आखिर क्यों जिनपिंग की ताजपोशी से मची है दुनिया भर में खलबली? जानें 5 बड़े कारण

Jinping
prabhasakshi
अभिनय आकाश । Oct 16 2022 4:19PM

दुनिया के कई देशों में टेंशन है। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) की 20वीं नेशनल कांग्रेस ऐसे वक्त में हो रही है कि जब शी चिनफिंग के तथा व्यापक पाबंदियों और लॉकडाउन के जरिए कोविड-19 को बिल्कुल बर्दाश्त न करने की उनकी नीति के खिलाफ विरोध के सुर उठे हैं।

शी जिनपिंग एक बार फिर चीन के राष्ट्रपति बनने के लिए तैयार हैं। जिनपिंग को आधिकारिक रूप से तीसरी बार राष्ट्रपति जल्द ही घोषित कर दिया जाएगा। हालांकि शी जिनपिंग की ताजपोशी को लेकर दुनियाभर में खलबली मची हुई है। दुनिया के कई देशों में टेंशन है।  कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) की 20वीं नेशनल कांग्रेस ऐसे वक्त में हो रही है कि जब शी चिनफिंग के तथा व्यापक पाबंदियों और लॉकडाउन के जरिए कोविड-19 को बिल्कुल बर्दाश्त न करने की उनकी नीति के खिलाफ विरोध के सुर उठे हैं जो अपने आप में विरले है। इन पाबंदियों के कारण दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में मंदी आ रही है। 

इसे भी पढ़ें: US वाईस प्रेसिडेंट कमला हैरिस से एनुअल JJ रिसेप्शन टेक्सास के दौरान मुलाकात की NTV अमेरिका के चेयरमैन नवरोज़ प्रासला ने

साउथ चाइना सी

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पूरे साउथ चाइना सी पर जापान का कब्जा था। जापान जंग हारा तो चीन ने समुंद्र के इस टुकड़े पर कब्जा कर लिया। दशकों से चीन साउथ चाइना सी पर अपना दावा ठोकता आया है। खासकर जिनपिंग के सत्ता में आने के बाद बारूद और धधकने लगा। जिनपिंग की ताजपोशी से आक्रमकता और बढ़ सकती है। इसकी वजह है कि चीन साउथ चाइना सी में किसी का दखल नहीं चाहता है। 

ताइवान पर चीन की नजर

जिनपिंग की ताजपोशी से ताइवान भी टेंशन में है। ऐसा इसलिए कि चीन और ताइवान के बीच की तल्खी बहुत पुरानी है। चीन ताइवान पर अपना हक जमाता आया है। जिनपिंग के सत्ता में आने के बाद से ही ताइवान की फिजाओं में दहशत है। यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद चीनी आक्रामकता और बढ़ी। ताइवान के बॉर्डर पर रेड आर्मी का बड़ा मूवमेंट भी देखा गया। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की बैठक में शी जिनपिंग ने अपने इरादे भी जाहिर कर दिया। उन्होंने कहा कि ताइवान को अपने देश में शामिल करने के लिए चीन कुछ भी करेगा। चाहे इसके लिए अपनी सेना भी ताइवान में उतारनी पड़े तो चीन इससे पीछे नहीं हटेगा।

इसे भी पढ़ें: बाइडेन के बयान पर भड़का पाकिस्तान, इमरान बोले- अमेरिका ही पूरी दुनिया में युद्ध में रहा शामिल, इस्लामाबाद ने न्यूक्लियर दुनिया में कभी नहीं दिखाई आक्रामकता

एलएसी पर बढ़ेगा तनाव

जिनपिंग की ताजपोशी भारत के लिए भी खतरे की घंटी है। ऐसा इसलिए क्योंकि पिछले दस सालों में चीन की दादागिरी की पूरी पिक्चर भारत ने देखी भी और झेली भी है। जिनपिंग के ही सत्ता के दौर पर पहली दफा हिंसक झड़प देखने को मिली। इसी के साथ पिछले 40 सालों में पहली बार एलएसी पर गोली भी चली। लद्दाख में पैंगोंग लेक झील पर पुल बनाने से लेकर अरुणाचल में रेलवे नेटवर्क तैयार करना चीन की साजिशों का सबूत है। 

अमेरिका से बढ़ेगी और तल्खी

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की तरफ से साफ कहा गया है कि चीन की तरफ से ताइवान को लेकर की गई किसी भी हरकत की स्थिति में अमेरिका उसकी सुरक्षा करेगा। अमेरिकी कांग्रेस की स्पीकर नैंसी पेलोसी के ताइवान दौरे के  बाद से ही अमेरिका और चीन के संबंध बेहद तल्ख हैं। दोनों ही तरफ से बयानबाजी और धमकी का दौर लगातार जारी है।  जिनपिंग ने कांग्रेस अधिवेशन के पहले दिन ही साफ कर दिया की ताइवान में विदेशी दखल बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 

इसे भी पढ़ें: उत्तरी कोरिया और दक्षिणी कोरिया के बीच दुश्मनी कैसे शुरू हुई? रूस और अमेरिका ने कैसे जलाई देश के बंटवारे की चिंगारी

चीन में जिनपिंग के खिलाफ विद्रोह

पांच साल में एक बार होने वाली इस कांग्रेस के मद्देनजर सोशल मीडिया पर प्रसारित तस्वीरों में राजधानी बीजिंग के उत्तर पश्चिम में ऐसे बैनर लटके हुए देखे गए जिसमें शी की कोविड नीति और निरंकुश शासन का विरोध किया गया था। बीजिंग में विश्वविद्यालयों और प्रौद्योगिकी कंपनियों के गढ़ हैदियां जिले में एक पुल पर लगे बैनरों में लिखा हुआ था, ‘‘भोजन, न कि कोविड जांच, सुधार, न कि सांस्कृतिक क्रांति, आजादी, न कि लॉकडाउन, वोट, न कि नेता, प्रतिष्ठा, न कि झूठ, नागरिक, न कि गुलाम।’’ ऐसे बैनर लगाए जाने के बाद बीजिंग में सुरक्षा और कड़ी कर दी गयी है। 

We're now on WhatsApp. Click to join.
All the updates here:

अन्य न्यूज़