इजरायल का अब फिलिस्तीनी 'वेस्ट बैंक' पर कब्जा, मुस्लिम देश हैरान

फिलिस्तीनी लीडरशिप और कई मुस्लिम देशों ने इस कदम का विरोध किया है। उनका कहना है कि वेस्ट बैंक अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार कब्जे वाला क्षेत्र है। इसलिए यहां की जमीन को राज्य संपत्ति घोषित करना भविष्य में दो राष्ट्रीय समाधान की संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है।
इजरायल ने 1967 के बाद पहली बार वेस्ट बैंक में बड़े भूभाग को स्टेट लैंड यानी सरकारी जमीन घोषित करने का फैसला लिया है। इस कदम को इलाके की राजनीति और कूटनीति में अहम माना जा रहा है क्योंकि 1967 के सिक्स डेज वॉर के बाद से वेस्ट बैंक का मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद का मुद्दा रहा है। मौजूदा ऐलान के तहत जिस इलाके को राज्य की आधिकारिक जमीन घोषित किया गया है, वह रणनीतिक तौर पर संवेदनशील इलाके में मौजूद बताया जा रहा है। इजराइली प्रशासन का कहना है कि यह फैसला कानूनी प्रक्रिया और जमीन के सर्वे के बाद लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार इस भूभाग पर किसी फिलिस्तीनी निजी पार्टी का दावा वैध नहीं साबित हो पाया। जिसके बाद इसे इजरली राज्य की जमीन के तौर पर दर्ज किया गया है। इजराइल की दलील है कि इस तरह की घोषणाएं उसके प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में आती हैं। उसकी ओर से यह फैसला इस क्षेत्र के विकास, सुरक्षा और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए लिया गया है।
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दूसरी ओर फिलिस्तीनी लीडरशिप और कई मुस्लिम देशों ने इस कदम का विरोध किया है। उनका कहना है कि वेस्ट बैंक अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार कब्जे वाला क्षेत्र है। इसलिए यहां की जमीन को राज्य संपत्ति घोषित करना भविष्य में दो राष्ट्रीय समाधान की संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है। आलोचकों का तर्क है कि इस तरह के फैसले से क्षेत्र में बस्तियों के विस्तार को बढ़ावा मिल सकता है और शांति वार्ताओं की राह में मुश्किलें आ सकती हैं। इस इजराइली घोषणा के बाद क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। वेस्ट बैंक में पहले से ही इजराइली बस्तियों और फिलिस्तीनी आबादी के बीच संवेदनशील संतुलन बना हुआ है।
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किसी भी प्रशासनिक या जमीन के मालिकाना संबंधी फैसले का स्थानीय स्तर पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय खासकर अमेरिका और यूरोपीय देशों की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने पहले भी वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों के विस्तार पर चिंता व्यक्त की है। साथ ही बातचीत से मसले को सुलझाने की बात कही है। ऐसे में यह नया कदम कूटनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। कुल मिलाकर 1967 के बाद पहली बार वेस्ट बैंक में बड़े पैमाने पर जमीन को स्टेट लाइन घोषित करने का निर्णय एक ऐतिहासिक और विवादास्पद कदम के रूप में देखा जा रहा है।
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