चीन-पाक के विदेश मंत्रियों ने कहा, दक्षिण एशिया के सभी लंबित विवादों को सुलझाना अहम

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बयान के अनुसार, “दोनों पक्षों ने अफगानिस्तान की अंतरिम सरकार से एक व्यापक आधार वाला समावेशी राजनीतिक ढांचा विकसित करने, मजबूत आंतरिक एवं बाहरी नीतियों को अपनाने, महिलाओं व बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने और यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि अफगान सरजमीं का इस्तेमाल किसी भी पड़ोसी के खिलाफ नहीं किया जाए।”

बीजिंग|  पाकिस्तान के नवनियुक्त विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने रविवार को चीन के गुआंगझोऊ में अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ दोनों देशों के संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने के उपायों पर चर्चा की।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कोविड-19 महामारी, बढ़ती महंगाई, जलवायु परिवर्तन और गरीबी के चलते लोगों के सामने आने वाली चुनौतियों के मद्देनजर दक्षिण एशिया के ‘सभी लंबित विवादों को हल करना अहम है।’

पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के नेतृत्व वाली सरकार गिरने के बाद बिलावल को देश का नया विदेश मंत्री नियुक्त किया गया है। यह विदेश मंत्री के तौर पर चीन की उनकी पहली यात्रा है। बैठक के अंत में जारी संयुक्त बयान में कहा गया है कि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के ‘मूल हितों’ के प्रति अपने मजबूत समर्थन की पुष्टि करते हुए दोहराया कि एक शांतिपूर्ण और समृद्ध दक्षिण एशिया सभी पक्षों के साझा हित में है।

पाकिस्तान की सरकारी समाचार एजेंसी ‘एपीपी’ ने ट्वीट कर बताया कि बिलावल ने गुआंगझोऊ में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ मुलाकात की।

दोनों नेताओं की मुलाकात गुआंगझोऊ में इसलिए हुई, क्योंकि राजधानी बीजिंग में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बढ़ने के कारण आंशिक तौर पर लॉकडाउन लागू है।

‘एपीपी’ ने संयुक्त बयान के हवाले से कहा, “वैश्विक महामारी, जरूरी वस्तुओं की बढ़ती कीमतों, जलवायु परिवर्तन और गरीबी के चलते क्षेत्र के लोगों के सामने आने वाली चुनौतियों को देखते हुए क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने और स्थायी शांति, स्थिरता एवं साझा समृद्धि के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए सभी लंबित विवादों को सुलझाना अहम है।”

बयान के मुताबिक, बिलावल ने चीनी पक्ष को ‘जम्मू-कश्मीर के नवीनतम घटनाक्रमों के बारे में जानकारी दी’, लेकिन इसमें सभी ‘लंबित विवादों’ के जिक्र से अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या इसमें भारत और चीन के बीच का सीमा विवाद, खासतौर पर पूर्वी लद्दाख में दो साल से अधिक समय से चल रहा सैन्य गतिरोध भी शामिल है या नहीं। बयान में परोक्ष रूप से कश्मीर मुद्दे की तरफ इशारा करते हुए कहा गया है, “दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर, सुरक्षा परिषद के प्रासंगिक प्रस्तावों और द्विपक्षीय समझौतों के आधार पर विवाद के शांतिपूर्ण समाधान के महत्व को रेखांकित किया।” इसमें कहा गया है कि दोनों पक्षों ने अफगानिस्तान के ताजा घटनाक्रम पर चर्चा की और इस बात पर सहमति जताई कि अफगानिस्तान में शांति व स्थिरता क्षेत्रीय विकास तथा समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है।

बयान के अनुसार, “दोनों पक्षों ने अफगानिस्तान की अंतरिम सरकार से एक व्यापक आधार वाला समावेशी राजनीतिक ढांचा विकसित करने, मजबूत आंतरिक एवं बाहरी नीतियों को अपनाने, महिलाओं व बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने और यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि अफगान सरजमीं का इस्तेमाल किसी भी पड़ोसी के खिलाफ नहीं किया जाए।” इससे पहले, बिलावल ने चीन पहुंचकर ट्वीट किया, ‘‘अपनी पहली द्विपक्षीय यात्रा के तहत गुआंगझोऊ में उतरा। आज पाकिस्तान और चीन के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 71वीं वर्षगांठ है।

चीन के स्टेट काउंसलर एवं विदेश मंत्री वांग यी के साथ पाकिस्तान और चीन के बीच मौजूद गहरे संबंधों पर बातचीत करने को लेकर उत्साहित हूं।’’ बिलावल इससे पहले न्यूयॉर्क गए थे, जहां उन्होंने अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन से मुलाकात की थी और अमेरिका-पाकिस्तान के संबंधों को मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा की थी। दोनों देशों के बीच संबंध पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के शासनकाल में काफी खराब हो गए थे। ब्लिंकन से मुलाकात के बाद संवाददाताओं से मुखातिब हुए बिलावल ने उन अटकलों को खारिज किया था कि अमेरिका के साथ संबंध बढ़ने से पाकिस्तान के चीन के साथ रिश्ते बिगड़ सकते हैं।

बिलावल के साथ पाकिस्तान की विदेश राज्य मंत्री हिना रब्बानी खार और वरिष्ठ अधिकारी भी चीन पहुंचे हैं। शनिवार को चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजिआन ने पाकिस्तान और चीन के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 71वीं वर्षगांठ पर दोनों देशों को बधाई दी थी।

उन्होंने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से ट्वीट किया था, ‘‘बधाई, 21 मई को पाकिस्तान और चीन के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 71वीं वर्षगांठ है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल 21 मई को चीन आ रहे हैं।’’ बिलावल चीन की दो दिन की यात्रा पर हैं।

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