इसकी टोपी उसके सिर वाले फॉर्मूले पर चल रहा पाकिस्तान, भीख मांग कर चुका रहा UAE का कर्जा

नए कर्ज को मांगने के लिए खुद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अपना कटोरा लेकर सऊदी अरब पहुंचे और वहां पर मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात की। इसके साथ ही इस मुलाकात में पाकिस्तान ने ना सिर्फ पैसे मांगे बल्कि इससे पहले जो कर्ज ले रखा है सऊदी अरब से उसको चुकाने के लिए मोहलत बढ़ाने की भी मांग कर दी। यानी कि नया कर्ज तो मांगा ही मांगा। पुराना चुकाने के लिए वक्त भी मांगा है शबाज शरीफ।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का हाल इन दिनों कुछ ऐसा है कि वह इसकी टोपी उसके सर वाली रणनीति पर काम कर रहा है और उधार लेकर उधार चुकाने का कारनामा पाकिस्तान इन दिनों करता दिख रहा है और यह कोई मजाक नहीं बल्कि आधिकारिक जानकारी है। हाल ही में पाकिस्तान ने यूनाइटेड अरब एमिरेट्स यानी यूएई को लगभग 2 बिलियन का कर्ज वापस लौटा दिया है। सुनने में कितना अच्छा लगता है कि पाकिस्तान ने कर्ज चुका दिया। लेकिन इसकी असली कहानी यहीं शुरू होती है। दरअसल पाकिस्तान के पास कर्ज चुकाने के लिए इतने पैसे थे ही नहीं। कर्ज चुकाने के लिए उसे कुछ दिन पहले ही सऊदी अरब से 2 बिलियन का नया कर्ज लेना पड़ा है। यानी एक जेब से पैसा आया और दूसरी जेब में चला गया। इस नए कर्ज को मांगने के लिए खुद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अपना कटोरा लेकर सऊदी अरब पहुंचे और वहां पर मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात की। इसके साथ ही इस मुलाकात में पाकिस्तान ने ना सिर्फ पैसे मांगे बल्कि इससे पहले जो कर्ज ले रखा है सऊदी अरब से उसको चुकाने के लिए मोहलत बढ़ाने की भी मांग कर दी। यानी कि नया कर्ज तो मांगा ही मांगा। पुराना चुकाने के लिए वक्त भी मांगा है शबाज शरीफ।
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पहले सऊदी अरब से पाकिस्तान को पैसे मिले। फिर पाकिस्तान ने उसी पैसे से यूएई का कर्ज चुका है और इन सब की जानकारी स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने खुद दी है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने बताया कि कुल $3.45 बिलियन डॉलर यूएई को वापस कर दिए गए हैं। इसमें से 1 बिलियन 23 अप्रैल को और बाकी पिछले हफ्ते चुका दिया गया था। पाकिस्तान के पास इस वक्त पैसों की इतनी कमी है कि पाकिस्तान ने $500 मिलियन यूरो बॉन्ड जारी करके भी कुछ पैसे जुटाए हैं। यानी हालात ऐसे हैं कि जहां से अभी मौका बन पा रहा है पाकिस्तान वहां से पैसे उठाए जा रहा है। सीधे शब्दों में कहें तो पाकिस्तान इस वक्त कर्ज घुमाओ योजना पर चल रहा है और इसी की वजह से वो इसकी टोपी उसके सर वाली स्कीम को लागू कर रहा है। यानी एक तरफ उसने सऊदी अरब से कर्ज मांगा और कर्ज मांगते ही उसे तुरंत यूएई को लौटा दिया। यह ठीक क्रेडिट कार्ड वाले स्कैम की तरह नजर आता है। जहां कुछ लोग क्रेडिट कार्ड तो ले लेते हैं, लेकिन उसका पैसा दे नहीं पाते, तो वह क्या करते हैं? वह एक नया क्रेडिट कार्ड लेते हैं और क्रेडिट कार्ड के इस लूप में ही घूमते रहते हैं।
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पुराने क्रेडिट कार्ड का बिल चुकाने के लिए नए क्रेडिट कार्ड से लोन लेंगे। फिर उसका कर्ज चुकाएंगे और यह लूप जारी रहेगा और पाकिस्तान इस लूप का अंतरराष्ट्रीय लेवल पर इस्तेमाल कर रहा है। आपको बता दें कि पाकिस्तान में इस वक्त विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार दबाव देखने को मिल रहा है और ऐसी स्थिति में अंतरराष्ट्रीय दायित्व पूरा करने के लिए पाकिस्तान को बार-बार बाकी देशों से मदद मांगनी पड़ती है। मदद क्या इसे भीख ही कहिए। अब देखना यह होगा कि पाकिस्तान आखिर कब तक ऐसे ही उधार लेकर सिस्टम को चलाता चलेगा। क्या वो कभी अपने दम पर भी अपने आप को आर्थिक स्थिरता दिला पाएगा? खैर ऐसा होता तो दिख नहीं रहा है। पर क्या यह एक फाइनेंशियल मैनेजमेंट है? आप पाकिस्तान के इस इसकी टोपी उसके सर वाली स्कीम को लेकर क्या राय रखते हैं? हमें अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।
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