India-Nepal Border Dispute पर PM Balen Shah का नया रुख, कहा- बातचीत से ही सुलझेगा विवाद

Nepal PM
ANI
एकता । May 31 2026 4:41PM

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने अपने पहले संसदीय संबोधन में भारत के साथ सीमा विवाद को बातचीत और कूटनीति से सुलझाने पर जोर दिया, जिसमें लिपुलेख और कालापानी जैसे मुद्दे शामिल हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि नेपाल ने भी भारतीय भूमि पर अतिक्रमण किया है, जिसके समाधान के लिए संयुक्त विशेषज्ञ सर्वेक्षण की आवश्यकता है।

नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने मार्च में हुए आम चुनाव के बाद सत्ता संभालने के बाद पहली बार देश की संसद को संबोधित किया। संसद के सामने अपनी बात रखते हुए उन्होंने साफ किया कि भारत के साथ चल रहे सीमा विवाद को बातचीत, चर्चा और राजनयिक प्रयासों के माध्यम से हल किया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों पड़ोसी देश मिलकर इस मसले का सही रास्ता निकाल लेंगे।

लिपुलेख और कालापानी पर कूटनीतिक रुख

प्रधानमंत्री बालेन शाह ने सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी जैसे क्षेत्रों को लेकर भारत के साथ जो क्षेत्रीय विवाद चल रहे हैं, उनका समाधान केवल टेबल टॉक से ही संभव है। उन्होंने जानकारी दी कि इस व्यापारिक मार्ग को लेकर नेपाल द्वारा भेजे गए कूटनीतिक नोट का नई दिल्ली ने जवाब भी दिया है।

इसे भी पढ़ें: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की मेडिकल रिपोर्ट जारी, डॉक्टरों ने बताया पूरी तरह फिट

नेपाल की तरफ से भी अतिक्रमण का दावा

इस संबोधन के दौरान पीएम शाह ने एक बेहद चौंकाने वाला दावा भी किया। उन्होंने कहा कि मामले की समीक्षा से पता चला है कि केवल भारत ने ही नेपाल की जमीन पर कब्जा नहीं किया है, बल्कि नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की भूमि पर अतिक्रमण किया है। उन्होंने दोनों देशों के सर्वेक्षकों, इतिहासकारों और क्षेत्र विशेषज्ञों को एक साथ मिलकर इस दिशा में काम करने की सलाह दी।

इसे भी पढ़ें: Russia की तस्वीर ने हिलाई दुनिया, रातों-रात पलटी भारत की किस्मत!

संसद के पहले संबोधन पर टिकी थीं नजरें

बता दें कि नेपाल में हुए 'जेन-जी विद्रोह' के बाद हुए चुनावों में बालेन शाह की पार्टी ने एकतरफा और बड़ी जीत दर्ज की थी। इसके बाद इस साल 27 मार्च को उन्होंने नेपाल के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी। पद संभालने के बाद से वे न तो किसी विदेश यात्रा पर गए और न ही मीडिया से ज्यादा बातचीत की। ऐसे में उनके इस पहले संसदीय संबोधन से भारत को लेकर उनकी सरकार की विदेश नीति का रुख साफ हो गया है।

All the updates here:

अन्य न्यूज़