UNSC में भारत का वार, 9 11 के साजिशकर्ता गुफाओं में नहीं बल्कि आबादी में छिपे थे

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि 11 सितंबर 2001 के हमलों के साजिशकर्ता किसी दूरदराज के इलाके के बजाय आबादी वाले शहरों में शरण लिए हुए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि ओसामा बिन लादेन और खालिद शेख मोहम्मद जैसे आतंकियों को पाकिस्तान के शहरों से पकड़ा या मारा गया था। भारत ने चिंता जताई कि लश्कर और जैश जैसे आतंकी गिरोहों को भी इसी तरह का सुरक्षित माहौल मिल रहा है।
(योषिता सिंह) संयुक्त राष्ट्र, 17 सितंबर भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि 11 सितंबर 2001 को हुए हमलों के “साजिशकर्ता” किसी “गुफा या दूरदराज के इलाकों” में नहीं छिपे थे बल्कि लंबे समय तक कानून की पकड़ से बचते रहे थे। भारत ने कहा कि ऐसा ही “अनुकूल माहौल” लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकवादी संगठनों को अब भी मदद पहुंचा रहा है। भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में 11 सितंबर 2001 के हमलों के इतिहास का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि अल-कायदा के आतंकी ओसामा बिन लादेन और खालिद शेख मोहम्मद को अंततः दूरदराज के ठिकानों के बजाय आबादी वाले इलाकों से पकड़ा गया था। पर्वतनेनी ने बुधवार को कहा, “11 सितंबर को हुए हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक अभियान का समर्थन किया। हालांकि, हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि अल-कायदा के आतंकवादी तंत्र ने अपने सहयोगी संगठनों के जरिए अफगानिस्तान से बाहर भी रणनीतिक आधार तैयार किया था।” अफगानिस्तान की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए पर्वतनेनी ने अल-कायदा के उन आतंकियों के नाम गिनाए, जिन्होंने 11 सितंबर 2001 के हमलों की साजिश रची और उन्हें अंजाम दिया था तथा जिन्हें पाकिस्तान के शहरों से पकड़ा गया था।
पर्वतनेनी ने कहा, “अल-कायदा के वे आतंकी जिन्होंने 11 सितंबर 2001 हमलों की साजिश रची और उन्हें अंजाम दिया, किसी गैर शासित सीमावर्ती इलाके के जंगलों में छिपकर नहीं बैठे थे।” भारतीय राजदूत ने कहा कि साजिश को अंजाम देने और उसे वित्तीय मदद देने वाले ओसामा बिन लादेन का “ऑपरेशन नेप्च्यून स्पीयर” के तहत पता लगाया गया तथा उसे एक सुरक्षित परिसर में मार गिराया गया, जो एक आबादी वाले व सुरक्षा घेरे वाले इलाके में स्थित था। उन्होंने कहा कि इस अभियान का “मुख्य साजिशकर्ता” मोहम्मद एक सामान्य मकान में छिपा था। कई अपहरणकर्ताओं को चुनकर उन्हें तैयार करने में मदद करने वाले अल-कायदा के खूंखार आतंकी वलीद बिन अत्ताश को भी अलग से पकड़ा गया था।
उन्होंने कहा कि 11 सितंबर 2001 को हुए हमले की साजिश में अहम वित्तीय और रसद सहायता देने वाले मुस्तफा अहमद अल-हौसावी को भी इसी तरह पकड़ा गया था। पर्वतनेनी ने कहा, “ये सभी आतंकी किसी गुफा या दूरदराज के इलाकों में छिपे हुए भगोड़े नहीं थे, बल्कि ऐसे लोग थे जो लंबे समय तक कानून की पकड़ से बचते रहे। मानवता के शत्रु ऐसे राक्षसों को पनपने का माहौल देने वाली इस व्यवस्था को खत्म करना महत्वपूर्ण है।” उन्होंने यह टिप्पणी परोक्ष रूप से पाकिस्तान का जिक्र करते हुए की।
पर्वतनेनी ने कहा, “जिस तरह का अनुकूल माहौल 11 सितंबर के साजिशकर्ताओं को संरक्षण देता था, उसी ने बाद के वर्षों में भी अल-कायदा से जुड़े संगठनों जैसे लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद तथा ऐसे अन्य आंतकी समूहों को जगह, समर्थन व दंड से मुक्ति उपलब्ध कराई है। ये संगठन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध व्यवस्था से बचने के लिए अलग-अलग पहचान अपनाते रहे हैं और उनके आका तथा आतंकवादी प्रशिक्षण ढांचे को किसी परिणाम का सामना नहीं करना पड़ा।” उन्होंने कहा, “अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस तरह की स्थिति से निपटने के लिए मिलकर काम करना चाहिए, ताकि ऐसे और लोग किसी देश या उसके नागरिकों पर थोपे न जाएं तथा कोई भी व्यक्ति अपने परिवार या प्रियजनों को न खोए।” पिछले सप्ताह, अल-कायदा द्वारा 11 सितंबर 2001 को किये गये आतंकवादी हमले के 25 साल पूरे हो गये। इस दौरान पाकिस्तान सहित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने लोअर मैनहट्टन स्थित स्मारक का दौरा किया।
बिन लादेन को 2011 में पाकिस्तान के एबटाबाद शहर में पकड़ा गया था और मार गिराया गया था जबकि मोहम्मद को मार्च 2003 में रावलपिंडी से गिरफ्तार किया गया था। वह वर्तमान में ग्वांतानामो बे में हिरासत में है।
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