ट्रंप ने वॉर मशीन निकाली तो ईरान में हुई चीनी विमान की सीक्रेट लैंडिंग, हिला अमेरिका!

पश्चिम एशिया में ईरान जो सालों से अमेरिकी प्रतिबंधों में जकड़ा रहा जिसे कमजोर समझा गया। आज वही ईरान अमेरिका और इजराइल की नींद उड़ाकर बैठ गया है और इसकी वजह बनी चीन के दो रहस्यमई विमान जो अचानक तेहरान में उतरते हैं।
अमेरिकी की चलती फिरती वॉर मशीन दक्षिण चीन सागर से सेंट्रल कमांड यानी सेंट कॉम की ओर बढ़ती चली आई। वो जगह जहां से मध्य पूर्व और आसपास के देशों में नजर रखने के साथ ही सैन्य अभियानों की जिम्मेदारी संभालता है। यहां गौर करना जरूरी है कि मध्य पूर्व में ईरान भी शामिल है। जिससे फिलहाल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रस्साकशी चल रही है। ऐसे में कैरियर स्ट्राइक के मूवमेंट की पुष्टि पेंटागन की तरफ से की गई है। असल में सेंटकॉम अमेरिकी सेना का एक खास कमांड है। ये युद्ध और सैन्य ऑपरेशन्स की प्लानिंग, आतंक विरोधी अभियान, मुश्किल हालातों में तुरंत सैन्य कार्रवाई की जिम्मेदारी संभालता है।
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पश्चिम एशिया में ईरान जो सालों से अमेरिकी प्रतिबंधों में जकड़ा रहा जिसे कमजोर समझा गया। आज वही ईरान अमेरिका और इजराइल की नींद उड़ाकर बैठ गया है और इसकी वजह बनी चीन के दो रहस्यमई विमान जो अचानक तेहरान में उतरते हैं। उस वक्त जब ईरान का एयरोस्पेस पूरी तरह बंद था तब दरअसल कल अचानक ईरान ने नोटम जारी किया मतलब पूरा एयररोस्पेस नो फ्लाई जोन घोषित सभी सिविल विमान बाहर इंटरनेशनल फ्लाइट डाइवर्ट और रडार स्क्रीन लगभग खाली 4 घंटे तक पूरा ईरानी आसमान शांत लेकिन इसी शांति में छिपा था सबसे बड़ा तूफान जैसे ही ईरान ने स्पेस बंद किया इजराइल के सभी एयरबेस हाई अलर्ट पर हो गए आयरन डोम डेविड स्लिंग एरो सिस्टम एक्टिव हो इजरयली एयरफोर्स पूरी तरह से स्टैंड बाय हो गई।
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उधर क़तर कुवैत और अल उदयद बेस से अमेरिकी ड्रोन और सर्विलांस ट्रेन एक्टिव हो गए। सबको लगने लगा ईरान अब फ्री एमटी स्ट्राइक करने जा रहा है। लेकिन असली कहानी यहां से शुरू होती है। जब पूरा ईरानी एयरस्पेस खाली था तभी रडार पर दो विमान दिखाई देते हैं। ध्यान दीजिए यह विमान ईरान के महान एयर के थे। लेकिन उड़ान भरी थी दक्षिणी चीन से एक गोंगझऊ से। दूसरा शियान इलाके से। अब सवाल उठता है कि जब एरोस्पेस बंद है तो यह दो विमान कैसे अंदर आए? दरअसल अमेरिका पहले से दावा करता रहा है कि महान एयर का इस्तेमाल आईआरजीसी के लिए हथियार, मिसाइल, कैश और मिलिट्री इक्विपमेंट ट्रांसपोर्ट के लिए होता है। यानी यह कोई साधारण कमर्शियल फ्लाइट नहीं मानी जाती है। चीन ने पहले ईरान को एयर डिफेंस सिस्टम दिया था लेकिन मिसाइल्स नहीं। अब कयास लगाए जा रहे हैं कि चीन ने उसी सिस्टम के लिए इंटरसेप्टर मिसाइल्स भेज दी हैं जो सीधे इस्तेमाल होती है F35 F16 क्रूज मिसाइल और ड्रोन अटैक रोकने में।
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