Shravan Month Special: महादेव को क्यों प्रिय है रुद्राक्ष? जानें 14 Mukhi Rudraksha की महिमा और Importance

Rudraksha
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रुद्राक्ष की उत्पत्ति और उसके आध्यात्मिक महत्व का विश्लेषण करते हुए यह स्पष्ट होता है कि यह केवल एक बीज नहीं बल्कि उच्च चेतना का प्रतीक है। भगवान शिव के आंसुओं से उत्पन्न इस पवित्र तत्व का वैज्ञानिक और धार्मिक आधार पर अध्ययन करने से इसके मानसिक एवं शारीरिक लाभों की पुष्टि होती है। सावन के मास में रुद्राक्ष धारण करने के ज्योतिषीय पहलुओं और विभिन्न मुखी रुद्राक्षों के प्रभाव को समझना शिव भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

सावन का महीना चल रहा है। श्रावण मास भगवान शिव को समर्पित है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि महादेव की पूजा में रुद्राक्ष का बहुत बड़ा और खास महत्व क्यों माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से हुई है, इसलिए रुद्राक्ष को अत्यंत पवित्र और चमत्कारी माना जाता है। 

माना जाता है कि रुद्राक्ष को धारण करने से न सिर्फ मन को शांति मिलती है बल्कि भगवान शिव की विशेष कृपा भी प्राप्त होती है। इसलिए आध्यात्मिक साधना करने वाले लोग और शिव भक्त रुद्राक्ष को अपने गले या शरीर पर जरुर धारण करते हैं। आइए आपको इसकी उत्पत्ति और इसके पीछे का महत्व।

 

रुद्राक्ष का पेड़ कहां पाया जाता है?

रुद्राक्ष का पेड़ हिमालय की तलहटी, गंगा के मैदानी इलाकों और इंडोनेशिया और पापुआ- न्यू गिनी समेत दक्षिण-पूर्व एशिया के क्षेत्रों में पाया जाता है। दरअसल, रुद्राक्ष के बीजों को ब्लूबेरी सीड्स भी कहा जाता है क्योंकि जब इनका बाहरी आवरण पूरी तरह पक जाता है, तो यह नीले रंग का होता है। सनातन धर्म भगवान शिव को अक्सर नीले रंग में दर्शाया गया है, जो अनंतता का प्रतीक है। भगवान शिव से जुड़ा होने के कारण यह बीज आध्यात्मिक साधकों के बीच खास महत्व रखता है। वैसे इस पेड़ का वैज्ञानिक नाम एलायोकैपर्स गैनीट्रस कहा जाता है। 

रुद्राक्ष का अर्थ

ऋग्वेद के मुताबिक, रुद्राक्ष का अर्थ दुख और द्रव्यति का अर्थ मिटाना है। जिसका अर्थ है कि जो हमारे दुखों को पूरी तरह मिटाते हैं। श्वेताश्वतरोपनिषद में, सर्वोच्च चेतना (ब्रह्म) को ही रुद्र के रुप में पहचाना गया है।

रुद्राक्ष की उत्पत्ति कैसे हुई?

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, एक बार भगवान शिव लंबी तपस्या में लीन थे। जब वे लंबे समय बाद जागे, तो उनकी आंखों से धरती पर कुछ आंसू टपक पड़े। वैसे ये आंसू बीज में बदल गए और इससे एक पेड़ उत्पन्न हुआ, जिसे 'रुद्राक्ष का पेड़' कहा गया। इसके बाद, भगवान शिव द्वारा इन बीजों को विशेष शक्तियां प्रदान की गई है।

रुद्राक्ष शब्द का अर्थ है रुद्र के आंसू। जो भक्त जन रुद्राक्ष पहनते हैं उन्हें आध्यात्मिक सुरक्षा प्रदान होती है और जीवन की हर बाधा का सामना करने की शक्ति देता है। शिव पुराण के अनुसार, रुद्राक्ष धारण करने वाला मनुष्य भगवान शिव के समान ऊर्जा और पवित्रता प्राप्त करता है।

रुद्राक्ष के प्रकार मुखी और उनका महत्व

  - 1 मुखी रुद्राक्ष- इस रुद्राक्ष के देवता भगवान शिव स्वयं है। इसे पहनने से इंसान को परम चेतना और आत्म-जागरुकता का ज्ञान प्रदान होता है।

 - 2 मुखी रुद्राक्ष- यह वाला रुद्राक्ष शिव और शक्ति के सम्मिलित रुप 'अर्धनाहरीश्वर' का प्रतीक है। यह जीवन में आपसी तालमेल, एकता और गुरु-शिष्य के रिश्ते को मजबूत बनाता है।

 - 3 मुखी रुद्राक्ष- यह देवता अग्नि देव हैं। जो कि पिछले जन्मों या कर्मों के बंधन और पापों से मुक्ति दिलाने में मदद करता है।

 - 4 मुखी रुद्राक्ष- इस रुद्राक्ष के अधिष्ठाता देव गुरु बृहस्पति हैं। जो साधक उच्च ज्ञान और विद्या की तलाश करने वाले साधकों के लिए बहुत ही फायदेमंद है।

 - 5 मुखी रुद्राक्ष- यह 'कालाग्नि रुद्र' का रुप माना जाता है। जो व्यक्ति इसको धारण करता है, उसकी आंतरिक चेतना जागृत हो जाती है। 

 - 6 मुखी रुद्राक्ष- इसके देवता भगवान कार्तिकेय हैं। इसके धारण से जीवन में संतुलन के साथ-साथ मानसिक और भावनात्मक स्थिरता प्रदान करती है।

 - 7 रुद्राक्ष- धन की देवी माता लक्ष्मी इसका प्रतिनिधित्व करती हैं। यह हेल्द सुधारने के साथ-साथ धन और समृद्धि के रास्ते खोलता है।

 - 8 मुखी रुद्राक्ष- इस रुद्राक्ष के देवता प्रथम पूज्य भगवान गणेश हैं। यह जीवन के सभी प्रकार के विघ्नों और बाधाओं को दूर करता है। 

- 9 मुखी रुद्राक्ष- देवी मां दुर्गा इस रुद्राक्ष की अधिष्ठाता हैं। यह ऊर्जा और पराक्रम का प्रतीक है और सांसारिक सुख और मोक्ष दोनों प्राप्त करने में मदद करता है।

 - 10 मुखी रुद्राक्ष- इसके देवता भगवान कृष्ण है। यह सबसे शक्तिशाली रुद्राक्षों में से एक है, जो जीवन में प्रेम और शांति लेकर आता है।

 - 11 मुखी रुद्राक्ष- ग्यारह रुद्र इसके देवता है। वैसे यह रुद्राक्ष कुंडली में ग्रहों के बुरे प्रभावों और नकारात्मक असर को कम करता है। 

 - 12 मुखी रुद्राक्ष- इसके अधिष्ठाता सूर्य देव है। यह व्यक्ति में तेज, आत्मविश्वास और ऊर्जा प्रदान करता है और हीन भावना को दूर करके खुद को प्रेरित करता है।

 - 13 मुखी रुद्राक्ष-  वैसे इस रुद्राक्ष का देवता कामदेव हैं। यह आकर्षण क्षमता को बढ़ाता है और कुंडलिनी जागरण व अन्य सिद्धियों को प्राप्त करने में मदद करता है।

 - 14 मुखी रुद्राक्ष- संकटमोचन भगवान हनुमान इस रुद्राक्ष के देवता हैं। यह अटूट साहस, बहादुरी और दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रतीक है। 

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