Prabhasakshi NewsRoom: अमेरिकी हमलों के बाद Iran में दहशत और हाई अलर्ट, तगड़े पलटवार की तैयारी

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कई इलाकों में लगातार विस्फोटों की आवाज, हवाई हमलों की आशंका और सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। रिपोर्टों के मुताबिक ईरान सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और कई संवेदनशील इलाकों में लोगों की आवाजाही सीमित की गई है।

अमेरिका और ईरान के बीच टकराव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अंतरिम युद्धविराम लगभग टूट चुका है और दोनों देशों ने खुलकर सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है। अमेरिकी सेना ने गुरुवार तड़के ईरान के भीतर करीब 90 सैन्य ठिकानों पर भीषण हवाई हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने बहरीन और कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइल और ड्रोन दाग दिए। बताया जा रहा है कि अमेरिकी हमलों के बाद ईरान के भीतर माहौल बेहद तनावपूर्ण और अनिश्चित बना हुआ है। जिन शहरों को निशाना बनाया गया, वहां लोगों में दहशत का माहौल है। कई इलाकों में लगातार विस्फोटों की आवाज, हवाई हमलों की आशंका और सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। रिपोर्टों के मुताबिक ईरान सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और कई संवेदनशील इलाकों में लोगों की आवाजाही सीमित की गई है। मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार तेहरान समेत कई शहरों में लोग युद्ध के और फैलने की आशंका से चिंतित हैं, जबकि दूसरी ओर बड़ी संख्या में लोग अमेरिकी हमलों के खिलाफ राष्ट्रवादी भावना के साथ सरकार के समर्थन में भी खड़े दिखाई दे रहे हैं। हालांकि इस प्रकार की भी खबरें है कि ईरान सरकार सूचना प्रवाह पर कड़ा नियंत्रण बनाए हुए है, इसलिए वास्तविक स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि करना कठिन है।

जहां तक अमेरिकी हमलों की बात है तो आपको बता दें कि अमेरिकी केंद्रीय कमान ने दावा किया कि इस अभियान में वायु रक्षा प्रणाली, मिसाइल और ड्रोन भंडार, नौसैनिक ढांचा, तटीय निगरानी तंत्र, सैन्य रसद केंद्र और समुद्री अभियानों से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेना का कहना है कि इन हमलों का मकसद ईरान की उस क्षमता को कमजोर करना था जिसके जरिए वह होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों और नागरिक नाविकों पर हमला कर रहा था। इससे एक दिन पहले भी अमेरिका लगभग 80 सैन्य ठिकानों पर हमला कर चुका था और उसका दावा है कि इस कार्रवाई में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर की साठ से अधिक नौकाएं नष्ट कर दी गई थीं।

ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार अमेरिकी हमलों से देश के कई हिस्से दहल उठे। बुशहर स्थित परमाणु ऊर्जा परिसर के आसपास विस्फोट हुए, जबकि चाबहार, कोनारक, बंदर अब्बास, सीरिक, कुहेस्तक बंदरगाह, गोलिस्तान प्रांत और ईरानशहर हवाई अड्डे सहित कई रणनीतिक स्थानों को निशाना बनाया गया। चाबहार के समुद्री नियंत्रण टावर को भारी नुकसान पहुंचा है और ईरानशहर हवाई अड्डे पर हुए हमले में एक अग्निशमन कर्मी की मौत होने की भी खबर है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कई इलाकों से धुएं के विशाल गुबार उठते दिखाई दिए।

अमेरिकी हमलों के कुछ ही समय बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन दागे। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने दावा किया कि उसने कुवैत के अरिफजान और अली अल सलेम तथा बहरीन के जुबैर और शेख ईसा स्थित ठिकानों को निशाना बनाया। बहरीन में कई बार हवाई हमले का सायरन बजा, जबकि कुवैत ने कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने आने वाली मिसाइलों और ड्रोन को रास्ते में ही मार गिराया। शुरुआती जानकारी के अनुसार किसी बड़े नुकसान या भारी जनहानि की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

हम आपको बता दें कि इस पूरे घटनाक्रम की जड़ होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों पर हुए हमले हैं। अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने ओमान तट के पास तीन व्यापारिक टैंकरों को निशाना बनाकर अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात और ऊर्जा आपूर्ति को खतरे में डाल दिया। दूसरी ओर ईरान का कहना है कि अंतरिम युद्धविराम के तहत इस जलमार्ग पर यातायात का नियमन करने का अधिकार उसके पास है और किसी भी बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो शिखर सम्मेलन से लौटने के बाद साफ कहा कि ऐसा लगता है कि अंतरिम युद्धविराम अब समाप्त हो चुका है। उन्होंने सोशल मीडिया पर ईरान में हुए विस्फोटों के वीडियो साझा करते हुए चेतावनी दी कि यदि जहाजों पर हमले दोबारा हुए तो अमेरिका इससे भी अधिक कठोर जवाब देगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका चाहे तो बहुत जल्दी यह अभियान पूरा कर सकता है। उन्होंने ईरान के बिजली संयंत्रों, समुद्री जल को पीने योग्य बनाने वाले संयंत्रों और मुख्य तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप को भी निशाना बनाने की चेतावनी दोहराई। साथ ही उन्होंने दावा किया कि सैन्य दृष्टि से अमेरिका बढ़त हासिल कर चुका है और ईरान समझौता करना चाहता है, हालांकि उन्हें तेहरान की नीयत पर भरोसा नहीं है।

उधर, ईरान के शीर्ष नेतृत्व ने अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए जवाब और तेज करने की चेतावनी दी है। संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने कहा है कि अमेरिका को अब तक यह समझ नहीं आया कि धमकी और वादाखिलाफी की कीमत चुकानी पड़ती है। उनका स्पष्ट संदेश था कि यदि हमला होगा तो जवाब भी मिलेगा। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी ट्रंप की भाषा की आलोचना करते हुए कहा कि ईरान अपमान का उत्तर शब्दों से नहीं बल्कि कार्रवाई से देगा। उन्होंने दोहराया कि होर्मुज जलडमरूमध्य का भविष्य अमेरिकी धमकियों से नहीं बल्कि ईरान की व्यवस्था से तय होगा।

इस बीच, अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से सामने आई रिपोर्टों में कहा गया है कि यह संघर्ष केवल कुछ घंटों तक सीमित नहीं रह सकता। वॉशिंगटन कई दिनों, कई सप्ताह या यहां तक कि कई महीनों तक चलने वाले सैन्य अभियान की तैयारी कर रहा है। माना जा रहा है कि आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना जारी रखता है या नहीं। साथ ही स्थायी समझौते के लिए प्रस्तावित वार्ता पर भी अब अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। हालांकि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संपर्क पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं, लेकिन ताजा हमलों और तीखी बयानबाजी ने यह साफ कर दिया है कि फिलहाल पश्चिम एशिया में शांति की राह पहले से कहीं अधिक कठिन हो गई है।

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