Wedding Shubh Muhurat: जून में शादी के लिए सिर्फ 9 शुभ तारीखें, देखें पूरी Dates List

Wedding Shubh Muhurat
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अधिकमास समाप्त होने के बाद 19 जून से शादी-विवाह जैसे मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो रही है, लेकिन इस महीने विवाह के लिए केवल 9 शुभ मुहूर्त ही बचे हैं, जिसके बाद चातुर्मास के कारण 4 महीने का लंबा इंतजार करना होगा।

आखिकार अधिकमास का महीना खत्म हो चुका है। इसको मलमास भी कहा जाता है, जो हर तीन साल में एक  बार आता है और इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। अब अधिकमास का महीना खत्म हो चुका है, अब सभी शुभ और मांगलिक कार्यों की शुरुआत होगी। मलमास में कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता है बस ईश्वर भक्ति व दान-पुण्य के कार्य किए जाते हैं। 

कब से शुरुआत हो रही है शुभ कार्यों की?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, अधिकमास या पुरुषोत्तम मास में शादी-विवाह जैसे बड़े मांगलिक कार्यों पर रोक लगाई जाती है। ज्योतिषी भी मानते हैं कि यह पूरा महीना भगवान विष्णु की भक्ति के लिए समर्पित है। इस दौरान पूजा-पाठ और दान-पुण्य के कार्य करना शुभ माना जाता है, लेकिन विवाह, गृह प्रवेश या मुंडन के कार्यों पर रोक लग जाती है।

अधिकमास की समाप्ति 15 जून को हो चुकी है। इसके समाप्त होते ही सभी मंगल कार्य फिर से शुरु किए जा रहे हैं और चारों तरफ उत्सव का माहौल बना हुआ है।

19 जून से होंगी शादियां

अधिकमास खत्म होते ही 19 जून से शादियों का सीजन शुरु हो रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस बार विवाह के बंधन के लिए परिवारों को बहुत ही सीमित समय मिल रहा है। इस बार 19 जून से शुरु होकर महीने के अखिरी तक कुल 9 बहुत ही शुभ मुहूर्त विवाह के बन रहे हैं। जिन परिवारों में शादी होनी है, उन्हें इसी कम समय में अपने सारे आयोजन निपटाने होंगे।

जानें शादी-विवाह का मुहूर्त

अगर आप जून में शादी करने की योजना बना रहे हैं, तो ये तारीखें बेहद शुभ मानी जा रही है- 19, 20, 23, 24, 25, 26, 27, 28 और 29 जून। इन शुभ तिथियों में फेरे लेना दूल्हा-दुल्हन के वैवाहिक जीवन के लिए काफी सुखद और मंगलकारी रहने वाला है। 

इसके बाद 4 महीने बाद होगी शादियां

जून के बाद जुलाई में भी 12 तारीख तक ही शादी के मुहर्त है और इस वेडिंग सीजन के बाद, शुभ कार्यों पर एक बार फिर से 4 महीने का लंबा ब्रेक लग जाएगा। 25 जुलाई से चातुर्मास की शुरुआत हो रही है, जो 21 नवंबर तक चलेगा।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन चार महीनों में भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और पाताल लोक में विश्राम करते हैं। क्योंकि सृष्टि के कर्ता-धर्ता इस अवधि में विश्राम करते हैं, इसलिए इस अवधि में शादी, मुंडन या नया घर नहीं खरीदा जाता। 

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