अष्टमी या नवमी, कब खोलें शारदीय नवरात्र का व्रत? नोट करें सही डेट और पारण विधि

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शारदीय नवरात्रि व्रत का पूर्ण फल पाने के लिए पारण सही विधि और शुभ मुहूर्त में करना आवश्यक है। परंपरा अनुसार साधक 19 अक्टूबर को अष्टमी या 20 अक्टूबर को नवमी के दिन व्रत खोल सकते हैं। इसके लिए मां दुर्गा की विधिवत पूजा और कन्या पूजन करने के बाद प्रसाद व सात्विक भोजन ग्रहण कर पारण करें।

शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरुपों की पूजा-अर्चना और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए अधिक शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवी की सच्चे मन से साधना करने से मां दुर्गा की असीम कृपा प्राप्त होती है। इसके साथ ही साहस, मानसिक शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

मान्यता के अनुसार, नवरात्र व्रत का पारण हमेशा सही विधि और शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए, तभी साधक को नौ दिनों के व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है। आइए जानते है कि शारदीय नवरात्र व्रत का पारण कब और कैसे करें।

कब करें शारदीय नवरात्र व्रत का पारण?

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार 19 अक्तूबर को महाष्टमी और 20 अक्तूबर को महानवमी मनाई जाएगी। इस बार नवरात्र व्रत का पारण करने की परंपरा अलग-अलग परिवारों व मान्यताओं के अनुसार भिन्न है। कुछ लोग अष्टमी के दिन कन्या पूजन करते हैं, वे इस अनुष्ठान के बाद व्रत खोलें। जो लोग महानवमी के दिन कन्या पूजन करते हैं, वे लोग नवमी के समापन पर विधिपूर्वक व्रत का पारण करें।

महाअष्टमी 2026
अष्टमी नवरात्र पारण: 19 अक्टूबर, सोमवार
अष्टमी तिथि प्रारंभ: 18 अक्टूबर, सुबह 08 बजकर 27 मिनट से
अष्टमी तिथि समाप्त: 19 अक्टूबर, सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक

महानवमी 2026
नवरात्र पारण: 20 अक्टूबर, मंगलवार
नवमी तिथि प्रारंभ: 19 अक्टूबर, सुबह 10 बजकर 51 मिनट से
नवमी तिथि समाप्त: 20 अक्टूबर, दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक

शारदीय नवरात्रि का व्रत पारण की विधि

- अष्टमी या नवमी तिथि के दिन शारदीय नवरात्र व्रत का पारण करना चाहिए।

- पारण वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र को धारण करें।

- इसके बाद घर के मंदिर की साफ-सफाई करके दीपक को प्रज्वलित करें।

- फिर मां दुर्गा की विधिवत धूप, दीप, अक्षत रोली और पुष्प अर्पित कर पूजा करें।

- देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें।

- दुर्गा चालीसा का पाठ करें और मां के बीज मंत्रों का जप करें।

- अब माता रानी को हलवा, पूरी और काले चने का सात्विक भोग लगाएं।

- फिर कन्या पूजन करें और आदरपूर्वक कन्याओं को भोजन करें।

- भोजन कराने के बाद कन्याओं को दक्षिणा व उपहार देकर उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।

- आखिर में माता रानी के चरणों में आर्पित प्रसाद और चरणामृत ग्रहण करें।

- फिर सात्विक भोजन ग्रहण करके अपना व्रत का पारण करें।

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