पाकिस्तान खुद तो डूबा ही साथ अपने जिगरी को भी ले डूबा, तुर्की भी FATF के लपेटे में आया

पाकिस्तान खुद तो डूबा ही साथ अपने जिगरी को भी ले डूबा, तुर्की भी FATF के लपेटे में आया

आतंक को पालने-पोसने वाले पाकिस्तान का असल चेहरा किसी ने नहीं छुपा है। यही वजह है कि आतंक को पनाह देने की वजह से पाकिस्तान को एक बार फिर झटका लगा है। टेरर फंडिंग पर नजर रखने वाली फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्‍ट में बरकरार रखा है।

बहुत पुरानी कहावत है "हम तो डूबे हैं सनम तुम को भी ले डूबेंगे" जिसका मतलब है हम ख़ुद तो फंसे हैं तुम को भी फंसाएगे, इसका उपयोग तब किया जाता है जब यह कहा जाता है कि एक व्यक्ति स्वयं मुसीबत में है और दूसरों को भी मुसीबत मे डाल देगा। ऐसा ही कुछ इस वक्त पाकिस्तान और तुर्की के लिए कहा जा सकता है। पाकिस्तान दुनिया के सामने अपनी छवि सुधारने की जितनी भी कोशिश कर ले लेकिन सच्चाई कभी बदलने वाली नहीं है। आतंक को पालने-पोसने वाले पाकिस्तान का असल चेहरा किसी ने नहीं छुपा है। यही वजह है कि आतंक को पनाह देने की वजह से पाकिस्तान को एक बार फिर झटका लगा है। टेरर फंडिंग पर नजर रखने वाली फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्‍ट में बरकरार रखा है। लेकिन सबसे दिलचस्प बात ये है कि तुर्की को भी ग्रे लिस्‍ट में डाला गया है। 

ग्रे लिस्ट में बना रहेगा पाकिस्तान 

टेरर फंडिंग की निगरानी करने वाले निकाय फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स  (एफएटीएफ) ने कहा कि पाकिस्तान अभी उसकी ग्रे (संदिग्ध) सूची में ही बरकरार रहेगा क्योंकि उसे यह दर्शाना होगा कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकियों जैसे हाफिज सईद और मसूदद अजहर और उनके नेतृत्व वाले समूहों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। सईद और अजहर भारत के वांछितों की सूची में भी हैं। एफएटीएफ के अध्यक्ष मार्कस प्लेयर ने प्रेसवार्ता के दौरान कहा कि संगठन के ऑनलाइन पूर्ण अधिवेशन के समापन पर यह निर्णय लिया गया 

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2019 से ही इस सूची में है पाकिस्तान 

पाकिस्तान को जून, 2018 में एफएटीएफ ने निगरानी सूची में रखा था। उसे अक्टूबर, 2019 तक पूरा करने के लिये कार्य योजना सौंपी गयी थी। 2020 और अप्रैल 2021 के रिव्यू में भी पाक को राहत नहीं मिली थी। उसे पूरा करने में विफल रहने के कारण वह एफएटीएफ की निगरानी सूची में बना हुआ है। 

तुर्की भी लपेटे में आ गया

पाकिस्तान अपने मित्र तुर्की की मदद से बार-बार ब्लैक लिस्ट होने से बचता रहा। लेकिन इस बार खुद तुर्की भी लपेटे में आ गया। एफएटीएफ ने न केवल पाकिसतान को ग्रे लिस्‍ट में बरकरार रखा है, बल्कि उसके गुरु तुर्की को भी आतंकियों को पालने के आरोप में ग्रे लिस्‍ट में डाल दिया है।

क्या है एफएटीएफ

एफएटीएफ एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है जो मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग के खिलाफ काम करती है। एफएटीएफ इसको लेकर दुनियाभर के देशों के लिए गाइडलाइन तय करती है। ये संस्था ये भी तय करती है कि वित्तीय अपराधों को बढ़ावा देने वाले देशों पर कैसे लगाम लगाई जा सकती है। 

मोदी सरकार की वजह से पाकिस्तान FATF की ग्रे लिस्ट में है

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों को भारत के प्रयासों के कारण संयुक्त राष्ट्र की ओर से प्रतिबंध लगाया गया। जयशंकर ने कहा, 'FATF आतंकवाद के लिए फंडिंग पर नजर रखता है और आतंकवाद का समर्थन करने वाले काले धन से निपटता है। हमारी वजह से पाकिस्तान FATF की नजरों में है और उसे ग्रे लिस्ट में रखा गया है।