Israel Iran War: ईरान ने मार गिराए 500 अमेरिकी सैनिक, क्या बोले ट्रंप?

अमेरिका का एक और सिर्फ एक मकसद ये है कि फिलहाल शॉर्ट टर्म में ईरान बातचीत के लिए तैयार हो जाए और कमजोरी से बातचीत करे। अमेरिका जो ये अभी काइनेटिक और नॉन काइनेटिक साइकोलॉजिकल वॉरफेयर कर रहा है असल में इसका मकसद ये है कि ईरान की जो लीडरशिप है वो थोड़ा नरम पड़ जाए और जब बातचीत हो तो अमेरिका की जो टर्म्स एंड कंडीशन है उनको आसानी से मान ले।
ईरान के साथ युद्ध पर ट्रंप का बयान आया है। पूरी ताकत के साथ ईरान पर हमले जारी हैं। यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है। मकसद पूरा होने तक यह हमले जारी रहेंगे। यह भी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है। साथ ही तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत की बात को उन्होंने माना है। हालांकि ईरान का दावा 500 से ज्यादा के आंकड़े का है। ऐसे में अभी वो कह रहे हैं कि तीन अमेरिकी सैनिक ही मारे गए हैं। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा है कि पूरी ताकत के साथ हमले जारी हैं और मकसद जब तक पूरा नहीं होता तक ये हमले लगातार जारी रहेंगे। अमेरिका ने पहले जो हमला किया गया था उसमें परमाणु ठिकानों को ध्वस्त कर दिया गया। अमेरिका का एक और सिर्फ एक मकसद ये है कि फिलहाल शॉर्ट टर्म में ईरान बातचीत के लिए तैयार हो जाए और कमजोरी से बातचीत करे। अमेरिका जो ये अभी काइनेटिक और नॉन काइनेटिक साइकोलॉजिकल वॉरफेयर कर रहा है असल में इसका मकसद ये है कि ईरान की जो लीडरशिप है वो थोड़ा नरम पड़ जाए और जब बातचीत हो तो अमेरिका की जो टर्म्स एंड कंडीशन है उनको आसानी से मान ले।
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अब अमेरिका चार टर्म्स एंड कंडीशन चाहता है। एक तो कहता है कि ईरान न्यूक्लियर बम ना बनाए। इसके लिए ईरान कहता है ठीक है हम न्यूक्लियर बम नहीं बना रहे थे। बनाएंगे भी नहीं और जो 400 किलो हमने यूरेनियम 235 का प्यूरिफिकेशन किया हुआ है हम उसको थोड़ा डाइल्यूट कर देंगे। एक तरीका होता है डाइल्यूट करने के बाद यानी उसमें कुछ मिश्रण किया जाता है तो वो 60% से घट के 20% और मिश्रण करने के बाद घट के 10% हो जाता है। ईरान राजी है। अब कंफर्म कौन करेगा? ये मैकेनिज्म है दुनिया में आईएईए इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी चाहते हैं कि अमेरिकी और इजराइल का कोई भी साइंटिस्ट ना हो। हां देखिए यह समझना पड़ेगा। ईरान को हमेशा से शक रहा है जो कि वास्तव में सत्य है
कि जब भी आईएए की टीम जाती है ईरान में दशकों से जाती रही है। पिछले 10 साल से हर साल दो-तीन बार जाती है।
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ईरान को शक रहा है जो कि वास्तविक सत्य है कि आईएए की टीम में असल में सीआईए और मोसाद के एजेंट होते हैं। जब वो ईरान के अंदर जाते थे तो जाहिर बात है ईरान उनको अपने न्यूक्लियर साइट्स दिखाएगा। अपने न्यूक्लियर लेबोरेटरीज में लेके जाएगा। ये आईएए की टीम ईरान के न्यूक्लियर साइंटिस्ट से मिलेगी तो इनको पता लग जाता था कि इनका ऑफिस कहां पर है? लैबोरेटरी कहां है? वर्कशॉप कहां है? ईरानियन साइंटिस्ट का न्यूक्लियर साइंटिस्ट का। घर से कितने बजे वो ऑफिस आता है? शाम को कितने बजे अपने लैबोरेटरी से वापस घर जाता है? ये खबर आईएए की टीम में जब ये वापस जाते थे तो डीब्रीफ होकर ये इंफॉर्मेशन सीआईए और एमआई सिक्स और मोसाद के जरिए फाइनली इजराइल के टॉप मिलिट्री लीडर्स के पास पहुंच जाती थी और एक जरिया बन जाती थी।
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