पहन के लुंगी, बजा दी पुंगी, हूतियों ने सऊदी का फाइटर प्लेन गिराया, इधर रूस ने पूरा गेम घुमाया

Houthi
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अभिनय आकाश । Sep 18 2026 12:06PM

हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के अत्याधुनिक एफ-15 लड़ाकू विमान को मार गिराने का दावा कर मलबे का वीडियो जारी किया है। इस संघर्ष के बीच इजराइल द्वारा सऊदी अरब को खुफिया जानकारी देने की बात सामने आई है। वहीं एक अमेरिकी रिपोर्ट के अनुसार रूस ने ईरान को सऊदी स्थित अमेरिकी सैन्य बेस से जुड़े खुफिया इनपुट मुहैया कराए थे।

क छोटे से विद्रोही गुट ने सऊदी अरब का F1-15 लड़ाकू विमान मार गिराया है। उसके बाद यह F15 लड़ाकू विमान के मलवे पर खड़े होकर जश्न मना रहे हैं। मलबे को पलट-पलट कर उस पे लगा सऊदी अरब का झंडा दिखा रहे हैं। विमान का नंबर दिखा रहे हैं। इसी बड़ी घटना के बीच रूस को लेकर एक बहुत बड़ा दावा किया गया है जिस पर हम आगे बात करेंगे। लेकिन सबसे पहले इस तस्वीर और सोशल मीडिया पर पूछे जा रहे दो दिलचस्प सवालों के बारे में जान लीजिए। सोशल मीडिया पर एक सवाल पूछा जा रहा है कि भारत और दुनिया में बैठे कट्टरपंथी, फर्जी बुद्धिजीवी और वामपंथी हमेशा आरएसएस को गालियां देते हैं। बोलते हैं कि आरएसएस हिंदू मुस्लिम करती है। मगर इस्लाम के सबसे पवित्र शहर मक्का पर किसने हमला किया? यह हमला करने वाले मुस्लिम ही थे।

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जो जंग चल रही है वह भी मुस्लिम देशों के बीच चल रही है। इजराइल के लोगों ने भी एक जबरदस्त बात बोलनी शुरू कर दी है। इजराइलियों ने तंज कसते हुए कहा है कि इस्लाम के सबसे पवित्र स्थल मक्का का एकमात्र संरक्षक इजराइल बन गया है। क्योंकि सऊदी अरब ने इजराइल से मदद मांगी और इजराइल ने खुफिया जानकारी दे भी दी। यानी जब दुनिया के सभी देशों ने मक्का पर हो रहे हमलों को देख आंखें बंद कर ली हैं तो उसी मक्का को बचाने के लिए इजराइल आगे आया है। सऊदी अरब ने कहा है कि शिया संगठन हूती ने मक्का पर हमला किया जबकि हूती विद्रोहियों ने कहा है कि यह हमला सऊदी अरब की रॉयल फैमिली ने खुद करवाया है। लुंगी पहने और चप्पल में खड़े हूं विद्रोहियों ने सऊदी अरब के एफ-15 फाइटर जेट को मार गिराने का दावा किया। इसके मलबे का वीडियो भी जारी कर दिया। इस वीडियो में जिस जहाज का मलबा दिख रहा है उस पर सऊदी अरब का झंडा भी बना है। विमान के टेल पर नंबर 55 529 लिखा है जो सऊदी एयरफोर्स के विमान से मेल खा रहा है। आपको बता दें कि F1-15 दुनिया के सबसे आधुनिक महंगे और शक्तिशाली लड़ाकू विमानों में से एक माना जाता है। 

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जैसे एक विद्रोही संगठन द्वारा इसे मार गिराना एक बहुत बड़ी घटना है। दावों के मुताबिक दो दिन पहले सऊदी अरब ने चीन से मिली डीएफ-15 बैलेस्टिक मिसाइल भी हूतियों के ठिकाने पर दागी थी। लेकिन वो मिसाइल निशाना चूक गई। यमन के स्थानीय लोगों ने हाथों से ही उस अधमरी मिसाइल को पलट दिया। बहरहाल इस पूरे विवाद में रूस का नाम लेकर बहुत बड़ा ऐलान किया गया है। हालांकि ये नाम लेने वाला अमेरिकी चैनल है। इस चैनल की साख पर कई बार सवाल उठ चुके हैं। लेकिन इसने जो कहा है वो आप एक बार सुन लीजिए। सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के एक जबरदस्त हमले से 2 दिन पहले रूस के 14 जासूसी सेटेलाइट सऊदी अरब में अमेरिकी मिलिट्री बेस के ऊपर से गुजरे थे। यानी सीएनएन बोल रहा है कि रूस ने ईरान को वो कोऑर्डिनेट्स दिए जहां पर सऊदी अरब में अमेरिकी एयर बेस था।

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