'नागपंचमी' के दिन बरतें यह सावधानी, राहु-केतु की दशा हो तो करें उपाय

'नागपंचमी' के दिन बरतें यह सावधानी, राहु-केतु की दशा हो तो करें उपाय

आप नाग पंचमी की पूजा करने जा रहे हैं तो सर्वप्रथम आपको भगवान शिव की आराधना करनी चाहिए, उसके बाद ही नागों की पूजा करनी चाहिए अन्यथा आप को नागपंचमी का लाभ नहीं मिलेगा।

नाग अनंत काल से ही हमारी पृथ्वी का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। वेदों तक में नागों के कई वर्णन सुनने को मिलते हैं। त्रेता युग में लक्ष्मण जी के रूप में शेष नाग देवता प्रकट हुए थे, तो वहीं द्वापर युग में बलराम जी का रूप धर के वह अवतरित हुए थे। 

हम सब जानते ही होंगे कि हमारे धर्म ग्रंथों में 12 प्रकार के नागों का वर्णन किया गया है और इनके कुलों की चर्चा की गई है। हालाँकि, सिर्फ 8 तरह के नागों की पूजा की परंपरा रही है, जिनमें अनंत (शेष), वासुकि, तक्षक, कर्कोटक, पद्म, महापद्म, शंख और कुलिक का वर्णन मिलता है। इसके साथ ही नाग माता की पूजा की भी परंपरा चली रही है, जिसमें नाग माता कद्रू, नाग माता मनसा देवी, बलराम पत्नी रेवती, बलराम माता रोहिणी और सर्पो की माता सुरसा की पूजा की जाती है।

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सावन के शुक्ल पक्ष में पंचमी तिथि को नागों की विशेष पूजा की बात कही गई है और इस दिन समस्त भारत में नाग देवताओं की पूजा की जाती है। आध्यात्मिक शक्ति और धन की प्राप्ति के लिए नाग पंचमी पर खास तौर पर नाग देवता की पूजा की जाती है। 

पूजा करने की विधि-

सुबह उठकर स्नान करने के बाद सबसे पहले भगवान शिव की पूजा की जाती है, जिसमें बेल-पत्र, दूध और जल चढ़ाया जाता है। इसके बाद हल्दी, रोली, चावल और फूलों के साथ खील बतासे और कच्चे दूध के साथ नागों की पूजा की जाती है। अगर आप के आस पास नाग देवता उपलब्ध नहीं हैं, तो आप नाग के प्रतीकात्मक रूप की पूजा कर सकते हैं। भारत में कई जगहों पर घर के मुख्य द्वार पर मिट्टी, गोबर और गेरू से नागों की आकृति बनाई जाती है और उसकी पूजा की जाती है। हमारे देश में मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन घर के आसपास सांप की आकृति बनाने से घर पर आने वाली विपदा टल जाती है और मनुष्य को आर्थिक लाभ भी प्राप्त होता है। 

नाग पंचमी के दिन पूजा में रखने वाली सावधानियां 

आप नाग पंचमी की पूजा करने जा रहे हैं तो सर्वप्रथम आपको भगवान शिव की आराधना करनी चाहिए, उसके बाद ही नागों की पूजा करनी चाहिए अन्यथा आप को नाग पंचमी का लाभ नहीं मिलेगा।

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इसके साथ ही नाग पंचमी के दिन भूमि की खुदाई नहीं करनी चाहिए और साग की कटाई भी नहीं करनी चाहिए। साथ ही इस दिन धरती पर हल चलाना वर्जित रहता है, तो वहीं कई जगहों पर सुई में धागा डालना तक भी वर्जित किया गया है। भारत के कई क्षेत्रों में नाग पंचमी के दिन चूल्हे पर लोहे की कड़ाही और लोहे के तवे को रखना वर्जित किया गया है। 

नागपंचमी के दिन नाग को दूध पिलाने की बजाय दूध से स्नान कराना चाहिए। 

नाग पंचमी के लिए अचूक उपाय 

सपने में सांप आए तो क्या करें? 

अगर आपको सांपों के सपने आते हैं और आप सपने में सांप को देखकर डर जाते हैं, तो नाग पंचमी के दिन आपको चांदी के दो सांप बनवाने चाहिए तथा साथ ही एक स्वस्तिक की आकृति भी बनानी चाहिए। इनको पूजा अर्चना के बाद गरीबों या मंदिर में दान कर देना चाहिए। 

राहु-केतु की दशा हो तो करें उपाय 

अगर आपके ऊपर राहु और केतु की दशा है तो नाग पंचमी के दिन एक रस्सी लें और उसमें 7 गाठें लगाकर उसे सर्प की आकृति दे दें। अब इसे एक थाली में रखकर अच्छे से पूजा करें। राहु के मंत्र 'ऊं रां राहवे नमः' और केतु के मंत्र 'ऊं कें केतवे नम:' का जाप बराबर संख्या में करें।

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उसके बाद आप भगवान शिव का ध्यान करते हुए रस्सी के एक एक गांठ को धीरे-धीरे खोलते जाएं और किसी बहते हुए जल में इस रस्सी को प्रवाहित कर दें। कहा जाता है कि इस उपाय से आपके ऊपर राहु और केतु की दशा हट जाएगी। 

- विंध्यवासिनी सिंह