिबद्धता उजागर होती है।
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