UN में ऐसा गरजे जयशंकर, मनमर्जी करने वाले देशों को दे डाली चेतावनी

Jaishankar
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अभिनय आकाश । Sep 22 2026 2:27PM

संयुक्त राष्ट्र में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने वैश्विक संकटों पर महाशक्तियों को ठोस कदम उठाने की नसीहत दी। उन्होंने ईंधन, भोजन, उर्वरक और वित्त से जुड़े चार एफ संकट तथा आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरियों पर चिंता जताई। इसके साथ ही उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया और सुधारवादी बहुपक्षवाद को लागू करने की जोरदार वकालत की।

संयुक्त राष्ट्र यानी यूएन के सबसे बड़े मंच से भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक बार फिर दुनिया की तथाकथित महाशक्तियों को सीधा और कड़ा आईना दिखाया है। न्यूयॉर्क में चल रहे 81वें संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के दौरान आयोजित पार्टनर्स फॉर मल्टीलटरलिज्म समिट में दुनिया भर के दर्जनों देशों के शीर्ष राजनयिक और वैश्विक नेता मौजूद थे। इस उच्च स्तरीय शिखर सम्मेलन को भारत ने खुद सह प्रायोजित किया था। इस मंच से जयशंकर ने साफ कर दिया कि दुनिया आज जिस दौराहे पर खड़ी है, वहां खोखली बयानबाजी नहीं बल्कि ठोस फैसलों की दरकार है। डॉक्टर जयशंकर ने अपने संबोधन की शुरुआत में ही वैश्विक व्यवस्था के संकट को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि दुनिया दशकों से एक स्वाभाविक रिबैलेंसिंग की तरफ बढ़ रही थी। लेकिन बड़े देशों के बीच की अंधी प्रतिस्पर्धा, भू-राजनीतिक तनाव और प्रत्यक्ष युद्धों ने हालात को बेहद खतरनाक बना दिया है। जयशंकर ने दो टूक चेतावनी दी कि यदि इस बेलगाम टकराव को तुरंत नहीं रोका गया तो दशकों से बनी अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भावना पूरी तरह खत्म हो जाएगी। 

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जयशंकर ने विश्व नेताओं के सामने उन वास्तविक समस्याओं को रखा जो आज आम जनता की जिंदगी को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने दुनिया के सामने खड़े चार एफ क्राइसिस पर कड़ा रुख अपनाया। इसमें फ्यूल यानी ईंधन, ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और तेल संकट से जुड़ी समस्या है। फ़ूड यानी खाद्य सुरक्षा, युद्ध और प्रतिबंधों के चलते भुखमरी और अनाज की कमी से जुड़ा मुद्दा है। फर्टिलाइजर यानी उर्वरक खाद की किल्लत से जुड़ी समस्या है। जिससे गरीब देशों की खेती प्रभावित हो रही है और फाइनेंस यानी वित्त विकासशील देशों पर बढ़ते कर्ज और फंडिंग की कमी से जुड़ा संकट है। जयशंकर ने स्पष्ट कहा कि यह चार एफ संकट अपने आप ठीक नहीं होगा। इसके लिए दुनिया की बड़ी ताकतों को स्वार्थ से ऊपर उठकर जिम्मेदारी लेनी होगी। इतना ही नहीं विदेश मंत्री ने सप्लाई चेन के एकाधिकार और व्यापारिक ब्लैकमेलिंग के खतरे पर भी सख्त टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जहां भी सप्लाई चेन में रुकावट डालने या किसी एक देश के दबदबे का खतरा हो वहां दुनिया को डीरिस्किंग यानी जोखिम कम करने और डायवर्सिफाइंग यानी सप्लाई चेन में नए विकल्प तलाशने और उसका विविधकरण करने पर जोर देना होगा। इसके साथ ही उन्होंने नई तकनीकों जैसे एआई और साइबर स्पेस के लिए कड़े नियम और गार्ड रेल्स बनाने की भी वकालत की ताकि इन तकनीकों का दुरुपयोग ना हो सके। 

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एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र की कार्यशैली में सुधार की जरूरत पर भी जोर देते हुए रिफॉर्मड मल्टीलटरलिज्म यानी सुधारवादी बहुपक्षवाद की मांग को दोहराया। उन्होंने ज्यादा भागीदारी और पारदर्शी तरीके से फैसले लेने की जरूरत बताई ताकि वैश्विक संस्थाएं आज की बदलती दुनिया की चुनौतियों का ज्यादा प्रभावी ढंग से सामना कर सकें। उन्होंने कहा कि बंद कमरों में लिए जाने वाले फैसले अब नहीं चलेंगे। जब तक सभी अंतरराष्ट्रीय नियमों और कानूनों का पूरी ईमानदारी से पालन नहीं होगा और निर्णय प्रक्रिया पारदर्शी व समावेशी नहीं होगी तब तक संयुक्त राष्ट्र की साख बहाल नहीं हो सकती। सैकड़ों देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में डॉ. एस जयशंकर का यह कड़ा संदेश साबित करता है कि भारत अब केवल श्रोता नहीं है बल्कि दुनिया की दिशा तय करने वाला एक निडर और स्पष्ट नेतृत्वकर्ता बनकर उभर चुका है। 

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