Strait of Hormuz में नया समुद्री खेल खेल रहा Pakistan, पैसे लेकर अपना झंडा देकर निकलवा रहा दूसरों के जहाज

Pakistan
Image Source: gemini

बताया जा रहा है कि पाकिस्तान विशेष रूप से बड़े तेल टैंकरों की तलाश में था, जिनकी क्षमता लगभग बीस लाख बैरल तक होती है। इस पहल को क्षेत्रीय तनाव कम करने और कूटनीतिक सफलता के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की जा रही है।

फारस की खाड़ी और होरमुज जलडमरूमध्य को लेकर वैश्विक स्तर पर एक नया और जटिल घटनाक्रम सामने आया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। ताजा घटनाओं के अनुसार, एक तेल टैंकर संचालक को ईरान की नौसेना की सुरक्षा में सुरक्षित मार्ग देने का प्रस्ताव मिला, लेकिन इसके लिए जहाज को पाकिस्तान के झंडे के तहत पंजीकृत करना अनिवार्य बताया गया।

सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार ने यह प्रस्ताव उन जहाजों को दिया जो लंबे समय से खाड़ी में फंसे हुए थे और मिसाइल तथा ड्रोन हमलों के खतरे का सामना कर रहे थे। हालांकि पाकिस्तान के पास स्वयं इस क्षेत्र में बहुत कम जहाज हैं, इसलिए उसने दुनिया की बड़ी कमोडिटी कंपनियों से संपर्क कर ऐसे जहाजों की तलाश शुरू की जो अस्थायी रूप से पाकिस्तानी झंडे के तहत यात्रा कर सकें।

इसे भी पढ़ें: पाकिस्तान में महंगाई का बड़ा विस्फोट: पेट्रोल ₹458 और डीजल ₹520 के पार, वैश्विक युद्ध का असर

बताया जा रहा है कि पाकिस्तान विशेष रूप से बड़े तेल टैंकरों की तलाश में था, जिनकी क्षमता लगभग बीस लाख बैरल तक होती है। इस पहल को क्षेत्रीय तनाव कम करने और कूटनीतिक सफलता के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि अभी तक इस प्रस्ताव को व्यापक रूप से स्वीकार नहीं किया गया है।

इस पूरे घटनाक्रम के पीछे ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी की बढ़ती भूमिका सामने आई है। उद्योग से जुड़े लोगों के अनुसार, आईआरजीसी अब होरमुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर चुका है। यह न केवल जहाजों से शुल्क वसूल रहा है बल्कि मित्र देशों को प्राथमिकता भी दे रहा है, जबकि विरोधी देशों के जहाजों को खतरे का सामना करना पड़ रहा है।

ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने हाल ही में एक विधेयक को मंजूरी दी है, जिसके तहत इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर औपचारिक शुल्क लगाया जा सकता है। इस प्रस्तावित व्यवस्था के तहत जहाजों को एक मध्यस्थ कंपनी के माध्यम से अपनी पूरी जानकारी देनी होती है, जिसमें स्वामित्व, माल, चालक दल और मार्ग की जानकारी शामिल होती है। इसके बाद आईआरजीसी की नौसेना जांच कर यह तय करती है कि जहाज को अनुमति दी जाए या नहीं।

यदि जहाज को अनुमति मिल जाती है, तो उससे शुल्क लिया जाता है जो आम तौर पर प्रति बैरल तेल लगभग एक डॉलर के आसपास बताया जा रहा है। यह भुगतान युआन या स्थिर मुद्रा में किया जाता है। भुगतान के बाद जहाज को एक विशेष कोड और निर्धारित मार्ग दिया जाता है, जिसके तहत उसे ईरानी निगरानी में जलडमरूमध्य पार करना होता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं है। सामान्यतः किसी देश को अपने तट से लगभग बाइस किलोमीटर तक ही नियंत्रण का अधिकार होता है। इसके बावजूद ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन को लिखे पत्र में कहा है कि वह केवल उन जहाजों को अनुमति दे रहा है जो उसके लिए शत्रुतापूर्ण नहीं हैं।

समुद्री कानून विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान इस कदम को आत्मरक्षा के अधिकार के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, लेकिन अधिकांश अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञ इसे वैध नहीं मानते। इससे जहाज मालिकों के सामने कानूनी और आर्थिक दुविधा खड़ी हो गई है।

स्थिति को और जटिल बनाता है बढ़ता सुरक्षा जोखिम। हाल के दिनों में कई जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल हमले हुए हैं। मार्च के अंत में एक कुवैती तेल टैंकर पर ड्रोन हमला हुआ, जिससे उसमें आग लग गई और गंभीर नुकसान हुआ। बीमा कंपनियों ने भी इस क्षेत्र में जहाज भेजने के लिए प्रीमियम में भारी वृद्धि कर दी है।

इसके अलावा, आईआरजीसी के साथ किसी भी प्रकार का समझौता करना अमेरिका और यूरोपीय देशों के प्रतिबंधों का उल्लंघन भी माना जा सकता है। ऐसे में जहाज संचालकों को यह तय करना कठिन हो गया है कि वे सुरक्षा के लिए भुगतान करें या अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करें।

इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव भी कम नहीं हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा कि वह दो से तीन सप्ताह में संघर्ष समाप्त करना चाहते हैं, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि युद्धविराम तभी संभव है जब होरमुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोल दिया जाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही ईरान सुरक्षित मार्ग की व्यवस्था की बात कर रहा हो, लेकिन वास्तविक खतरा अभी भी बरकरार है। ईरान को अपनी स्थिति मजबूत रखने के लिए समय समय पर जहाजों पर हमले करने की क्षमता दिखानी होगी, जिससे क्षेत्र में अनिश्चितता बनी रहेगी।

बहरहाल, होरमुज जलडमरूमध्य की मौजूदा स्थिति वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री कानून और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या कूटनीतिक प्रयास इस संकट को हल कर पाते हैं या यह टकराव और गहराता जाता है।

All the updates here:

अन्य न्यूज़