धनु राशि के जातकों का वर्ष 2021 में कैसा रहेगा भविष्यफल, जानिए

  •  अनीष व्यास
  •  दिसंबर 26, 2020   15:48
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धनु राशि के जातकों का वर्ष 2021 में कैसा रहेगा भविष्यफल, जानिए

व्यापार के स्वामी बुध सूर्य देव के साथ मिलकर साल 2021 की शुरुआत में आपकी राशि में बेहद शुभ योग का निर्माण कर रहे हैं। जिसके कारण धनु राशि के जातकों को इस वर्ष अपने कॅरियर में अनुकूल परिणाम मिलेंगे।

ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि वैदिक ज्योतिष पर आधारित भविष्यफल पढ़ने के बाद आप साल 2021 में होने वाली सभी प्रकार के घटना-दुर्घटना से पूर्व में ही परिचित हो जाएंगे और आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि आप नए वर्ष की पूरी योजना बनाने में सफल रहेंगे। यह भविष्यवाणी चन्द्र राशि, लग्न तथा वैदिक ज्योतिष के आधार पर किया गया है। इस वार्षिक राशिफल को छह अलग-अलग विषयों में बाँटकर प्रस्तुत किया जा रहा है। इसमें कॅरियर, आर्थिक स्थिति, परिवार, प्रेम-रोमांस, शिक्षा और स्वास्थ्य शामिल है।

आइये विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास से जानते है कि नववर्ष 2021 में धनु राशि का राशिफल कैसा रहेगा।

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ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि साल 2021 आपके कॅरियर की दृष्टि से बहुत अच्छा रहेगा। दोस्तों की मदद से अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे। बिजनेस कर रहे जातकों के लिए भी यह वर्ष शुभ रहने वाला है। उन्हें व्यापार में बहुत सफलता मिलेगी, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होने के संकेत हैं। साल 2021 में आपका स्वास्थ्य मिला-जुला रहेगा, स्वास्थ्य जीवन पिछले वर्ष के अनुसार काफी अच्छा होगा। हालांकि शनि देव आपकी परीक्षा लेते हुए बीच-बीच में आपको कुछ कष्ट देते रहेंगे, लेकिन आपको कोई बड़ा रोग इस वर्ष नहीं होगा। इसके साथ ही आपके द्वादश भाव में केतु की दृष्टि, आपको बुख़ार, फोड़े-फुंसी जैसी छोटी समस्याएं देंगी, लेकिन इनका असर आपके कार्य पर न के बराबर पड़ेगा। प्रेम संबंधों के लिए भी यह अवधि काफी अच्छी रहेगी और आप अपने प्रियतम के साथ संबंधों में निकटता का अनुभव करेंगे। दांपत्य जीवन भी काफी अच्छा रहेगा और आपके लाइफ पार्टनर के साथ आपका तालमेल बेहतर रहने से आप दाम्पत्य जीवन का आनंद लेंगे। इस साल आपकी संतान भी उन्नति प्राप्त करेगी। इस वर्ष आपको जायदाद से संबंधित काफी अच्छे लाभ प्राप्त होंगे और आपका पारिवारिक जीवन भी काफी हद तक लाभकारी रहेगा। 

कॅरियर 

व्यापार के स्वामी बुध सूर्य देव के साथ मिलकर साल 2021 की शुरुआत में आपकी राशि में बेहद शुभ योग का निर्माण कर रहे हैं। जिसके कारण धनु राशि के जातकों को इस वर्ष अपने कॅरियर में अनुकूल परिणाम मिलेंगे। यह समय व्यापारी लोगों के लिए भी शुभ रहेगा। कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि खासतौर से वो जातक जो अपना बिजनेस ऑनलाइन कर रहे हैं, उन्हें बहुत से शुभ अवसर मिलने की संभावना है। वर्ष की शुरुआत आपके लिए व्यवसाय और कॅरियर में कुछ उतार-चढ़ाव का कारण बन सकती है। इसलिए आपको कार्यक्षेत्र में उन्नति और लाभ प्राप्ति में कुछ समस्याएं आने की आशंका है। ग़ौरतलब है कि यह सभी समस्याएं अप्रैल तक ही रहेंगे उसके बाद आपको पुनः लाभ मिलना फिर से शुरू हो जाएगा। नौकरी पेशा जातकों को भी इस दौरान, भरपूर तरक्की और पदोन्नति मिलने की संभावना रहेगी। यदि आप प्रापर्टी का व्यापार करते हैं तो, आपको शुरुआत से ही सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। ऐसे में सही विचार और पूछताछ के बाद ही, अपने रुपये का निवेश करना आपके लिए शुभ रहेगा, अन्यथा आपको कोई बड़ी हानि भी उठानी पड़ सकती है।

आर्थिक स्थिति 

धन और समृद्धि के स्वामी सूर्य का वर्ष की शुरुआत में आपकी ही राशि में होना, आपको धन की कमी नहीं होने देगा। इसलिए धनु राशि के लोगों के आर्थिक जीवन के लिए वर्ष 2021 बेहद लाभकारी रहने वाला है। कुंडली के द्वादश भाव में शुक्र और केतु की युति भी, आपकी आर्थिक स्थिति के लिए मजबूती का मुख्य कारण बनेगी। कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि इससे बिजनेसमैन और नौकरी करने वाले दोनों ही जातकों को, बहुत धन लाभ हो सकेगा। आर्थिक जीवन के दृष्टिकोण से, आपके लिए यह साल बेहद अच्छे रहने वाला हैं। साथ ही धन और परिवार के दूसरे भाव में गुरु बृहस्पति और शनि की युति, आपको निरंतर धन लाभ होने में मदद करेगी। इससे आप अपने धन को संचय करने में भी सक्षम होंगे, जिसके परिणामस्वरूप आपका आर्थिक पक्ष मजबूत होगा और आपको अपने जीवन में आ रही हर प्रकार की आर्थिक तंगी से निजात भी मिल सकेगी। आपके आभूषण और सुख-सुविधा में वृद्धि लेकर आएगा। साथ ही ये समय आपको पैतृक संपत्ति प्राप्त करने के संकेत भी दे रहा है।

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परिवार 

ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि धनु राशि के जातकों के लिए वर्ष 2021 परिवार के लिहाज से ख़ासा अनुकूल परिणाम लेकर आ रहा है। इस वर्ष कुंडली के दूसरे भाव में शनि देव की उपस्थिति और उनका इस दौरान आपके चतुर्थ भाव को दृष्टि करना, आपको पैतृक संपत्ति प्राप्त होने के योग बनाएगा। दूसरे भाव में शनि का गोचर होने से आपको अपने अहंकार को अलग रखते हुए, अपनी वाणी में संयम लाने की ओर अधिक प्रयास करने होंगे। इस दौरान अपने परिवार का सहयोग करना भी, आपको पारिवारिक शांति बनाए रखने और उससे अच्छे परिणाम प्राप्त करने में मददगार सिद्ध होगा। परिवार के सदस्यों का भाईचारा और एक दूसरे के प्रति उनका समर्पण, पारिवारिक शांति और खुशहाली को सुनिश्चित करेगा। हालांकि धनु आपके छठे भाव में छाया ग्रह राहु का प्रभाव, आपको अपने दुश्मनों और विरोधियों को परास्त करने में मदद करेगा। जिससे आपकी सामाजिक स्थिति भी बेहतर हो सकेगी। वर्ष की शुरुआत पारिवारिक जीवन के लिहाज से सबसे अधिक अनुकूल रहेगी। इस साल अपने वैवाहिक जीवन में अत्यंत अनुकूल परिणाम मिलेंगे। मार्च के महीने में आपको अपने परिवार के साथ बाहर घूमने पर जाने का अवसर मिलेगा। हालांकि यह यात्रा छोटी दूरी की यात्रा होगी, जिस दौरान आपको अपने जीवनसाथी के करीब आने में सफलता मिल सकेगी।

प्रेम-रोमांस 

आने वाला नया वर्ष प्रेमियों के लिए मिश्रित परिणाम लेकर आएगा। इस समय आपको अपने अच्छे प्रेम संबंध स्थापित करने के लिए, कई शुभ अवसरों की प्राप्ति होगी। हालांकि इस समय आप अत्यधिक भावुक और संवेदनशील होंगे। कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि कई प्रेमी जातक फरवरी के महीने में प्रियतम संग, कुछ समय के लिए छुट्टी पर जाने का प्लान भी कर सकते हैं। इस यात्रा के दौरान आप दोनों को बातचीत से, अपने रिश्ते में आ रही हर ग़लतफहमी को हल करने में मदद मिलेगी। आपके पंचम भाव में लाल ग्रह मंगल की उपस्थिति कई प्रेमी जातकों के जीवन में विवाद की स्थिति को जन्म दे सकती है। क्योंकि मार्च का महीना प्रेमी संग आपके रिश्ते में कुछ खटास लेकर आएगा, इसलिए आपको अपने गुस्से पर नियंत्रण रखने और प्रियतम से बातचीत करते समय, अपने शब्दों का चयन सोच-समझकर करने की सलाह दी जाती है। हालांकि अप्रैल, जुलाई और सितंबर का महीना, धनु राशि के प्रेम संबंधों के लिए बेहद फ़ायदेमंद साबित होगा।

शिक्षा

साल 2921 शुभ परिणाम लेकर आ रहा है। क्योंकि इस दौरान शिक्षा के स्वामी की उपस्थिति अपने स्वंय के भाव में होगी, जो इस बात की ओर इशारा करती है कि इस वर्ष आप अपनी शिक्षा में बिना किसी बाधा के सफलतापूर्वक आगे बढ़ते हुए, इच्छानुसार अंक प्राप्त कर सकेंगे। ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए भी यह वर्ष उत्तम रहेगा। इसके साथ ही यदि आप उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं तो, आपके लिए जनवरी, अप्रैल से मई और फिर सितंबर का महीना सबसे अधिक अनुकूल सिद्ध होंगे। क्योंकि इस दौरान आपको हर विषय को सही तरीके से समझने में, कोई ख़ासा कठिनाई नहीं आएगी। अध्ययन के उद्देश्य से विदेश जाने के इच्छुक छात्रों का सपना इस वर्ष दिसंबर और सितंबर के महीने में पूरा होने की संभावना है। क्योंकि इस दौरान कई शुभ ग्रहों की स्थिति से आपको लाभकारी परिणाम प्राप्त होंगे, जिससे आपको विदेशी कॉलेज या स्कूल में दाख़िला लेने में मदद मिलेगी।

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स्वास्थ्य 

धनु राशि के जातकों की स्वास्थ्य के लिहाज से वर्ष 2021 बेहद अनुकूल रहेगा। बुध और सूर्य देव की युति शुरुआत में आपकी राशि के प्रथम भाव में होने से, आपको किसी भी प्रकार की कोई बड़ी समस्या नहीं होगी। जिसके कारण आप बिना किसी मानसिक तनाव के कार्यक्षेत्र पर, आराम से काम कर सकेंगे। कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि यदि आप पेट और हृदय की किसी समस्या से पीड़ित हैं तो, इस वर्ष आपको तत्काल उपचार करने की जरूरत होगी। आपके द्वादश भाव में छाया ग्रह केतु की उपस्थिति भी आपको इस वर्ष बुख़ार, फोड़े-फुंसी, खांसी-जुकाम जैसी छोटी-मोटी कुछ समस्याएं दे सकती है। संतुलित आहार अपनाने की भी, सलाह दी जाती है।

ज्योतिष उपाय

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि पीपल के वृक्ष को हर शनिवार के दिन जल अर्पित करें। गुरुवार के दिन मंदिर में जाकर केले के पेड़ की पूजा करें। हर शनिवार, सरसों के तेल और साबुत उड़द की दाल ग़रीबों और ज़रूरतमंदों को भेंट करें।

- अनीष व्यास

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक







पेड़-पौधे लगाने को लेकर क्या कहता हैं वास्तुशास्त्र? इन नियमों को जरूर जानें, होगी तरक्की

  •  विंध्यवासिनी सिंह
  •  फरवरी 20, 2021   13:47
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पेड़-पौधे लगाने को लेकर क्या कहता हैं वास्तुशास्त्र? इन नियमों को जरूर जानें, होगी तरक्की

अगर आपके ऊपर चंद्रमा की पीड़ा है, या चंद्रमा का कष्ट है, तो इस कष्ट को दूर करने के लिए आपको अपने घर के पास 'गूलर' का पौधा लगाना चाहिए। ऐसा करने से चंद्रमा के दुष्प्रभाव का असर आपके ऊपर कम हो जाता है।

प्राचीन समय से ही पेड़ पौधों की पूजा करना हमारी संस्कृति का हिस्सा रहा है और आज भी हम किसी न किसी रूप में पेड़ पौधे की पूजा अवश्य ही करते हैं। वह चाहे पीपल हो, तुलसी हो, समी हो या फिर बरगद का ही पेड़ क्यों ना हो, हमारे लिए काफी महत्त्व रखते हैं। 

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हमारे शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि हर मनुष्य को अपने जीवन काल में एक पेड़ अवश्य लगाना चाहिए। इतना ही नहीं, शास्त्र यह भी कहते हैं कि अगर किसी कारण वश कोई मनुष्य एक पेड़ काटता है, तो उसे 10 पेड़ लगाकर उनका पालन करने के उपरांत ही एक पेड़ काटने के पाप से मुक्ति मिल पाएगी। ऐसे में पेड़ लगाने की महत्ता कितनी है, इसे आप सहज ही समझ सकते हैं। 

अगर आप भी पेड़ लगाने का विचार अपने मन में ला रहे हैं, तो वास्तु में इसके कुछ नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करते हुए अगर वृक्षारोपण किया जाए, तो इसका सकारात्मक असर हमारे जीवन में देखने को मिलता है।

आईये जानते हैं ...

पेड़ लगाने का सही समय

वास्तु शास्त्र के अनुसार अगर आप पेड़ लगाने जा रहे हैं या बगीचे का निर्माण करने जा रहे हैं, तो इसके लिए आपको कुछ विशेष नक्षत्रों का इंतजार करना होगा। जिनमें स्वाति, उत्तरा, हस्त, रोहिणी और मूल नक्षत्र को सबसे सर्वोत्तम बताया गया है। अगर आप इन नक्षत्रों में पेड़ लगाते हैं तो यह पेड़ आपके जीवन में खुशहाली लेकर आएंगे।

पेड़ लगाते समय दिशा का ध्यान

अगर आप वृक्षारोपण करने जा रहे हैं, तो आपको यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि वह वृक्ष सही दिशा में लगें। अगर आपके घर में बगीचे के लिए जगह छोड़ी जा रही है, तो आप को ध्यान रखना चाहिए कि वह जगह वाम पार्श्व होना चाहिए। नेत्रत्व या अग्नि कोण में बगीचे का निर्माण करना अशुभ बताया जाता है और कहा जाता है कि इसका दुष्प्रभाव पूरे घर के ऊपर पड़ता है।

इसके साथ ही ध्यान देने वाली बात यह है कि घर के पूर्व दिशा में कभी भी बड़े और विशाल पेड़ पौधों को नहीं लगाना चाहिए। अगर भूलवश आपसे ऐसा हो गया है तो इस भूल के दुष्परिणाम को कम करने के लिए आपको घर के उत्तर दिशा में आंवला, हरश्रृंगार, तुलसी और अमलतास के पौधों का रोपण करना चाहिए।

वृक्ष फल नहीं दे रहे हों तो करें यह उपाय

अगर आपके घर के आस-पास फलदार वृक्ष लगे हुए हैं और वह फल नहीं दे रहे हैं, तो वास्तु शास्त्र के अनुसार इन पौधों या पेड़ों की जड़ों में मूंग, उड़द, कुलथी, तिल और जौ मिलाकर पानी तैयार करना चाहिए और इस पानी को वृक्षों की जड़ों में डालना चाहिए।

जमीन संबंधी परेशानी दूर करने के लिए

जिस जमीन पर आपका आवास बना हुआ है, उस पर यदि कोई दोष है, तो इस दोष को दूर करने के लिए आपको 'आंवले' का पौधा अपने आवास के आसपास ज़रूर लगाना चाहिए।

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चंद्रमा की पीड़ा को दूर करने के लिए

अगर आपके ऊपर चंद्रमा की पीड़ा है, या चंद्रमा का कष्ट है, तो इस कष्ट को दूर करने के लिए आपको अपने घर के पास 'गूलर' का पौधा लगाना चाहिए। ऐसा करने से चंद्रमा के दुष्प्रभाव का असर आपके ऊपर कम हो जाता है।

मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए

माता लक्ष्मी की कृपा आपके ऊपर बनी रहे, इसके लिए आपको अपने घर के पास बेल यानी कि बिल्व का पेड़ अवश्य लगाना चाहिए। कहा जाता है कि बेल के पेड़ पर माता लक्ष्मी का निवास होता है और घर के आस-पास इस पेड़ को अगर लगाया जाए, तो माँ लक्ष्मी आपसे प्रसन्न रहती हैं।

 घर के आसपास इन पेड़ - पौधों को लगाने से बचें

- अगर आपके घर के आसपास केला, बेर और बाँझ अनार के वृक्ष हों तो आपके ऊपर इनका नकारात्मक असर पड़ता है। कहा जाता है कि इन तीनों वृक्षों की वजह से आपकी संतान के ऊपर हमेशा कष्ट बना रहता है।

- इसके अलावा कैक्टस के पौधों को भी कभी भी अपने आवासीय परिसर में नहीं लगाना चाहिए। ऐसा करने से आप हमेशा शत्रु बाधा से गिरे रह सकते हैं और आपके ऊपर धन हानि का योग भी बना रहेगा।

- अपने आवासीय परिसर में कभी भी कंचन, पलाश, अर्जुन के पेड़ नहीं लगाने चाहिए। इन पेड़ों से नकारात्मक शक्ति निकलती है और यह अशांति के कारक होते हैं।

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हालाँकि पेड़ -पौधे हमारे जीवन दाता हैं। इनसे मिलने वाली ऑक्सीजन से ही हम ज़िंदा रहते हैं, इसलिए अपने आसपास अधिक से अधिक पेड़ पौधे लगाएं। लेकिन वास्तु के इन नियमों का ध्यान अवश्य रखें।

विंध्यवासिनी सिंह 







क्यों 'स्वाहा' बोले बिना नहीं मिलता है यज्ञ का फल

  •  विंध्यवासिनी सिंह
  •  फरवरी 2, 2021   16:16
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क्यों 'स्वाहा' बोले बिना नहीं मिलता है यज्ञ का फल

ऐसी ही एक कथा के अनुसार कहा जाता है कि 'स्वाहा' राजा दक्ष की पुत्री थीं, जिनका विवाह अग्निदेव के साथ संपन्न कराया गया था। इसीलिए अग्नि में जब भी कोई चीज समर्पित करते हैं, तो बिना स्वाहा का नाम लिए जब वह चीज समर्पित की जाती है, तो अग्निदेव उसे स्वीकार नहीं करते हैं।

भारत शुरू से ही ऋषि-मुनियों का देश रहा है। यहां होने वाले धार्मिक क्रियाकलाप का आयोजन ऋषि परंपरा की ही देन है।

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पहले के समय में तमाम ऋषि -धर्मात्मा यज्ञ, हवन जैसे धार्मिक अनुष्ठान के द्वारा मानवता के कल्याण के उपाय करते ही रहते थे। आज भी हम अपने घर में जब भी कोई शुभ कार्य होता है, तो यज्ञ- हवन जरूर कराते हैं। कहते हैं कि कोई भी पूजा-पाठ बिना हवन के संपन्न नहीं होता है। वहीं जब भी आप अपने घर में या कहीं भी हवन होते हुए देखते होंगे तो आपने एक बात पर गौर जरूर किया होगा कि हवन कुंड में हवन सामग्री डालने के बाद 'स्वाहा' शब्द बोलना अनिवार्य बताया जाता है।  

अगर आपको लगता है कि पंडित जी यूं ही 'स्वाहा' बोलने को कह रहे हैं, तो हम आपकी जानकारी के लिए बता दें, कि किसी भी यज्ञ में अगर 'स्वाहा' बोले बगैर यज्ञ सामग्री डाली जाती है तो वह यज्ञ सामग्री देवताओं को प्राप्त नहीं होती है। और हमारा यज्ञ अधूरा रह जाता है। 

आइये जानते हैं इसके पीछे का रहस्य...

हवन के समय 'स्वाहा' बोले के पीछे की प्राचीन कथा

हमारे धार्मिक ग्रंथों में 'स्वाहा' को लेकर तमाम तरह की किवदंती प्रचलित हैं।

ऐसी ही एक कथा के अनुसार कहा जाता है कि 'स्वाहा' राजा दक्ष की पुत्री थीं, जिनका विवाह अग्निदेव के साथ संपन्न कराया गया था। इसीलिए अग्नि में जब भी कोई चीज समर्पित करते हैं, तो बिना स्वाहा का नाम लिए जब वह चीज समर्पित की जाती है, तो अग्निदेव उसे स्वीकार नहीं करते हैं।

ऐसे ही एक और कथा प्रचलित है, जिसमें कहा जाता है कि प्रकृति की एक कला के रूप में स्वाहा का जन्म हुआ था, और स्वाहा को भगवान कृष्ण से यह आशीर्वाद प्राप्त था कि देवताओं को ग्रहण करने वाली कोई भी सामग्री बिना स्वाहा को समर्पित किए देवताओं तक नहीं पहुंच पाएगी। यही वजह है कि जब भी हम अग्नि में कोई खाद्य वस्तु या पूजन की सामग्री समर्पित करते हैं, तो 'स्वाहा' का उच्चारण करना अनिवार्य होता है।

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ऐसी ही एक अन्य कथा का वर्णन मिलता है, जिसमें यह बताया गया है कि एक बार देवताओं के पास अकाल पड़ गया और उनके पास खाने-पीने की चीजों की कमी पड़ने लग गई। इस विकट परिस्थिति से बचने के लिए भगवान ब्रह्मा जी ने यह उपाय निकाला कि धरती पर ब्राह्मणों द्वारा खाद्य-सामग्री देवताओं तक पहुंचाई जाए। 

इसके लिए अग्निदेव का चुनाव किया गया, क्योंकि यह ऐसी चीज है जिसमें जाने के बाद कोई भी चीज पवित्र हो जाती है। हालांकि अग्निदेव की क्षमता उस समय भस्म करने की नहीं हुआ करती थी, इसीलिए स्वाहा की उत्पत्ति हुई और स्वाहा को आदेश दिया गया कि वह अग्निदेव के साथ रहें। इसके बाद जब भी कोई चीज अग्निदेव को समर्पित किया जाए तो स्वाहा उसे भस्म कर देवताओं तक उस चीज को पहुंचा सके। 

यही कारण है कि जब भी अग्नि में कोई चीज हवन करते हैं, तो 'स्वाहा' बोलकर इस विधि को संपूर्ण की जाती है, ताकि खाद्य पदार्थ या हवन की सामग्री देवताओं को सकुशल पहुंच सके।

तो ये हैं वह कारण, जिसके चलते हवन में डाली सामग्री के बाद 'स्वाहा' बोलना धार्मिक रूप से अनिवार्य होता है।

- विंध्यवासिनी सिंह







जीवन में आये संकट दूर करने हेतु पति-पत्नी करें भगवान बृहस्पति की पूजा

  •  विंध्यवासिनी सिंह
  •  जनवरी 23, 2021   18:11
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जीवन में आये संकट दूर करने हेतु पति-पत्नी करें भगवान बृहस्पति की पूजा

गुरुवार के दिन भगवान विष्णु को भोग के रूप में भीगे हुए चने और मुनक्के चढ़ाने से भगवान जल्दी प्रसन्न होते हैं, और आपकी सभी मनोकामना को पूरा करते हैं।

ब्रह्मा, विष्णु, महेश यानि कि 'त्रिदेव' में से भगवान विष्णु को सृष्टि के संचालन का कार्य सौंपा गया है। यही वजह है कि पृथ्वी पर आयोजित होने वाले किसी भी मांगलिक कार्य के लिए बृहस्पति देव, जो स्वयं विष्णु भगवान के एक रूप हैं, उनको याद किया जाता है। विशेष तौर पर शादी-विवाह जैसे बंधनों को मजबूत बनाने के लिए बृहस्पति देव की पूजा करने का विधान शास्त्रों में बताया गया है।

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शास्त्र हमें यह भी बताते हैं कि किसी के भाग्य में बृहस्पति का संयोग ठीक नहीं है, तो उसके वैवाहिक जीवन में क्या-क्या संकट आ सकते हैं। शास्त्रों में इस बात का भी वर्णन है कि अगर पति पत्नी संयुक्त रूप से भगवान बृहस्पति की पूजा करते हैं, तो निश्चय ही उनके जीवन पर इसका सकारात्मक असर पड़ता है और उनका रिश्ता मधुर बना रहता है।

ऐसे में हम आज आपको भगवान बृहस्पति को प्रसन्न करने के कुछ ऐसे उपाय बताएंगे, जिससे दांपत्य जीवन में मधुरता बनी रहेगी और आपसी सामंजस्य बना रहेगा।

बिगड़े बृहस्पति का ऐसा होता है आपके जीवन पर असर

अगर आपके भाग्य में बृहस्पति शुभ नहीं है या वृहस्पति ग्रह टेढ़ा है तो इसका सीधा असर आपके वैवाहिक जीवन पर पड़ता है और आपके वैवाहिक जीवन में खलल पढ़ना प्रारंभ हो जाता है।

इतना ही नहीं, अगर आप शादीशुदा नहीं हैं और आपके भाग्य में बृहस्पति बाधित है, तो इसका असर यह होता है कि आपका विवाह संपन्न होने में बाधाएं उत्पन्न होने लगती हैं।

वहीं महिलाओं के संदर्भ में कहा जाता है कि अगर उनके भाग्य में बृहस्पति कमजोर है तो उनका चरित्र खराब होने की संभावना बनी रहती है।

दांपत्य जीवन खुशहाल बनाने के लिए ऐसे करें बृहस्पति भगवान की पूजा 

अगर आप पति पत्नी हैं और आपके रिश्ते में उठापटक जारी है यानी कि पति पत्नी के बीच किसी भी बात को लेकर मनमुटाव चल रहा है तो ऐसे में आपको भगवान बृहस्पति की पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से आपके रिश्ते का गतिरोध समाप्त होगा और आप आनंद पूर्वक गृहस्थ जीवन का सुख भोग सकेंगे।

इसके लिए आप गुरुवार के दिन, अपने पूजा वाले स्थान पर बृहस्पति भगवान के लिए आसन लगाएं। इसके लिए आपको पीले कपड़े का आसन बिछाना होगा और उस पर भगवान बृहस्पति यानी कि लक्ष्मी और विष्णु भगवान की मूर्ति स्थापित कर गंगाजल छिड़क कर शुद्ध करना होगा।

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भगवान बृहस्पति की पूजा में यह बेहद आवश्यक है कि पति और पत्नी दोनों सम्मिलित हों और खुशी मन से भगवान की आराधना करें।

पूजा के दौरान पति पत्नी को पीले रंग के वस्त्र पहनना बहुत आवश्यक है। पीले रंग के वस्त्र पहनने से भगवान प्रसन्न होते हैं।

वृहस्पति भगवान की पूजा के दौरान सुहागन औरत को सुहाग की प्रतीक चुनरी अपने सर पर ओढ़ना चाहिए, तो वहीं पति को कोई कपड़ा अपने कंधे पर अवश्य रखना चाहिए।

वृहस्पति भगवान की पूजा के दौरान देसी घी का दीपक जलाना भी बहुत शुभ होता है। जहां तक संभव हो इस दिए में केसर का एक धागा अवश्य डालें।

अगर पति पत्नी के बीच अत्यधिक विवाद होते हैं, तो पूजा के दौरान लाल रंग के धागे या मौली को भगवान के सामने अर्पित करें और इस मौली को दोनों पति पत्नी अपने दाहिने कलाई पर बांध लें, इससे दोनों के बीच मनमुटाव कम होंगे और रिश्ते मधुर बनेंगे।

अगर पति पत्नी के बीच में कटुता एक सीमा से भी ज्यादा बढ़ गई है, तो आपको लगातार 11, 21 या 51 गुरुवार का व्रत रखकर भगवान विष्णु को प्रसन्न करना चाहिए, जिससे आपके रिश्ते सामान्य हो सकें।

गुरुवार के दिन भगवान विष्णु को भोग के रूप में भीगे हुए चने और मुनक्के चढ़ाने से भगवान जल्दी प्रसन्न होते हैं, और आपकी सभी मनोकामना को पूरा करते हैं।

बृहस्पतिवार के दिन अगर ब्राम्हण को पीले रंग का अन्न, दान के रूप में दिया जाए, तो भी यह बेहद कारगर माना जाता है दाम्पत्य की स्थिरता बनाये रखने में।

इन उपायों को अपना कर आप अपना बिगड़ा हुआ बृहस्पति सुधार सकते हैं और सुखद वैवाहिक जीवन का आनंद ले सकते हैं। 

- विंध्यवासिनी सिंह 







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